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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 12, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

कांग्रेस में मजबूत होने लगी है नवजोत सिंह सिद्धू की पकड़

By Kamlesh BhattEdited By:
Published: Tue, 12 Sep 2017 12:32 PM (IST)Updated: Tue, 12 Sep 2017 12:34 PM (IST)

अकालियों का विरोध करने वाले विधायक सिद्धू के साथ मजबूती के साथ आने लगे हैं। मजीठिया के खिलाफ कार्रवाई की ...और पढ़ें

कांग्रेस में मजबूत होने लगी है नवजोत सिंह सिद्धू की पकड़
कांग्रेस में मजबूत होने लगी है नवजोत सिंह सिद्धू की पकड़

चंडीगढ़ [मनोज त्रिपाठी]। पंजाब सरकार में भले ही नवजोत सिंह सिद्धू की पकड़ विभिन्न मुद्दों को लेकर न बन पा रही हो, लेकिन कांग्रेस में लगातार सिद्धू की पकड़ मजबूत होती जा रही है। खासतौर पर अकालियों के खिलाफ विभिन्न मामलों में कार्रवाई की मांग करने वाले विधायक अंदरखाते सिद्धू के साथ खड़े होने लगे हैं। इसकी झलक भी दो सप्ताह से सिद्धू के दरबार में हाजिर होने वाले विधायकों की संख्या दे रही है।

विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में सिद्धू की ज्वाइनिंग को लेकर खासा विरोध दिखाई दिया था। कैप्टन अमरिंदर ने भी कई बार इस बाबत स्पष्ट तौर पर कहा था कि सिद्धू की जरूरत कांग्रेस को नहीं है, बल्कि सिद्धू को कांग्रेस की जरूर हो सकती है। सीधे राहुल गांधी से बातचीत व भरोसा लेकर सिद्धू को कांग्रेस में आने का रास्ता क्लीयर किया गया था।

विधानसभा चुनाव में रिकार्ड जीत के बाद सत्ता में आई कांग्रेस ने लगातार सिद्धू को झटके पर झटके देने शुरू कर दिए। डिप्टी सीएम का सपना देखने वाले सिद्धू के सपने उस वक्त चकनाचूर हो गए जब मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उन्हें स्थानीय निकाय विभाग सौंपा। इसके बाद सिद्धू ने अर्बन हाउसिंग डेवलपमेंट को भी स्थानीय निकाय का हिस्सा बनाने की मांग की, लेकिन उस पर भी कैप्टन ने गौर नहीं फरमाया। मंत्री बनने के बाद सूबे की सियासत में गुरू 100 की स्पीड से दौड़ रहे थे।

उन्होंने फास्ट वे केबल कारोबार को लेकर कार्रवाई की तैयारी की तो कैप्टन ने मुद्दा गरम होने के बाद यह कहकर इसकी हवा निकाल दी कि बदले की भावना से कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसके बाद तीन आइएएस अफसरों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में सिद्धू द्वारा कार्रवाई की सिफारिश पर भी मुख्यमंत्री कार्यालय ने कोई गौर नहीं फरमाया। हाल ही में पर्यटन विभाग के पूर्व डायरेक्टर द्वारा एतिहासिक धरोहरों को विदेश में नीलाम करवाने के मामले में कार्रवाई की मांग को भी कैप्टन ने कोई तवज्जो नहीं दी। सिद्धू ने कैप्टन से मुलाकात करके खुद उन्हें पत्र सौंपा था।

मंत्री बनने से पहले और मंत्री बनने के बाद तक सिद्धू ने अकालियों के खिलाफ आग उगलनी बंद नहीं की है। नतीजतन कैप्टन से अकालियों के खिलाफ कार्रवाई की आस लगाए बैठे कई विधायक अब अंदरखाते सिद्धू से जुड़ने लगे हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सचिवालय की बजाय म्यूनिसिपल भवन में अपना दरबार लगाने वाले सिद्धू के पास अब आने वाले विधायकों की संख्या बढ़ने लगी है। बीते सप्ताह पंजाब कला परिषद के चेयरमैन सुरजीत पातर को कुर्सी पर बैठाने के समय सिद्धू के साथ जालंधर व अमृतसर के विधायकों के साथ लुधियाना, गुरदासपुर व फिरोजपुर के विधायक भी पहुंचे थे।

कार्यशैली में किया बदलाव

कैप्टन के साथ बैठकों में डेरा बाबा नानक के कांग्रेसी विधायक सुखजिंदर सिंह रंधावा सहित कई विधायक अकाली नेता बिक्रम मजीठिया के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर चुके हैं। रंधावा फास्ट वे के खिलाफ कार्रवाई को लेकर भी सिद्धू के साथ खड़े हुए थे। बीते दिनों फिरोजपुर के विधायक परमिंदर पिंकी भी खुलकर सिद्धू के साथ खड़े नजर आए। मौके की नजाकत भांपकर सिद्धू ने भी अब अपनी कार्यशैली में बदलाव किया है और खुद बोलने  के बजाय विधायकों की भी सुनने लगे हैं।

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