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Punjab News: लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद सीएम मान ने नेताओं में भरा जोश, कहा- गम पालकर न बैठें

आम आदमी पार्टी को लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने निराश नेताओं और विधायकों में जोश भरा। उन्होंने आने वाले उपचुनाव पंचायत चुनाव और नगर निगम व पालिकाओं के चुनाव के लिए तैयार रहने की बात कही। सीएम ने कहा कि पार्टी ने साल 2019 के मुकाबले में अपनी सीटों को बढ़ाया है जबकि बाकि सभी पार्टियों को नुकसान हुआ है।

By Inderpreet Singh Edited By: Rajiv Mishra Published: Sun, 09 Jun 2024 10:36 AM (IST)Updated: Sun, 09 Jun 2024 10:36 AM (IST)
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने विधायकों और कार्यकर्ताओं में जोश भरा (फाइल फोटो)

इन्द्रप्रीत सिंह, जागरण। बठिंडा और फरीदकोट संसदीय सीट में जीत के करीब आने के बावजूद मिली हार से निराश विधायकों और अन्य नेताओं में शनिवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने फिर से जोश भरा। मुख्यमंत्री ने कहा है कि लोकसभा चुनाव में मिली हार का गम पालकर न बैठें। चुनाव में जीत और हार चलती रहती है।

सीएम ने आने वाले उपचुनाव , पंचायत चुनाव और नगर निगम व पालिकाओं के चुनाव के लिए खुद को तैयार करने की बात कही। मुख्यमंत्री चंडीगढ़ में फरीदकोट और बठिंडा के विधायकों , बोर्ड कार्पोरेशन के चेयरमैन और संसदीय सीटों के उम्मीदवारों के साथ बैठक कर रहे थे।

हमारी दो सीटें पिछले चुनाव के मुकाबले बढ़ी हैं- सीएम मान

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पार्टी नेताओं को आश्वस्त करते हुए कहा कि पार्टी ने साल 2019 के मुकाबले में अपनी सीटों को बढ़ाया है जबकि बाकि सभी पार्टियों को नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया कि 2019 में हमारे पास केवल एक सीट थी और आज हमारे पास तीन हैं।

अन्य पार्टियों में शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस को जहां एक-एक सीट का नुकसान हुआ है वहीं, भाजपा को दो सीटों का नुकसान हुआ है। हमारी तो दो सीटें पिछले चुनाव के मुकाबले बढ़ी हैं। हमारा वोट बैंक भी कांग्रेस के बराबर आया है।

पंजाब में पंथक लहर के कारण बाजी पलट गई-कमलजीत अनमोल

फरीदकोट के प्रत्याशी कमलजीत अनमोल सहित अन्य विधायकों ने भी कहा कि फरीदकोट में हम जीत के बहुत करीब थे लेकिन पिछले एक सप्ताह में चली पंथक लहर के कारण बाजी पलट गई। हमें इस लहर को रोकने का समय ही नहीं मिला।

बैठक में बठिंडा के नेताओं ने विधायकों के विरोध की बात भी रखी और कहा कि हर जगह विधायकों से नाराजगी के कारण उम्मीदवारों को खामियाजा भुगतना पड़ा है। गांवों में सस्ते अनाज के राशन कार्ड कटने के कारण गरीब वर्ग बहुत नाराज रहा है।

खास बात यह है कि मुख्यमंत्री की ओर से जिस प्रकार से पिछले तीन दिन से की जा रही बैठकों में राशन कार्ड कटने की बातें सामने आ रही हैं, उससे लग रहा है कि इन चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा यही रहा है।

'राशन कार्ड कटने का खमियाजा भुगतना पड़ा'

एक विधायक ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि बठिंडा में शहरी वर्ग राम मंदिर के कारण भाजपा की तरफ हो गया तो फरीदकोट में अचानक से चली पंथक लहर ने हमें नुकसान पहुंचाया लेकिन गांवों में राशन कार्ड कटने का खामियाजा हमें भुगतना पड़ा है। अनुसूचित जाति के वोट हमें नहीं पड़े।

उन्होंने कहा कि हम एक-एक बूथ को स्टडी कर रहे हैं और हमने पाया है कि अनुसूचित जातियों का एक बड़ा वोट बैंक हमें नहीं मिला है जो विधानसभा में हमारे साथ था। इसके कारण कुछ और भी हो सकते हैं। इन पर चिंतन करने की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने हमें आश्वस्त किया है कि आने वाले समय में जो जरूरी हुआ वह किया जाएगा।

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