तय समय पर चार्जशीट पेश नहीं कर सकी CBI, भुल्लर को आय से अधिक संपत्ति मामले में जमानत, भ्रष्टाचार केस में रहेंगे जेल में
निलंबित डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर को आय से अधिक संपत्ति मामले में सीबीआई कोर्ट से जमानत मिल गई है। सीबीआई द्वारा तय समय में चार्जशीट दाखिल न करने के क ...और पढ़ें

पंजाब के निलंबित डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर।
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। पंजाब के निलंबित डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर को आय से अधिक संपत्ति के मामले में सीबीआई की विशेष अदालत से बड़ी राहत मिली है। सीबीआई कोर्ट ने सोमवार को भुल्लर को जमानत दे दी, हालांकि उन पर भ्रष्टाचार का भी केस चल रहा है जिसमें तीन दिन पहले ही उनकी जमानत अर्जी रद हुई थी।
ऐसे में आय से अधिक संपत्ति मामले में जमानत मिलने के बावजूद भुल्लर को बुड़ैल जेल में ही रहना होगा। सीबीआई ने इस मामले में तय समय में चार्जशीट दाखिल नहीं की, इसलिए भुल्लर के वकील एसपीएस भुल्लर ने अदालत से जमानत की मांग की।
उन्होंने कहा कि सीबीआई के पास आय से अधिक मामले संपत्ति के मामले की जांच पूरी करने के लिए 60 दिन थे, जोकि पांच जनवरी को पूरे हो गए। ऐसे में वह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 187 के तहत जमानत के हकदार हैं।
भुल्लर के खिलाफ सीबीआई ने 29 अक्टूबर को आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज किया था जिसमें पांच नवंबर को उन्हें औपचारिक तौर पर गिरफ्तार किया गया था। इसलिए इस मामले के 60 दिन रविवार को पूरे हो गए।
ढाई महीने से जेल में हैं भुल्लर
सीबीआई ने भुल्लर को मंडी गोबिंदगढ़ के स्क्रैप डीलर आकाश बत्ता की शिकायत पर गिरफ्तार किया था। आरोप था कि भुल्लर ने अपने बिचौलिए कृष्णु शारदा के साथ मिलकर उससे आठ लाख रुपये रिश्वत मांगी थी।
भुल्लर को 16 अक्टूबर 2025 को गिरफ्तार किया गया। फिर उनके सेक्टर-40 स्थित घर पर छापेमारी की जहां से साढ़े सात करोड़ रुपये कैश, ढाई किलो सोना और कई प्रापर्टी के कागजात बरामद हुए थे। इसलिए उन पर आय से अधिक संपत्ति का भी केस दर्ज किया गया।
एक ला पाइंट पर फंसा पेंच, ढाई घंटे चली बहस
भुल्लर के वकील ने दलील कि सीबीआइ के पास चार्जशीट दाखिल करने के लिए 60 दिन थे, जबकि सीबीआइ के सरकारी वकील ने कहा कि उनके पास 90 दिनों का समय है। कानून के मुताबिक जांच एजेंसी की ओर से तय समय पर चार्जशीट दाखिल न होने पर आरोपित जमानत का हकदार होता है जोकि पहले सीआरपीसी की धारा 167(2) के तहत मिलती थी जिसे अब बदलकर बीएनएसएस की धारा 187(3) कर दिया गया है।
नई और पुरानी धाराएं लगभग एक समान है, बस इसमें एक छोटा सा बदलाव हुआ है और उसी के कारण ढाई घंटे तक पेंच फंसा रहा। सीआरपीसी-167(2) के तहत 90 दिनों का समय उन मामलों में दिया जाता था जिनमें सजा का प्रविधान 10 साल से कम न हो। जबकि अब बीएनएसएस-187(3) में 90 दिन उन मामलों में दिए गए हैं जिनमें 10 साल या उससे ज्यादा सजा का प्रविधान है।
अब आय से अधिक संपत्ति मामले में न्यूनतम चार साल और अधिकतम 10 साल की सजा का प्रविधान है। ऐसे में दोनों वकील 60 और 90 दिनों के समय पर ढाई घंटे तक बहस करते रहे। भुल्लर के वकील ने फिर केरल हाईकोर्ट की एक जजमेंट दी जिसमें विवाद के बारे में स्पष्ट उल्लेख किया गया था। ऐसे में जज ने माना कि सीबीआई के पास चार्जशीट दाखिल करने के लिए 90 नहीं बल्कि 60 ही दिन थे। इस आधार पर अदालत ने भुल्लर को जमानत दे दी।

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