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जेएनएन, चंडीगढ़। पंजाब मंत्रिमंडल की सोमवार को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की प्रधानगी में  हुई बैठक में नेशनल हाईवे व स्टेट हाईवे किनारे 500 मीटर के दायरे में आने वाले होटलों, रेस्टोंरेंट्स व बार में शराब परोसने संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हाईवे पर 500 मीटर के दायरे में किसी भी स्थान पर शराब की बिक्री व परोसने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। मंत्रिमंडल ने इस संबंध में यह भी फैसला किया है कि हाईवे के 500 मीटर के दायरे में शराब के ठेकों पर शराब की बिक्री नहीं होने दी जाएगी। इसके अलावा बैठक में और भी कई महत्वपूर्ण फैसले किए गए।

बैठक में लिया गया सबसे अहम फैसले में मंत्रिमंडल ने स्पष्ट तौर पर प्रस्ताव रखा कि हाईवे के 500 मीटर के दायरे में शराब परोसी जा सकती है, लेकिन बेची नहीं जा सकती है। इस फैसले को अमली जामा पहनाने के बाद हाईवे के 500 मीटर के दायरे में बने होटलों, रेस्टोरेंट और क्लबों में शराब परोसने को हरी झंडी मिल जाएगी। इसके लिए  पंजाब आबकारी अधिनियम 1914 की धारा-ए में संशोधन करने के प्रस्ताव को भी बैठक में स्वीकृति दे दी गई है। बैठक में तय किया गया है कि इस संबंध  में संशोधन बिल- 2017 को हरी झंडी दे दी है।

अब शराब परोसने के लिए केवल चार दिनों का इंतजार रह गया है। बिल में संशोधन के बाद इसी विधानसभा सत्र में उसे पेश करने फैसला किया गया है। इसके बाद उसे मंजूरी दे दी जाएगी। विधानसभा से बिल को मंजूरी मिलने के बाद एक या दो दिनों में नोटिफिकेशन जारी हो जाएगी और फिर शराब परोसने पर लगी पाबंदी हट जाएगी।

बजट के प्रस्तावों को स्वीकृति

एक अन्य फैसले में मंत्रिमंडल ने वित मंत्री मनप्रीत सिंह बादल की ओर से 20 जून को विधानसभा में पेश किए जाने वाले बजट के प्रस्तावों को औपचारिक स्वीकृति दे दी है। साथ ही बैठक में तय किया गया कि प्रशासकीय सुधार विभाग और शिकायत निवारण विभाग का विलय करके उनका पुनर्गठन किया जाएगा। इसका नया नाम 'प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभागÓ रखा जाएगा।

साथ ही एक अन्य फैसले में मंत्रिमंडल ने पंजाब बुनियादी ढांचा (विकास एवं रेगुलेशन एक्ट-2002) में संशोधन कर पंजाब बुनियादी ढांचा (विकास एवं रेगुलेशन) संशोधन बिल-2017 को कानूनी रूप देने के लिए विधानसभा के चल रहे सत्र में पेश करने की स्वीकृति दी है। इसके बाद  इंफ्रास्ट्रक्चर ढांचा फीस पंजाब इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड की बजाय राज्य के फंड में जमा होगी।

पंजाब में स्थापित की जाएगी बागवानी यूनिवर्सिटी

बैठक में फैसला किया गया कि पंजाब में अलग से एक बागवानी यूनिवर्सिटी की स्थापना की जाएगी। इस यूनिवर्सिटी के जरिए किसानों को सब्जियों, फलों, रेशमी कीड़ा पालन, चारा और फूलों की खेती करने की दिशा के प्रति जागरूक किया जाएगा। इससे फसली चक्र से बाहर निकालने में मदद मिलेगी।

एक अन्य अहम फैसले में पंजाब म्युनिसिपल फंड एक्ट- 2006 और पंजाब म्युनिसिपल बुनियादी ढांचा विकास फंड एक्ट-2011 में संशोधन को लेकर स्थानीय निकाय विभाग के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। इसके बाद पंजाब में उत्पाद और सेवा कर बिल-2017 लागू करने का रास्ता साफ हो गया है। बैठक में आइके गुजराल तकनीकी यूनिवर्सिटी (संशोधन) ऑर्डिनेंस- 2017 और महाराजा रणजीत सिंह पंजाब तकनीकी यूनिवर्सिटी (संशोधन) ऑर्डिनेंस-2017 को कानूनी रूप देने के संबंध में इसी विधानसभा सत्र में बिल पेश करने की इजाजत भी दे दीगई गई है।

यह सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवमानना है: सिद्धू

हाईवे किनारे होटलों व बार में शराब की बिक्री व परोसे जाने के खिलाफ हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जंग लडऩे वाले चंडीगढ़ निवासी हरमन सिद्धू ने मंत्रिमंडल के फैसले पर कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवमानना है। महाराष्ट्र में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू न करने को लेकर यह कारण बताया कि महाराष्ट्र में स्टेट रोड हैं न कि हाईवे। इसलिए महाराष्ट्र में यह आदेश लागू नहीं हो सकते।

पंजाब सरकार इससे भी आगे निकल गई। पहले सरकार ने तमाम नेशनल हाईवे को स्टेट रोड घोषित करके शराब के कारोबार व सड़क दुर्घटनाओं को बढ़ावा दिया था। अब कांग्रेस सरकार ने एक कदम और आगे निकल कल शराब परोसने को हरी झंडी दे दी है। सिद्धू ने कहा कि पहले भी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद पंजाब में हाईवे 500 मीटर दायरे में शराब बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया था।

नतीजतन कई स्थानों पर शराब के ठेकों पर खुलेआम शराब बेची जा रही थी। अब तो परोसने को भी क्लीन चिट मिल ही गई है। कुछ दिनों में अहातों में शराब परोसने की इजाजत दे दी जाएगी। सरकार का यह रवैया सही नहीं है। मैं पांच वर्षों से इस संबंध में लड़ाई लड़ रहा हूं, मेरी जंग जारी रहेगी।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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