जागरण संवाददाता, चंडीगढ़ : भारतीय दंड संहिता (आइपीसी) 377 की वजह से ट्रांसजेंडर्स को हर जगह अपराधी की तरह देखा जाता था। लोग अपराधी जैसा व्यवहार करते थे। पुलिस स्टेशन और प्रशासन के गलियारों तक में शोषण होता था। सुप्रीम कोर्ट का फैसला उन्हें सिर उठाकर जीने की आजादी देगा। मंगलमुखी ट्रांसजेंडर वेलफेयर सोसायटी के वॉलंटियर ओशीन सरकार मंगलमुखी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए यह बात कही। इस धारा से उनके निजता के मौलिक अधिकार का हनन हो रहा था। ट्रांसजेंडर को हाव भाव से आसानी से पहचाना जा सकता है, इसलिए सबसे ज्यादा परेशानी उन्हें ही झेलनी पड़ती थी। जबकि समलैंगिक, बायसेक्सुअल, लेस्बिन जल्दी से अपनी पहचान उजागर नहीं करते। जिस कारण उन्हें परेशानी थोड़ी कम होती है, लेकिन छुपकर रहना होता था। अब कोई भी बालिग आपसी सहमति से साथ रह सकते हैं। मिला खुली हवा में मर्जी से जीने का अधिकार

वॉलंटियर धनंजय मंगलमुखी ने बताया कि वह सालों से अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं। समानता का दर्जा मिले इसके लिए लोगों की मानसिकता बदलने का प्रयास करते रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से चंडीगढ़ के 3 हजार से अधिक ट्रांसजेंडर, समलैंगिक, लेस्बियन और बायसेक्सुअल को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि हजारों लोग ऐसे हैं जो छुपकर रहते रहे हैं। उन्हें भी खुली हवा में अपनी मर्जी से जीने का अधिकार मिलेगा। 377 के तहत समान लिंग वालों के बीच शारीरिक संबंधों को अपराध माना जाता था। इसमें 10 साल से उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान था। ऐसा करने पर दोनों पर केस दर्ज कर शोषण होता था, लेकिन अब समान लिंग वालों के बीच शारीरिक संबंध अपराध नहीं माना जाएगा। पंजाब यूनिवर्सिटी में बने अलग टॉयलेट

धनंजय मंगलमुखी और उनकी सोसायटी लंबे समय से यह लड़ाई लड़ते रहे हैं। लोगों की सोच बदलने के लिए उन्होंने ट्रांसजेंडर फैशन शो और डांस कंपटीशन और क्रिकेट लीग तक करवाई। उनकी मांग के बाद ही पंजाब यूनिवर्सिटी में पहली बार ट्रांसजेंडर्स के लिए अलग से टॉयलेट बनाए गए। रोज फेस्टिवल में अलग से स्टॉल अलॉट की गई।

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