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पंजाब में चुनाव से पहले गहराया तारकोल संकट, बिटुमेन की कीमतें दोगुनी होने से हजारों किलोमीटर सड़कों का काम अटका

Published: Mon, 05 Oct 2026 04:32 PM (IST)

पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले सड़कों के निर्माण कार्य की रफ्तार धीमी पड़ गई है। अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण तारकोल ...और पढ़ें

ये प्रतीकात्मक तस्वीर है।

ये प्रतीकात्मक तस्वीर है।

HighLights

  1. बिटुमेन की कीमतें अमेरिका-ईरान संघर्ष से दोगुनी हुईं।

  2. पंजाब में हजारों किलोमीटर सड़क परियोजनाओं का काम अटका।

  3. चुनाव से पहले सड़कें पूरी करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती।

रोहित कुमार, चंडीगढ़। 2027 के विधानसभा चुनाव में चार महीने से भी कम समय बचा है और आम आदमी पार्टी (आप) सरकार सड़कों के बुनियादी ढांचे में सुधार को अपनी उपलब्धियों के तौर पर जनता के सामने रखने की तैयारी कर रही है। इसी बीच अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण बिटुमेन (तारकोल) की कीमत में करीब दोगुना उछाल और इसकी कमी ने सड़क परियोजनाओं की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है।

ठेकेदारों के सामने बढ़ी लागत का संकट है तो सरकार के सामने फंड की कमी। ऐसे में चुनाव से पहले सड़क परियोजनाओं को पूरा करना बड़ी चुनौती बन गया है। सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख पेट्रोलियम उत्पाद बिटुमेन की मांग और आपूर्ति में बड़ा अंतर पैदा हो गया है।

ठेकेदारों के मुताबिक युद्ध से पहले बिटुमेन 4,000 से 4,500 रुपये प्रति क्विंटल था, जो अब करीब 9,000 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया है। आयातित बिटुमेन भी करीब 3,000 रुपये प्रति क्विंटल महंगा पड़ रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर सड़क रखरखाव से जुड़े ठेकों पर पड़ा है।

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मौजूदा दरों में काम जारी रखना संभव नहीं

 

ठेकेदारों के अनुबंध में प्रावधान है कि निर्माण अवधि के दौरान बिटुमेन की दरों में होने वाले बदलाव को ध्यान में रखा जाएगा। इसी आधार पर ठेकेदार पीडब्ल्यूडी और पंजाब मंडी बोर्ड से बढ़ी दरों का लाभ देने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा दरों पर काम जारी रखना संभव नहीं है।

राज्य सरकार ने पीडब्ल्यूडी और पंजाब मंडी बोर्ड के तहत 40,968 किलोमीटर तथा स्थानीय निकायों के तहत 4,000 किलोमीटर सड़कों के अपग्रेडेशन को उपलब्धि के तौर पर पेश करने की योजना बनाई थी। पीडब्ल्यूडी और मंडी बोर्ड करीब 16,497 किलोमीटर सड़कों के सुधार कार्य में लगे हैं। इनमें से 16,454 किलोमीटर सड़कों में अब तक करीब 40 प्रतिशत काम ही पूरा हो पाया है।

पीडब्ल्यूडी और मंडी बोर्ड की सड़कों का काम अटका

पीडब्ल्यूडी की 3,813 किलोमीटर और पंजाब मंडी बोर्ड की 2,529 किलोमीटर सड़कें ऊपरी बिटुमेन परत का इंतजार कर रही हैं। वहीं 6,342 किलोमीटर सड़कें गिट्टी बिछाने के स्तर तक पहुंची हैं और अंतिम बिटुमेन परत की प्रतीक्षा में हैं।

एक अधिकारी के अनुसार, परियोजनाएं फंड की कमी से भी जूझ रही हैं। पंजाब मंडी बोर्ड को 20,096 किलोमीटर सड़कों के लिए 6,884.34 करोड़ रुपये चाहिए, जबकि उपलब्ध राशि 3,826.09 करोड़ रुपये है।

केंद्र की पूंजीगत निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता योजना के तहत 50 साल के ब्याज मुक्त ऋण के रूप में 2025-26 और 2026-27 के लिए तीन किस्तों में 4,915 करोड़ रुपये मिलने हैं, लेकिन अभी तक केवल 2,165 करोड़ रुपये मिले हैं। पीडब्ल्यूडी भी वित्तीय संकट से जूझ रहा है।

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एनएचएआई की तर्ज पर बढ़ सकती हैं दरें

एनएचएआई की परियोजनाओं में केंद्र सरकार पहले ही बिटुमेन की बढ़ी दरें लागू कर चुकी है। अब पंजाब सरकार भी राज्य की परियोजनाओं में इसी तरह दरें बढ़ाने पर विचार कर रही है। वित्त विभाग को पीडब्ल्यूडी, मंडी बोर्ड और स्थानीय निकाय विभाग के साथ चर्चा करनी होगी। सहमति बनने पर मामला कैबिनेट में रखा जाएगा।

उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार देश में बिटुमेन की खपत 87.4 लाख टन पहुंच चुकी है, जबकि घरेलू उत्पादन करीब 50 लाख टन पर स्थिर है। रिफाइनरियां बिटुमेन की तुलना में अधिक मुनाफा देने वाले पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल के उत्पादन को प्राथमिकता दे रही हैं।

बठिंडा रिफाइनरी में बढ़ाया गया उत्पादन

एक प्रमुख बिटुमेन ट्रांसपोर्टर के अनुसार पानीपत रिफाइनरी से पहले रोजाना 100 से ज्यादा टैंकर निकलते थे, अब 35-40 ही निकल रहे हैं। भराई का समय भी रात आठ बजे से घटाकर शाम पांच बजे कर दिया गया है। वहीं बठिंडा रिफाइनरी ने उत्पादन बढ़ाया है और पिछले दो-तीन दिनों से रोजाना करीब 90 टैंकर भरे जा रहे हैं।

ठेकेदार ने चेताया कि बढ़ी लागत का लाभ नहीं मिला तो काम रोकना पड़ सकता है। सरकार के सामने अब चुनाव से पहले सड़कों को पूरा कराने के लिए दरों, फंड और बिटुमेन आपूर्ति- तीनों मोर्चों पर फैसला लेने की चुनौती है।

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