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    चंडीगढ़ में हर कोई पढ़ा-लिखा, वाॅलंटियर्स और शिक्षकों के सहयोग से हर घर शिक्षा, अपार ने भी कायम किया रिकाॅर्ड

    Updated: Thu, 01 Jan 2026 05:51 PM (IST)

    चंडीगढ़ शिक्षा विभाग ने 2025 में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं, जिसमें 'उल्लास' अभियान के तहत शत-प्रतिशत प्रौढ़ शिक्षा और 92% से अधिक छात्रों के लिए ...और पढ़ें

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    चंडीगढ़ अब 100 प्रतिशत साक्षरता वाला शहर बन गया है।

    सुमेश ठाकुर, चंडीगढ़। हर कोई पढ़ा-लिखा और हर घर शिक्षा। चंडीगढ़ अब 100 प्रतिशत साक्षरता वाला शहर बन गया है। शिक्षा विभाग के लिए वर्ष 2025 उपलब्धियों से भरा रहा, जिसने वर्ष 2026 के लिए बेहतर उम्मीदों की नींव रखी है।

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    विभाग ने जहां प्रौढ़ शिक्षा के उल्लास अभियान में शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर शहर को अशिक्षा मुक्त बनाया, वहीं स्कूली विद्यार्थियों की शिक्षा को सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनाने की दिशा में अपार आईडी निर्माण में भी बड़ी सफलता मिली है।

    18 वर्ष तक के 92 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थियों की अपार आईडी तैयार कर उनकी शैक्षणिक जानकारी को एकीकृत पोर्टल पर सुरक्षित किया गया है।  प्रौढ़ शिक्षा के तहत एनएसएस वाॅलंटियर्स घर-घर सर्वे किया और अशिक्षित प्रौढ़ों को चिह्नित किया।

    स्कूल शिक्षकों ने विद्यार्थियों के साथ अडल्ट को गोद लिया और उन्हें पढ़ना-लिखना सिखाया। परिणामस्वरूप वर्ष 2025 में शहर के हर घर तक शिक्षा पहुंची और उल्लास अभियान का शत-प्रतिशत लक्ष्य पूरा हुआ। वर्ष 2026 में चंडीगढ़ में कोई भी अशिक्षित व्यक्ति नहीं बचा है

    नियमित शिक्षकों की भर्ती, एसएसए के लिए हुई लिखित परीक्षा

    शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए वर्ष 2025 में 10 साल बाद 900 से अधिक नियमित शिक्षकों की भर्ती की गई। इससे विद्यार्थियों को विषयानुसार योग्य शिक्षक उपलब्ध हो सके हैं।

    500 के करीब समग्र शिक्षा अभियान (एसएसए) शिक्षकों की लिखित परीक्षा भी कराई गई है, जिनकी नियुक्ति वर्ष 2026 में होने की उम्मीद है। शिक्षक भर्ती के साथ-साथ बुनियादी ढांचे पर भी जोर दिया गया। कई सरकारी स्कूलों में टीन शैड हटाकर पक्के एक्सटेंशन ब्लॉक तैयार कर हैंडओवर किए गए, जिससे विद्यार्थियों को बेहतर और सुरक्षित वातावरण मिला।

    ट्यूशन जाने की खत्म की जरूरत

    कमजोर विद्यार्थियों की सहायता के लिए विभाग ने पहली बार सर्दियों की छुट्टियों में आफलाइन रेमेडियल क्लासें शुरू कीं। इससे विद्यार्थियों को ट्यूशन पर निर्भर नहीं रहना पड़ा और उनकी एकाग्रता व समझ में सुधार हुआ।

     

    विद्यार्थियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किए गए इन प्रयासों को वर्ष 2026 में भी जारी रखा जाएगा, ताकि चंडीगढ़ में शिक्षा का स्तर और मजबूत हो। -नीतिश सिंगला, निदेशक स्कूल शिक्षा विभाग