प्रधानमंत्री जी...अफसर तो सुनते नहीं अब आपसे ही उम्मीद, सालों से लंबित मुद्दों से परेशान हैं चंडीगढ़ के लोग
चंडीगढ़ के लोग लंबे समय से प्रशासनिक अड़चनों से जूझ रहे हैं। लीज होल्ड से फ्री होल्ड हाउसिंग इंप्लाइज स्कीम शेयर वाइज प्रापर्टी ट्रांसफर मकानों का मालिकाना हक कर्मचारियों के मुद्दे व्यापारियों की समस्याएं स्टार्टअप नीति का अभाव जैसे कई मुद्दे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के शहर आगमन से लोगों को उम्मीद है कि इन समस्याओं का समाधान होगा।

राजेश ढल्ल, चंडीगढ़। शहर का हर वर्ग परेशान है। इंप्लॉइज, दुकानदार, उद्योगपति, आम जनता सालों से अफसरशाही के दरवाजों पर ठोकरें खा रही है। कोई नोटिस से परेशान है तो कोई सालों से अपने मकान के लिए धक्के खा रहा है।
उद्योगपति परेशान होकर शहर छोड़कर जा रहे है। कोई नया निवेश नहीं हो रहा। अब जनता को उम्मीद सिर्फ प्रधानमंत्री ओर गृह मंत्री से ही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह तीन दिसंबर को शहर में आ रहे हैं। ऐसे में शहरवासियों को उम्मीद है कि शायद उनकी फरियाद भी सुन ली जाए।
15-20 साल से लंबित हैं ये मुद्दे
शहर का हर वर्ग इस समय किसी न किसी समस्यां से जूझ रहा है। शहर में कई ऐसे मुद्दे हैं जो कि 15 से 20 साल से लंबित है। जिनकों हल करने की मांग समय समय पर लोग प्रशासन से करते आ रहे हैं।
इनमे लीज टू फ्री होल्ड, हाउसिंग इंप्लाइज स्कीम, शेयर वाइज प्रापर्टी का पंजीकरण रूकने, हाउसिंग बोर्ड के मकानों में जरूरत के अनुसार किए गए बदलाव को नियमित करने, शहर के युवाओं को डोमिसाइल प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरियों में प्राथमिकता,पंजाब विश्वविद्यालय में फंड की कमी, लाल डोरे की सीमा बढ़ाने के अहम मुद्दें है।
चंडीगढ़ केंद्रीय शासित प्रदेश होने के कारण प्रशासन सीधे तौर पर गृह मंत्रालय के अंतगर्त आता है। इसके साथ ही हाउसिंग बोर्ड के मकानों में बदलाव को नियमित करने के मामले में भूकंप क्षेत्र का हवाला देते हुए मुद्दें को खारिज कर दिया है। लेकिन अब प्रधानमंत्री और गृह मंत्री अमित शाह के शहर में आने पर यह मुद्दें फिर से गरमा गए है।
यह भी पढ़ें- चंडीगढ़ ने पंजाब की 2298 एकड़ जमीन हड़पी, बीजेपी नेता का दावा; कहा- इसे तुरंत वापस ले मान सरकार
शहर के अहम मुद्दे
लीज होल्ड से फ्री होल्ड: लीज होल्ड इंडस्ट्रियल ओर कमर्शियल प्रॉपर्टी का फ्री होल्ड करने की मांग लंबे समय से व्यापारी और उद्योगपति कर रहे हैं।गृह मंत्रालय ने हाल ही में लीज होल्ड इंडस्ट्रियल और कमर्शियल प्रॉपर्टी को फ्री होल्ड करने का प्रपोजल भी खारिज किया है। सैकड़ों व्यापारी और उद्योगपति इस मांग से प्रभावित है, क्योंकि इससे उन्हें अपनी प्रापर्टी पर लोन भी नहीं मिल रहा है।
शेयर वाइज प्रापर्टी ट्रांसफर: शहर में फ्लोर के अनुसार प्रॉपर्टी का पंजीकरण बंद है।जिस कारण जहां प्रशासन को स्टांप डयूटी के तौर पर मिलने वाली 45 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो चुका हैं वहीं 600 करोड़ रुपये के सौदे रूके हुए हैं। शहर के हजारों लोग इससे प्रभावित है।
लाल डोरे का विस्तार: गांवों के लाल डोरे के बाहर बने निर्माण को नियमित करने का मामला कई सालों से लंबित है। पूर्व प्रशासक बनवारी लाल पुराेहित ने भी इस पर पालिसी बनाने के निर्देश दिए थे लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ है। सांसद मनीष तिवारी ने इस मामले से जुड़े सवाल भी संसद में पूछे थे।जबकि प्रशासन लाल डोरे के बाहर बने निर्माण को अवैध मानता है।
