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हवारा को पंजाब की जेल में भेजने से विधानसभा चुनाव पर पड़ेगा असर! IB की रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता

Published: Tue, 03 Nov 2026 04:16 PM (IST)

बेअंत सिंह हत्याकांड के दोषी जगतार सिंह हवारा को तिहाड़ से पंजाब शिफ्ट करने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में ...और पढ़ें

जगतार सिंह हवारा की पुरानी तस्वीर।

जगतार सिंह हवारा की पुरानी तस्वीर।

HighLights

  1. IB ने हवारा के पंजाब ट्रांसफर पर चुनाव असर की चेतावनी दी।

  2. सुप्रीम कोर्ट ने IB की रिपोर्ट को चिंताजनक बताया, सुनवाई फरवरी में।

  3. हवारा बेअंत सिंह हत्याकांड का दोषी, तिहाड़ से पंजाब जाना चाहता है।

डिजिटल डेस्क, चंडीगढ़। इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि बेअंत सिंह हत्याकांड के दोषी जगतार सिंह हवारा को दिल्ली की तिहाड़ जेल से पंजाब की किसी भी जेल में ट्रांसफर करने से राज्य के आगामी विधानसभा चुनावों पर भारी असर पड़ेगा। आईबी ने शीर्ष अदालत से यह भी कहा कि हवारा उच्च जोखिम वाली श्रेणी में आता है और उसे पंजाब ट्रांसफर नहीं किया जाना चाहिए।

जस्टिस एम एम सुंदरेश और जस्टिस पी बी वराले की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता एस मुरलीधर से कहा कि एजेंसी की रिपोर्ट काफी चिंताजनक है। इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता मुरलीधर ने बताया कि यदि चुनाव एक चिंता का विषय है, तो इस मामले पर तीन महीने बाद विचार किया जा सकता है।

शीर्ष अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए अगले साल फरवरी की तारीख तय की। 117 सदस्यीय पंजाब विधानसभा के लिए चुनाव अगले साल की शुरुआत में होने हैं।

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सुप्रीम कोर्ट ने मांगी थी IB की इनपुट

इससे पहले, शीर्ष अदालत ने दिल्ली सरकार को हवारा की उस याचिका पर आईबी से इनपुट मांगने का निर्देश दिया था, जिसमें उसने तिहाड़ से पंजाब की किसी जेल में ट्रांसफर करने की गुहार लगाई थी। बब्बर खालसा का यह आतंकी अगस्त 1995 में तत्कालीन पंजाब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है।

दिल्ली सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने शीर्ष अदालत को सूचित किया कि हवारा जेल ब्रेक की घटना में शामिल रहा है और हत्या के मामले में उसकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया था। यह तर्क देते हुए कि ट्रांसफर से उसके भागने की संभावना बढ़ सकती है, भाटी ने उच्च जोखिम वाले कैदियों के ट्रांसफर पर गृह मंत्रालय द्वारा जारी एक सलाह का हवाला दिया।

उन्होंने पंजाब सरकार द्वारा दायर एक हलफनामे का भी संदर्भ दिया और कहा कि हवारा के ट्रांसफर से राज्य में कानून और व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो सकती है। भाटी ने बताया कि हवारा को चंडीगढ़ जेल में सुरंग खोदने के एक मामले में भी दोषी ठहराया जा चुका है।

हवारा का जेल में बेदाग आचरण

पिछले साल 27 सितंबर को शीर्ष अदालत ने हवारा की याचिका पर केंद्र, चंडीगढ़ प्रशासन, दिल्ली और पंजाब सरकार को नोटिस जारी किए थे। हवारा 31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ में सिविल सचिवालय के प्रवेश द्वार पर हुए विस्फोट के मामले में अपनी बाकी की पूरी जिंदगी के लिए कारावास की सजा काट रहा है, जिसमें बेअंत सिंह और 16 अन्य लोग मारे गए थे।

शीर्ष अदालत में दायर याचिका में कहा गया है कि जनवरी 2004 की जेल ब्रेक की घटना को छोड़कर जेल में हवारा का आचरण बेदाग रहा है। इसमें कहा गया कि उसे तिहाड़ जेल से पंजाब की किसी भी अन्य जेल में स्थानांतरित किया जाना चाहिए क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी में उसके खिलाफ कोई मामला लंबित नहीं है।

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बड़ैल जेल से सुरंग खोदकर हुआ था फरार

हवारा, परमजीत सिंह भ्योरा, तारा और एक अन्य हत्या का दोषी देवी सिंह 22 जनवरी 2004 को चंडीगढ़ की उच्च सुरक्षा वाली बड़ैल जेल से लगभग 100 फीट लंबी सुरंग खोदकर भाग गए थे। हवारा और भ्योरा को अगले दो वर्षों के भीतर फिर से गिरफ्तार कर लिया गया था। उस मामले में भगोड़ा घोषित तारा को थाईलैंड में गिरफ्तार किया गया था, जबकि देवी सिंह अभी भी फरार है और उसे भी भगोड़ा घोषित किया जा चुका है।

याचिका में कहा गया था कि याचिकाकर्ता (हवारा) वर्तमान में पंजाब राज्य में दर्ज एक मामले में अपनी बाकी की पूरी जिंदगी के लिए उम्रकैद की सजा काट रहा है। वह पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिले का निवासी है और उसे पंजाब की ही किसी जेल में रखा जाना चाहिए।

एक मामले को छोड़ सभी से बरी हुआ हवारा

याचिका के अनुसार, बेअंत सिंह की हत्या के बाद से हवारा के खिलाफ 36 झूठे मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें से एक को छोड़कर बाकी सभी में वह बरी हो चुका है। इसमें यह भी उल्लेख किया गया कि उसी मामले में दोषी ठहराए गए और जेल ब्रेक का हिस्सा रहे एक अन्य व्यक्ति को तिहाड़ से चंडीगढ़ की जेल में स्थानांतरित कर दिया गया है।

याचिका में कहा गया, "केवल यह तथ्य कि याचिकाकर्ता को सालों पहले एक उच्च जोखिम वाला कैदी माना गया था, आज उसे दिल्ली में रखने और पंजाब न भेजने का कोई सही कारण नहीं है।" इसके साथ ही यह भी जोड़ा गया कि उसकी बेटी पंजाब में रहती है।

मौत की सजा उम्रकैद में तब्दील

याचिका में आगे बताया गया कि इस मामले में जो सवाल उठता है वह यह है कि क्या कोई व्यक्ति जिस पर एक गंभीर सामाजिक उथल-पुथल के संदर्भ में हत्या करने का आरोप लगाया गया था। जहां मृतक मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के निर्देशों पर राज्य पुलिस द्वारा हजारों युवा सिखों का फर्जी एनकाउंटर किया गया था और जिस अपराध को उसके असफल जेल ब्रेक के प्रयास द्वारा और गंभीर माना गया था।

लेकिन, जिसने पिछले 19 वर्षों से जेल में एक बेदाग जीवन जिया है, वह पंजाब की जेल में ट्रांसफर के लिए इस अदालत से आदेश मांग सकता है? मार्च 2007 में एक ट्रायल कोर्ट ने हवारा को मौत की सजा सुनाई थी।

अक्टूबर 2010 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने उसकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था, जिसमें यह निर्देश दिया गया था कि उसे जीवन भर जेल से रिहा नहीं किया जाएगा। हवारा की याचिका में कहा गया कि हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ उसके द्वारा और साथ ही अभियोजन पक्ष द्वारा दायर की गई अपीलें शीर्ष अदालत में लंबित हैं।

(इनपुट-PTI)

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