सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को पंजाबी भाषा में गणित पढ़ा रही अमेरिका की खान अकादमी
मेलिंडा-गेट्स फाउंडेशन ने 15 लाख डालर मस्क फाउंडेशन ने 50 लाख डालर एटीएंड टीम कंपनी ने 25 लाख डालर और गूगल ने वर्ष 2010 में नए कोर्स बनाने और अंग्रेजी ...और पढ़ें

रोहित कुमार, चंडीगढ़: यदि आपसे कहा जाए कि अमेरिका की विश्व विख्यात खान अकादमी पंजाब के सरकारी स्कूलों के बच्चों को पंजाबी भाषा में गणित के गूढ़ सिद्धांत पढ़ा-समझा रही है तो शायद पहली बार में आप विश्वास न करें। अविश्सनीय सी लगने वाली इस व्यवस्था को संभव बनाया है पंजाब के शिक्षा विभाग के अधिकारियों के सकारात्मक सोच और सरकारी शिक्षकों के अनथक प्रयास ने।
आज पंजाब के सभी सरकारी स्कूलों में खान अकादमी की पंजाबी वेबसाइट संचालित होती है, 9.5 लाख से अधिक विद्यार्थी उपयोगकर्ता के रूप में पंजीकृत हैं और गणित के प्रत्येक सरकारी शिक्षक की इस पर लागइन है ताकि वह बच्चों की पढ़ाई की निगरानी कर सकें। पंजाबी भाषा में विश्व स्तरीय अकादमी की पढ़ाई ने पंजाब के सरकारी स्कूलों में लोगों का रुझान बढ़ाया है। संकल्पशक्ति से किया संभव: तीन वर्ष पहले किसी ने सोचा भी नहीं था कि मातृभाषा पंजाबी में बच्चे गणित सीख सकेंगे, लेकिन पंजाब की स्टेट काउंसिल आफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एससीईआरटी) के अधिकारियों व कर्मचारियों ने इसे संभव कर दिया।

स्कूल में टैब से पढ़ाई करती फतेहपुरगढ़ी गांव की आठवीं कक्षा की छात्रा नेहा रानी। जागरण
खान अकादमी की पंजाबी वेबसाइट पर अपलोड
मोहाली में पंजाब शिक्षा विभाग के कार्यालय के कमरे को स्टूडियो में बदला गया। जिसमें स्क्रीन रिकार्डिंग और संपादन के लिए साफ्टवेयर, एक डिजिटल पेन के साथ टैबलेट, कुछ लैपटाप और एक माइक्रोफोन था। 26 सरकारी शिक्षकों ने कक्षा छह से 10 तक की गणित सामग्री को अंग्रेजी से पंजाबी में अनुवाद करने किया। एक वर्ष बाद और लगभग 11 लाख शब्दों का अनुवाद करने और 440 नए वीडियो बनाने के बाद इन्हें खान अकादमी की पंजाबी वेबसाइट पर अपलोड किया गया। इसे कोई भी छात्र किसी भी सरकारी स्कूल से pa.khanacademy.org पर लाग इन करके प्रयोग कर सकता है।

बच्चों को टैब से पढ़ातीं जीरकपुर की रहने वाली गणित की शिक्षिका आरती धीर। जागरण
पूर्व शिक्षा सचिव का प्रयास
इस योजना का बीज बोया पंजाब के पूर्व शिक्षा सचिव कृष्ण कुमार ने। उनके नेतृत्व में खान अकादमी के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। कृष्ण कुमार के स्थानांतरण के बाद स्कूल शिक्षा महानिदेशक प्रदीप अग्रवाल और एससीईआरटी के निदेशक मनिंदर सरकारिया ने इसे जारी रखा। वर्ष 2019 में 180 स्कूलों में पायलट परियोजना के लिए समझौता हुआ था, जिसे 2021-22 में बढ़ाकर 1,082 स्कूलों में किया गया। फिर इसे पंजाब के सभी सरकारी स्कूलों में विस्तारित किया गया। विभाग की सहायक राज्य परियोजना निदेशक और इस परियोजना की नोडल अधिकारी निर्मल कौर ने कहा कि खान अकादमी की भारत के लिए सामग्री एनसीईआरटी पाठ्यक्रम पर आधारित है। गणित में दक्ष 26 शिक्षकों ने दिन-रात काम किया। जबकि 22 ने अनुवादक के रूप में काम किया। टीम में चार वीडियो क्रिएटर थे। सरकारी स्कूलों के 3.3 लाख सक्रिय रूप से इसका उपयोग कर रहे हैं।

खान अकादमी बनने की कहानी भी काफी रोचक है। अमेरिका में रहने वाले सलमान खान ने अपने चचेरे भाई को गणित पढ़ाना आरंभ किया। उनके तरीके से अन्य भाई-बहन भी प्रभावित हुए और पढ़ने लगे। बांग्लादेशी पिता और भारतीय मां की संतान सलमान खान ने वर्ष 2004 में याहू के प्रयोग से गणित पढ़ाने का डिजिटल मंच शुरू किया। लोकप्रियता बढ़ी और वर्ष 2008 में खान अकादमी की नींव पड़ी।

झांसला गांव स्थित सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल का भवन। जागरण
अब विश्व के 190 देशों में लगभग 13 करोड़ विद्यार्थी गैर लाभकारी संस्था खान अकादमी के वीडियो से नि:शुल्क पढ़ाई करते हैं। खान अकादमी को सामाजिक संस्थाओं से सहायता मिलती है। मेलिंडा-गेट्स फाउंडेशन ने 15 लाख डालर, मस्क फाउंडेशन ने 50 लाख डालर एटीएंड टीम कंपनी ने 25 लाख डालर और गूगल ने वर्ष 2010 में नए कोर्स बनाने और अंग्रेजी के अलावा अन्य भाषाओं में अनुवाद के लिए अकादमी को 20 लाख डालर दान में दिए।

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