चंडीगढ़ मेयर चुनाव का काउंटडाउन शुरू, पीएम के दौरे से पहले कांग्रेस-AAP ने चुनाव प्रक्रिया बदलने का उठाया मुद्दा
चंडीगढ़ में होने वाले मेयर चुनाव से पहले ही विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने मेयर चुनाव में बैलेट पेपर की जगह हाथ उठाकर समर्थन करने के प्रस्ताव पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने तो चुनाव में पारदर्शिता के लिए प्रशासन से हस्तक्षेप करने की मांग की है। भाजपा ने कांग्रेस पर संविधान का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है।

बलवान करिवाल, चंडीगढ़। मेयर चुनाव का काउंटडाउन शुरू हो गया है। अब चुनाव में महीने भर का समय बचा है। जनवरी के पहले सप्ताह में चुनाव घोषित हो सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह चंडीगढ़ दौरे पर आ रहे हैं। वह तीन नए कानूनों की समीक्षा करने चंडीगढ़ आ रहे हैं। उनके दौरे से पहले राजनीति भी शुरू हो गई है।
कांग्रेस और AAP ने उठाए सवाल
मेयर चुनाव से पहले कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। कांग्रेस ने तो चुनाव में पारदर्शिता के लिए मेयर चुनाव बैलेट की जगह हाथ उठाकर समर्थन करने से कराने के लिए हस्तक्षेप तक करने की मांग रख दी है। नगर निगम सदन ने 29 अक्टूबर की बैठक में चुनाव बैलेट पेपर से न करवाकर हाथ उठाकर समर्थन से करवाने का प्रस्ताव पास किया था।
चंडीगढ़ नगर निगम (कार्य संचालन और संचालन) विनियमन 1996 की रेगुलेशन छह में संशोधन के लिए यह प्रस्ताव पास कर प्रशासन के पास भेजा था। प्रस्ताव को एक महीने से अधिक समय बीत चुका है बावजूद इसके प्रशासन ने इस पर कोई निर्णय नहीं लिया है।
कांग्रेस ने प्रशासन के रवैये को बताया लोकतंत्र विरोधी
अब राजनीतिक दलों ने प्रशासन के इस रवैये पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। कांग्रेस ने प्रशासन के रवैये को लोकतंत्र विरोधी बताया है। चंडीगढ़ कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भविष्य में होने वाले मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के पदों के लिए चुनाव को सीक्रेट बैलेट की बजाए हाथ उठाकर कराने के प्रस्ताव को मंजूरी देने पर प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
कांग्रेस ने जारी किया ये बयान
चंडीगढ़ कांग्रेस की ओर से जारी बयान में पार्टी के मुख्य प्रवक्ता राजीव शर्मा ने कहा कि चंडीगढ़ के नागरिकों का यह हक है कि उनके शहर के मेयर को चुनने की प्रक्रिया पारदर्शी और सच्ची हो, लेकिन प्रशासन का रवैये से कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।
30 जनवरी 2024 को चुनाव में धांधली को सुप्रीम कोर्ट ने 'लोकतंत्र की हत्या' के बराबर बताया था। इसी तरह की घटना फिर से न हो इसलिए ही चुनाव की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए निगम सदन ने यह निर्णय लिया था। राजीव शर्मा ने कहा कि इसलिए ही इंडिया ब्लॉक के पार्षदों ने प्रक्रिया में बदलाव के लिए प्रस्ताव पास किया था।
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भाजपा से मिलीभगत का आरोप
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि बहस के दौरान जब भाजपा के पार्षदों ने इस प्रस्ताव का जोरदार विरोध किया तो उनका लोकतंत्र विरोधी चेहरा पूरी तरह से उजागर तो हो ही गया, लेकिन इससे भी अधिक चिंताजनक पहलू यह है कि चंडीगढ़ प्रशासन भी भाजपा की लाइन पर चलता हुआ दिखाई दे रहा है।
प्रशासन ने प्रस्ताव पास होने के महीना भर बीतने पर भी कोई कदम नहीं उठाया।राजीव शर्मा ने कहा कि निगम सदन की पिछली बैठक में पहुंचे प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने इस प्रस्ताव पर पार्षद के पूछे सवाल के बाद भी कोई शब्द नहीं बोला। उनकी मंशा पर भी सवाल उठ रहे हैं।
कांग्रेस ने प्रबुद्ध वर्ग से प्रशासन पर दबाव बनाने का आह्वान किया। चंडीगढ़ दौरे पर आ रहे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भी हस्तक्षेप का आग्रह किया है।
चुनाव की प्रक्रिया में बदलाव करना संविधान का उल्लंघन होगा। सदन में बैलेट पेपर की बजाए हाथ उठाकर चुनाव कराने से गोपनीयता का सीधा हनन होगा। इससे आपसी द्वेष और टकराव बढ़ेगा। इसी वजह से ही चुनाव में गोपनीयता का प्रविधान है। रेगुलेशन में ऐसे बदलाव सीधे तौर पर संविधान से छेड़छाड़ करने जैसा होगा। कांग्रेस की तो आदत ही है संविधान की बुक उठाकर घूमना और उल्लंघन करने में देर नहीं लगाना।
-सौरभ जोशी, पार्षद, भाजपा।
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