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    चंडीगढ़ मेयर चुनाव: AAP और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर अनबन, क्या BJP को होगा कलह का फायदा?

    Updated: Thu, 01 Jan 2026 12:06 PM (IST)

    चंडीगढ़ मेयर चुनाव के बाद होने वाले नगर निगम चुनावों को लेकर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी में गठबंधन पर मंथन चल रहा है। सीट बंटवारे को लेकर दोनों दलों म ...और पढ़ें

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    चंडीगढ़ मेयर चुनाव के बाद होने वाले नगर निगम चुनावों को लेकर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी में गठबंधन पर मंथन (फोटो: जागरण)

    बलवान करिवाल, चंडीगढ़। मेयर चुनाव के लिए स्टैंडर्ड आपरेटिंग प्रोसिजर आज कल में कभी भी जारी हो सकती है। इस बार मेयर चुनाव बेहद खास रहने वाले हैं। इसका कारण यह है कि मेयर चुनाव का यह कार्यकाल खत्म होते ही नगर निगम के चुनाव होने हैं। नए सिरे से पांच वर्ष के लिए पार्षद चुने जाने हैं।

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    राजनीतिक दल इस लिहाज से इन चुनाव को केवल मेयर चुनाव का सोचकर नहीं चल रहे। वह आगे की रणनीति पर भी काम कर रहे हैं। खासकर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी इस बात पर जमकर मंथन कर रहे हैं। कांग्रेस के कुछ नेता चाहते हैं कि नगर निगम का चुनाव आम आदमी पार्टी से अलग होकर लड़ा जाए।

    इसकी शुरुआत वह मेयर चुनाव से ही चाहते हैं। वह चाहते हैं कि मेयर चुनाव में भी आप को समर्थन न दिया जाए। इससे नगर निगम चुनाव में उन्हें नुकसान हो सकता है। इतना ही नहीं आम आदमी पार्टी के कई पार्षद भी इस पक्ष में कतई नहीं हैं कि नगर निगम चुनाव कांग्रेस के साथ मिलकर लड़ा जाए।

    इसका मुख्य कारण हम आपको समझाते हैं। दरअसल अगर चुनाव साथ लड़ा जाता है तो 35 सीटों में से दोनों दलों में बंटवारा होगा। पहले तो बंटवारा होना भी आसान नहीं होगा। पिछले चुनाव में आप ने निगम में सबसे अधिक सीट जीती थी और सबसे बड़ी 

    पार्टी बनी थी। वहीं वोट शेयर कांग्रेस का सबसे अधिक रहा था। इस वजह से आप चाहेगी की ज्यादा सीट उसे मिले और कांग्रेस कम सीटों पर लड़ने को तैयार नहीं होगी। अब देखना यह होगा कि दोनों दल अगर समझौता करते हैं तो किसको कितनी सीटें मिलती हैं और वह राजी होते हैं या नहीं।

    दसूरा कारण यह है कि अगर दोनों दलों में समझोता हुआ और आधी-आधी सीट भी बंटती हैं तो प्रत्याशी के लिए लड़ाई होगी। जो सीट कांग्रेस को मिलेगी वहां आम आदमी पार्टी के पार्षद को मौका नहीं मिलेगा। पिछली बार सभी सीटों पर आप और कांग्रेस के प्रत्याशी चुनाव लड़े थे। आप ने सबसे अधिक सीट जीती भी थी।

    ऐसे में उनके पार्षद नहीं चाहते कि समझौता होने के बाद टिकट कट जाए। इन सभी बातों को लेकर दोनों दलों में जमकर मंथन और चर्चा हो रही है। कुछ पार्षदों के भाजपा में शामिल होने को भी इससे जोड़कर देखा जा रहा है।

    कई और पार्षद भाजपा नेताओं के संपर्क में होने की बात भी कही जा रही है। खुद भाजपा अध्यक्ष जितेंद्र मल्होत्रा इसका दावा कर रहे हैं। इन सभी समीकरणों की वजह से यह चुनाव बेहद दिलचस्प हो गया है।