चंडीगढ़ में पिता की हत्या के आरोप से बेटी बरी, सीने में घोंपा गया था चाकू, कोर्ट में मुकरा गवाह
चंडीगढ़ की जिला अदालत ने पिता सुमई लाल की हत्या के आरोप में 21 वर्षीय बेटी आशा को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। मुख्य गवाह गुलाब सिंह ने अदालत मे ...और पढ़ें

हत्या के मामले में जिला अदालत ने सुनाया फैसला।
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। पिता की हत्या के मामले में 21 वर्षीय बेटी आशा को जिला अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। अदालत में आरोप साबित नहीं हो पाए और पुलिस के मुख्य गवाह ने भी अपने बयान में एफआईआर की कहानी से पलटते हुए कहा कि उसके सामने आरोपित ने किसी तरह का जुर्म कबूल नहीं किया था।
10 अगस्त 2023 को गांव किशनगढ़ में सुमई लाल के सीने में चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी। आशा के वकील गुरदीत सिंह सैनी ने बताया कि आईटी पार्क थाना पुलिस ने पिता की हत्या को उसकी बेटी द्वारा की गई साजिश बताया था।
पड़ोसी गुलाब सिंह को मुख्य गवाह बनाया गया था, जिसने पुलिस को दी शिकायत में दावा किया था कि आशा ने उसके सामने अपने पिता की हत्या करने की बात कबूल की थी। हालांकि, अदालत में गवाही के दौरान गुलाब सिंह ने इस बात से साफ इनकार कर दिया कि आशा ने उसके सामने किसी भी तरह का जुर्म कबूल किया था।
इस अहम गवाही के कमजोर पड़ने से अभियोजन पक्ष की कहानी पर सवाल खड़े हो गए। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि यदि हत्या पहले से योजनाबद्ध होती तो आरोपित किसी घातक हथियार का इस्तेमाल करती, न कि रसोई में इस्तेमाल होने वाले छोटे चाकू का।
वकील ने कोर्ट को बताया कि जिस हथियार से वार किया गया, वह छोटा था, जबकि मृतक को लगा घाव उससे कहीं अधिक गहरा था, जिससे अभियोजन की कहानी संदेह के घेरे में आ गई। अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह मानते हुए कि अभियोजन पक्ष आरोप संदेह से परे साबित नहीं कर पाया है, आशा को सभी आरोपों से बरी कर दिया।

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