CM मान के OSD घुम्मन को हाई कोर्ट से राहत नहीं, सिंगल बेंच ने सुनवाई से किया इनकार, उपयुक्त मंच पर जानने की सलाह
मुख्यमंत्री कार्यालय में कार्यरत OSD घुम्मन को अदालत से कोई राहत नहीं मिली। खंडपीठ के निर्देश पर CBI मामला दर्ज ...और पढ़ें

OSD राजबीर सिंह घुम्मन।
HighLights
राजबीर घुम्मन को हाई कोर्ट की सिंगल बेंच से राहत नहीं मिली।
एफआईआर डिवीजन बेंच के आदेश पर दर्ज की गई थी।
कोर्ट ने घुम्मन को उपयुक्त मंच पर जाने की सलाह दी।
दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री कार्यालय में विशेष ड्यूटी पर तैनात अधिकारी राजबीर सिंह घुम्मन को हाई कोर्ट से राहत नहीं मिल पाई है। हाई कोर्ट के जस्टिस जे एस बेदी ने कहा की यह मामला उसकी बैंच के सामने सुनवाई के लिये उपयुक्त नहीं है क्यों कि इस मामले में एफआईआर डिवीजन बेंच के आदेश पर दर्ज हुई है। कोर्ट ने उसे उपयुक्त प्लेटफार्म पे जाने की सलाह दी।
घुम्मन ने याचिका में दावा किया है कि उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू करने से पहले भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत पंजाब सरकार से अनिवार्य पूर्व स्वीकृति नहीं ली गई। उनका कहना है कि जिस मामले में सीबीआई ने एफआइआर दर्ज की, वह उनके सरकारी कार्यों और अधिकारियों के स्थानांतरण व तैनाती से जुड़े कथित निर्णयों से संबंधित है।
ऐसे में धारा 17ए की सुरक्षा लागू होती है। याचिका के अनुसार घुम्मन को पंजाब सरकार ने 31 मार्च 2022 के आदेश के तहत मुख्यमंत्री कार्यालय में विशेष ड्यूटी अधिकारी नियुक्त किया था। याचिकाकर्ता ने बताया है कि 31 अक्टूबर 2025 को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो पंजाब के निदेशक को एक शिकायत दी गई थी। इसके बाद मामले में जांच और आगे की कार्रवाई का घटनाक्रम शुरू हुआ।
हाई कोर्ट के आदेश के बाद दर्ज हुई FIR
याचिका में कहा गया है कि पांच अक्टूबर 2026 को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की एक खंडपीठ ने एक अलग याचिका में सीबीआई को मामले में एफआइआर दर्ज कर जांच आगे बढ़ाने का निर्देश दिया था। घुम्मन का कहना है कि इसी आदेश के दिन सीबीआई की आर्थिक अपराध शाखा-द्वितीय, नई दिल्ली ने एफआइआर दर्ज की। इसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के साथ भारतीय न्याय संहिता की धाराएं भी लगाई गई हैं।
घुम्मन के मुताबिक एफआइआर दर्ज होने के अगले दिन छह अक्टूबर को सीबीआई के सहायक पुलिस अधीक्षक ने चंडीगढ़ स्थित विशेष अदालत से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 96 के तहत तलाशी वारंट हासिल किया। इसके बाद पंजाब के संगरूर जिले में स्थित उनके पैतृक गांव घराचों स्थित आवास पर तलाशी ली गई। याचिका में आरोप लगाया गया है कि तलाशी के दौरान परिवार के सदस्यों की अनुपस्थिति में देर रात तक कार्रवाई चली।
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धारा 17ए को बताया जांच से पहले अनिवार्य
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा है कि सरकारी अधिकारी के आधिकारिक फैसलों या सिफारिशों से संबंधित भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच से पहले धारा 17ए के तहत सक्षम सरकार की पूर्व स्वीकृति आवश्यक है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि पंजाब सरकार ने 2021 में संबंधित मानक संचालन प्रक्रिया अपनाई थी, जिसके तहत ऐसे मामलों में पुलिस अधिकारी को एफआइआर दर्ज करने से पहले निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार मंजूरी लेनी होती है। याचिका में घुम्मन ने सीबीआई की एफआइआर रद करने, तलाशी वारंट और तलाशी कार्रवाई को अवैध घोषित करने तथा आगे की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है।
साथ ही पंजाब सरकार से यह रिकॉर्ड पेश करने को कहा गया है कि उनके खिलाफ धारा 17ए के तहत कभी कोई पूर्व स्वीकृति मांगी या दी गई थी अथवा नहीं। याचिका में यह भी कहा गया है कि संबंधित कार्रवाई से उनके मौलिक अधिकार प्रभावित हुए हैं।
