चंडीगढ़ में पार्षदों को सताने लगा आरक्षित वार्ड के फेरबदल का डर, प्लान ए और बी किए तैयार
चंडीगढ़ में मेयर चुनाव के बाद नगर निगम चुनाव की चर्चा है। पार्षदों को अपने वार्ड आरक्षित होने का डर सता रहा है, जिससे वे अभी से 'प्लान ए' और 'प्लान बी ...और पढ़ें

जनवरी के आखिरी सप्ताह में चंडीगढ़ को मिल जाएगा नया मेयर।
बलवान करिवाल, चंडीगढ़। मेयर चुनाव जनवरी के आखिरी सप्ताह में होने हैं। इसके बाद वर्ष 2026 के अंत में नगर निगम चुनाव होंगे। इन दिनों मेयर चुनाव से ज्यादा चर्चा नगर निगम चुनाव की हो रही है। नगर निगम चुनाव में भी इस बात को लेकर पार्षदों की धड़कनें बढ़ी हैं कि कौन से वार्ड आरक्षित हो रहे हैं।
कई पार्षदों को डर है कि कहीं उनका वार्ड आरक्षित न हो जाए। अगर ऐसा हुआ तो ऐसे पार्षदों ने अभी से प्लान ए और बी भी तैयार कर लिया है। इस प्लान में यह है कि अगर वार्ड आरक्षित हुआ तो फिर किस वार्ड से चुनाव लड़ा जाएगा। साथ ही उस वार्ड में पहले मौजूद पार्टी के पार्षद से कैसे निपटा जाएगा। इन सभी बातों को लेकर तैयारी हो रही है।
कई पार्षदों को तो पिछले चुनाव में ही इस आरक्षित फार्मूले से परेशानी झेलनी पड़ी थी। कुछ को सीट गंवानी भी पड़ी थी तो कई पार्षदों या नेता की पत्नी को इससे मौका मिल गया। आरक्षित सीटों की घोषणा डीसी ऑफिस की तरफ से की जानी है। इस पर पूरा मंथन किया जा चुका है।
आरक्षित सीटों की घोषणा अगले कुछ दिनों में हो भी सकती है। जिन पार्षदों को यह संभावना लग रही है कि उनका वार्ड आरक्षित हो सकता है तो वह अभी से संभावनाएं तलाशने लगे हैं। साथ ही यह समीकरण भी सेट कर रहे हैं कि अगर ऐसा हुआ तो उनका मुकाबला किससे होगा और उस प्रत्याशी का वार्ड में कितना प्रभाव है। ऐसे कई पार्षद तो अपने साथ लगते वार्ड में अभी से संपर्क भी बढ़ाने लगे हैं।
कुछ ने आरक्षित सीटों पर प्रशासन की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही यह संपर्क बढ़ाना शुरू कर दिया था। ऐसा इसलिए कि उसे वार्ड में काम करने का लंबा समय मिल जाए। कई पार्षद जो अपना वार्ड नहीं बदलना चाहते और उन्हें आरक्षित होने का डर भी है वह इस ताक में हैं कि उन्हें किसी तरह भनक लग जाए कि उनका वार्ड तो आरक्षित नहीं हो रहा है।

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