चंडीगढ़ में महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा, मीटर रीडिंग और बिजली बिल वितरण का जिम्मा सौंपा, और बढ़ेगी भागीदारी
चंडीगढ़ में महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा दिया गया है। मीटर रीडिंग और बिल वितरण के कार्यों में महिलाओं को नियुक्त किया गया है। यह कदम महिला सशक्तिकरण को ब ...और पढ़ें

सीपीडीएल ने 60 महिलाओं की नियुक्ति का प्रस्ताव रखा है, इस तरह फ्रंटलाइन रोल्स में 50 फीसदी महिलाओं को शामिल किया जाएगा।
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। स्मार्टसिटी में महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा दिया गया है। चंडीगढ़ पावर डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (सीपीडीएल) ने मीटर रीडिंग और बिल वितरण जैसे कार्यों के लिए 35 महिलाओं की नियक्ति शुरू की है।
यह बिजली वितरण में एक बड़ा बदलाव है। इस पहल से उन रोल्स में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी, जहां आमतौर पर पुषों का प्रभुत्व रहता है। इसी सोच के साथ सीपीडीएल ने 60 महिलाओं की नियुक्ति का प्रस्ताव रखा है, इस तरह फ्रंटलाइन रोल्स में 50 फीसदी महिलाओं को शामिल किया जाएगा।
फील्ड में कार्यरत महिला कर्मचारी घर-घर जाकर हैंडहेल्ड डिवाइस की मदद से मीटर रीडिंग करेंगी, बिजली की खपत के आंकड़े सही तरीके से रिकॉर्ड करेंगी। साथ ही समय पर बिल वितरण, उपभोक्ताओं की बुनियादी समस्याओं के समाधान तथा समस्याओं की जानकारी को सुपरवाइजरी टीमों तक पहुंचाने में भी योगदान देंगी।
इन महिला कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए सीपीडीएल ने सुरक्षा के प्रोटोकॉल्स लागू किए हैं। इनमें ज़रूरी मोबाइल चेक-इन, इमरजेंसी एस्केलेशन प्रणाली की व्यवस्था की गई है। साथ ही चुनिंदा स्थानों में सुपरवाइजर उनके साथ रहेगा। ये सभी उपाय सुनिश्चित करेंगे कि फील्ड में कार्यरत महिलाएं सुरक्षित महसूस करें, उन्हें अनुकूल एवं पेशेवर माहौल में काम करने का मौका मिले।
प्रोग्राम पर अपने विचार व्यक्त करते हुए अरूण कुमार वर्मा, डायरेक्टर, चण्डीगढ़ पावर डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड ने कहा, ‘‘हमें गर्व है कि हम विद्युत वितरण सेक्टर में इस बदलाव का नेतृत्व करने का मौका मिला है। महिलाओं को मीटर रीडिंग, उपभोक्ताओं की समस्या के निवारण, फील्ड संचालन जैसी फ्रंटलाईन ज़िम्मेदारी देकर सीपीडीएल न सिर्फ संचालन दक्षता को बेहतर बनाएगी बल्कि सार्वजनिक सेवाओं की डिलीवरी में अधिक समावेशी एवं लोगों के अनुकूल दृष्टिकोण भी सुनिश्चित करेगी। यह सेक्टर में किया गया ऐसा बदलाव है, जिसकी चर्चा सालों से की जा रही है; आज यह बदलाव ज़मीनी स्तर पर दिखने लगा है। यह हमारे इस भरोसे को दर्शाता है कि सशक्त एवं भविष्य के अनुकूल पावर सिस्टम बनाने के लिए समावेशी एवं विविध कार्यबल का होना ज़रूरी है।’

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