चंडीगढ़ में मातृ-शिशु को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में पिछड़ा चंडीगढ़, मंत्रालय की रिपोर्ट ने खोली पोल
चंडीगढ़ मदर एंड चाइल्ड प्रोटेक्शन (एमसीपी) कार्ड कवरेज में केंद्र शासित प्रदेशों में सबसे निचले पायदान पर आ गया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रा ...और पढ़ें

मदर एंड चाइल्ड प्रोटेक्शन कार्ड कवरेज में चंडीगढ़ का ग्राफ घटा है।
मोहित पांडेय, चंडीगढ़। मां और शिशु को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर चिंता बढ़ गई है, क्योंकि इस मामले में चंडीगढ़ अब अंतिम पायदान पर खड़ा है। मदर एंड चाइल्ड प्रोटेक्शन कार्ड (एमसीपी) कवरेज में चंडीगढ़ का ग्राफ घटा है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से लोकसभा में पेश रिपोर्ट में यह बात सामने आई है।
आंकड़ों के मुताबिक केंद्र शासित प्रदेशों में एमसीपी कार्ड में गोवा का प्रतिशत 99.8, पुदुच्चेरी का प्रतिशत 98.8, अंडमान-निकोबार 98.9 और लद्दाख का प्रतिशत 97.8 हैं, जो यूटी चंडीगढ़ से आगे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार नेशनल फैमली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस) (2015-16) में चंडीगढ़ में 98 प्रतिशत पंजीकृत गर्भवती महिलाओं को एमसीपी कार्ड मिला था, जो एनएफएचएस-5 (2019-21) में घटकर 97.2 प्रतिशत रह गया।
चंडीगढ़ में यह गिरावट ऐसे समय सामने आई है, जब देशभर में मदर एंड चाइल्ड प्रोटेक्शन कार्ड औसतन 95.9 प्रतिशत तक पहुंच चुका है और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। रिपोर्ट में स्वास्थ्य मंत्रालय का दावा है कि 90 प्रतिशत से अधिक आशा, एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एमसीपी कार्ड से परिचित हैं।
चंडीगढ़ में कवरेज घटना यह संकेत देती है कि फील्ड मानिटरिंग में ढिलाई बरती जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया तो इसका सीधा असर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।
यह है मदर एंड चाइल्ड प्रोटेक्शन कार्ड
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार मदर एंड चाइल्ड प्रोटेक्शन कार्ड गर्भावस्था पंजीकरण के समय जारी किया जाता है और इसमें एएनसी जांच, पोषण, टीकाकरण, सुरक्षित प्रसव और नवजात शिशु से जुड़ी अहम जानकारियां दर्ज होती हैं।
एमसीपी कार्ड गर्भावस्था से लेकर बच्चे के शुरुआती वर्षों तक
- एएनसी जांच
- टीकाकरण
- पोषण
- सुरक्षित प्रसव
- नवजात में खतरे के लक्षण
रिपोर्ट के अनुसार एमसीपी कार्ड की यूटी की स्थिति
यूटी एनएफएचएस (2019-22) एनएफएचएस (2015-16)
चंडीगढ़ 97.2% 98%
गोवा 99.8% 96.3 %
पुदुचेरी 98.8% 98 %
अंडमान-निकोबार 98.9% 97.9%
लद्दाख 97.8% 93.7%

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