मकानों का मालिकाना हक: शहर में 40 हजार से ज्यादा ईडब्लयूएस मकान है जहां रहने वाले लोग मालिकाना हक मांग रहे हैं।हर चुनाव में यह मामला गरमाता है। प्रशासन ने इन मकानों का सर्वे भी करवाया है।लेकिन केंद्र सरकार की मंजूरी के बिना यह संभव नहीं है।यह मामला भी संसद में उठ चुका है।
कर्मचारियों की मांग: कर्मचारियों के कई मुद्दें लंबित है। जिनमे पुरानी पेंशन को लागू करना एक बड़ी मांग है।इसके अलावा पंजाब व हरियाणा से डेपूटेशन पर आए कर्मचारी महंगाई भत्ते की मांग कर रहे हैं।शहर में कई विभागों में कर्मचारियों की भारी कमी है।जिनकी भर्ती नहीं हो पा रही है। पीजीआइ में 500 से ज्यादा पद खाली पड़े हैं।
युवाओं को नहीं मिल रहा डोमिसाइल होने का फायदा: शहर के युवाओं को डोमिसाइल होने का फायदा नहीं मिल रहा है।इसलिए युवाओं को यहां के सरकारी विभागों में नौकरी की प्राथमिकता नहीं मिलती है जबकि पंजाब व हरियाणा के युवाओं को अपने राज्य में नौकरी लेने पर निवास प्रमाणपत्र का फायदा मिलता है।
वायलेशन के आ रहे हैं नोटिस: व्यापारियों के कई मुद्दें है जिनका लंबे समय से हल नहीं निकल पा रहा है।ऐसे में इस चुनाव में भी शहर के बूथों में एक अतिरिक्त मंजिल का निर्माण के अलावा जो वायलेशन होने पर 500 रुपये स्केयर फीट के हिसाब से जुर्माना लगाने के नोटिस भेजे जा रहे हैं उन्हें खारिज करना अहम मुद्दा रहेगा।बूथों के ऊपर एक मंजिल का निर्माण करने की मंजूरी भी व्यापारी मांग रहे हैं।
स्टार्टअप नीति नहीं हुई लागू: स्टार्टअप नीति नहीं बन पाई जबकि इस नीति को लेकर प्रशासन के अधिकारी 50 से ज्यादा बैठक कर चुके हैं।नीति न बनने से युवाओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई उद्योगपति पंचकूला और मोहाली में शिफ्ट कर चुके हैं।
बदलाव किए जाएं नियमित: 68 हजार हाउसिंग बोर्ड के मकानों में रहने वाले लोग शत प्रतिशत एरिया कवर करने के निर्माण को रेगुलर करने की मांग कर रहा है।हाउसिंग बोर्ड की एसोसिएशन दिल्ली पेटर्न पर एकमुश्त राहत देने की मांग कर रहे हैं। लेकिन प्रशासन इसके लिए तैयार नहीं है।
हाउसिंग स्कीम का इतंजार: इस समय शहर के 3950 कर्मचारियों का परिवार पिछले 16 साल से अपनी हाउसिंग स्कीम के तहत फ्लैट का इंतजार कर रहा है। पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट का फैसला आने के बावजूद प्रशासन स्कीम के तहत फ्लैट का निर्माण करने के लिए तैयार नहीं है।जबकि प्रशासन ने हाईकोर्ट के आए फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी है।
निगम व पीयू में वित्तीय संकट: पंजाब विश्वविद्यालय में फंड की भारी कमी है जिस कारण यहां पर वित्तीय संकट गरमाया हुआ है। पंजाब व हरियाणा अपना शेयर देने को तैयार नहीं है। इस समय सीनेट का चुनाव न होने को लेकर राजनीति गरमाई हुई है।
जब भी समस्याओं को लेकर प्रशासन के अधिकारियों के पास लाेग जाते हैं तो अधिकारी गृह मंत्रालय में फाइल भेजने का मामला बताकर अपना पीछा छुड़वा लेते हैं। अब तो पीएम और गृह मंत्री खुद शहर में आ रहे हैं। ऐसे में अब शहरवासियों की सभी समस्याओं और मुद्दों को सुलझाने की घोषणा करनी चाहिए।
बलजिंदर सिंह बिट्टू, चेयरमैन, फासवेक
शहरवासी सौभाग्यशाली है कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री एक साथ आ रहे हैं। चंडीगढ़ सीधे तौर पर गृह मंत्रालय के अंतर्गत आता है। ऐसे में अब सारे मामले एक साथ सुलझ सकते हैं। प्रशासक गुलाब चंद कटारिया को पीएम और गृह मंत्री के समक्ष शहर के लंबित मुद्दों को उठाकर शहरवासियों को राहत दिलवानी चाहिए।
चरणजीव सिंह, अध्यक्ष, व्यापार मंडल
यह भी पढ़ें- पीयू में आधी रात हंगामा, यूथ फेस्टिवल में दो टीमों के बीच जमकर हुई हाथापाई; इस बात पर छिड़ी लड़ाई
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।