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FIR और आरोप मात्र से नहीं छिन सकती नौकरी, हाईकोर्ट ने पंजाब पुलिस में कांस्टेबल की सेवा बहाल करने के दिए आदेश

Published: Tue, 03 Nov 2026 01:01 PM (IST)

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल एफआईआर या आपराधिक संबंधों के आरोप मात्र से पुलिसकर्मी को ...और पढ़ें

ये AI जनरेटेड प्रतीकात्म्क तस्वीर है।

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HighLights

  1. विभागीय जांच के बिना बर्खास्तगी असंवैधानिक: हाईकोर्ट।

  2. केवल FIR या आरोप पर्याप्त आधार नहीं माने जाएंगे।

  3. पंजाब पुलिस कांस्टेबल को सेवा में बहाल करने का निर्देश।

दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ FIR दर्ज होना या उसके आपराधिक तत्वों से संबंध का आरोप लगना, उसे बिना विभागीय जांच बर्खास्त करने का पर्याप्त आधार नहीं है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब पुलिस के एक कांस्टेबल की बर्खास्तगी रद करते हुए कहा कि विभागीय जांच संभव न होने की ठोस परिस्थितियां बताए बिना संविधान के अनुच्छेद 311(2)(बी) के तहत मिली असाधारण शक्ति का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

अदालत ने कांस्टेबल को सभी परिणामी लाभों सहित सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया। जस्टिस नमित कुमार ने कहा कि केवल यह कहना पर्याप्त नहीं कि कर्मचारी के आपराधिक तत्वों से संबंध हैं या वह गवाहों को प्रभावित कर सकता है।

विभाग को बताना होगा कि किन गवाहों को प्रभावित किया गया, कर्मचारी ने क्या किया और किन परिस्थितियों में निष्पक्ष विभागीय जांच संभव नहीं थी। गवाहों की सुरक्षा को लेकर आशंका होने पर यह भी स्पष्ट करना होगा कि सुरक्षा उपायों के साथ उनके बयान क्यों दर्ज नहीं किए जा सकते थे।

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करतारपुर थाने में दर्ज हुई थी FIR

कांस्टेबल 22 नवंबर 2016 को पंजाब पुलिस में भर्ती हुआ था। उसके खिलाफ 10 जनवरी 2021 को जालंधर ग्रामीण के करतारपुर थाने में एनडीपीएस एक्ट की धारा 21(बी) के तहत FIR दर्ज हुई। उसी दिन उसे गिरफ्तार किया गया और 12 फरवरी 2021 को जमानत मिली।

निलंबन के बाद 21 अगस्त 2021 को उसे बहाल कर दिया गया, जबकि विभागीय जांच लंबित रही। उसे दो आरोपपत्र दिए गए—एक 142 दिन तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहने और दूसरा एनडीपीएस मामले में कथित संलिप्तता को लेकर।

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नवंबर 2021 को किया गया बर्खास्त

विभाग ने 9 नवंबर 2021 को अनुच्छेद 311(2)(बी) और पंजाब पुलिस नियमों के नियम 16.1 का हवाला देकर उसे बर्खास्त कर दिया। उसकी अपील 27 अक्टूबर 2022 को खारिज हुई। राज्य सरकार ने जांच अधिकारी की गोपनीय रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि कांस्टेबल के नशा तस्करी से जुड़े लोगों से संपर्क थे और वह अभियोजन पक्ष के गवाहों को प्रभावित कर सकता था।

हाईकोर्ट ने कहा कि बर्खास्तगी आदेश में न गवाहों की पहचान बताई गई, न किसी धमकी या दबाव का ठोस उल्लेख था। अदालत ने बर्खास्तगी और अपील खारिज करने के आदेश रद कर दिए। हालांकि, विभागीय जांच जारी रखने या आपराधिक मुकदमे के नतीजे के आधार पर कानून के अनुसार कार्रवाई करने का विभाग का अधिकार बरकरार रहेगा।

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