नगर निगम चुनाव पर अकाली दल ने उठाए सवाल, राज्य चुनाव आयुक्त को हटाने की राज्यपाल से की मांग
अकाली दल ने नगर निगम चुनाव में कथित धांधली को लेकर राज्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग की। डॉ. ...और पढ़ें

अकाली दल के वक्ता डॉ. दलजीत चीमा।
HighLights
अकाली दल ने नगर निगम चुनावों में धांधली का आरोप लगाया।
राज्यपाल से चुनाव आयुक्त राज कमल चौधरी को हटाने की मांग।
सुप्रीम कोर्ट के निष्कर्षों और आयोग की रिपोर्ट का हवाला दिया।
रोहित कुमार, चंडीगढ़। नगर निगम चुनावों में नामांकन से लेकर मतदान तक हुई कथित धांधली को लेकर शिरोमणि अकाली दल ने राज्य सरकार पर हमला बोला है। पार्टी ने राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से राज्य चुनाव आयुक्त राज कमल चौधरी को पद से हटाने की मांग की है।
अकाली दल के वरिष्ठ नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निष्कर्षों से स्पष्ट हो गया है कि दिसंबर 2024 में हुए नगर निगम चुनावों की प्रक्रिया हिंसा, धमकी और उम्मीदवारों को रोकने जैसी घटनाओं से प्रभावित हुई थी।
डाॅ. चीमा ने कहा कि पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति निर्मलजीत कौर की अध्यक्षता में गठित न्यायालय द्वारा नियुक्त तथ्य-जांच आयोग ने भी विपक्षी उम्मीदवारों के साथ मारपीट, नामांकन दाखिल करने से रोकने और जबरन नामांकन वापस करवाने की बात की पुष्टि की है।
उनके अनुसार, इससे अकाली दल की उन शिकायतों की पुष्टि हुई है, जिनमें राज्य चुनाव आयुक्त पर नागरिक और पुलिस मशीनरी के दुरुपयोग को लेकर कार्रवाई न करने के आरोप लगाए गए थे। उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों ने नगर निगम चुनावों में आम आदमी पार्टी सरकार की कथित तौर पर मदद की, उनकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
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लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल
डाॅ. चीमा ने कहा कि राज्य चुनाव आयुक्त का कार्यकाल लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है, इसलिए उन्हें पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है।
अकाली दल ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का स्वागत किया, जिसमें पटियाला के 28 वार्ड, बाघापुराना के सभी 15 वार्ड और धर्मकोट के सात वार्डों में सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में कमेटियां गठित करने का निर्देश दिया गया है। डा चीमा ने कहा कि इससे चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर उठे सवालों की गंभीरता का पता चलता है।
डाॅ. चीमा ने पराली जलाने के आरोप में किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान से स्पष्टीकरण मांगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने पहले किसानों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने और पराली प्रबंधन के लिए प्रति एकड़ 1500 रुपये देने की बात कही थी। इसके बावजूद अब पराली जलाने के मामलों की निगरानी के लिए ड्रोन लगाए जा रहे हैं और किसानों के खिलाफ मामले दर्ज किए जा रहे हैं।
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मुआवजे की मांग और भंडारण संकट
उन्होंने पूछा कि क्या किसानों को 1500 रुपये प्रति एकड़ देने के संबंध में कोई अधिसूचना जारी की गई है और यह राशि कब तक दी जाएगी। डा. चीमा ने आरोप लगाया कि सरकार ने किसानों को पराली प्रबंधन के लिए पर्याप्त मशीनरी भी उपलब्ध नहीं कराई और न ही मुआवजा दिया।
अकाली नेता ने राज्य सरकार से केंद्र के साथ समन्वय कर धान की आवक से पहले भंडारण की व्यवस्था करने की मांग की। उन्होंने कहा कि पंजाब के गोदामों में अभी 17 लाख मीट्रिक टन धान और सात लाख मीट्रिक टन चावल पड़ा है, जिसे राज्य से बाहर भेजा जाना है। अगले एक महीने में मंडियों में करीब 180 लाख मीट्रिक टन धान आने की संभावना है। ऐसे में भंडारण की जगह बनाने के लिए धान और चावल को जल्द राज्य से बाहर भेजने की प्रक्रिया तेज करनी चाहिए।
