हत्या के प्रयास मामले में पांच युवक बरी, तीन साल पुराने मामले में अदालत ने सुनाया फैसला
चंडीगढ़ की जिला अदालत ने तीन साल पुराने हत्या के प्रयास मामले में पांच युवकों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। मौलीजागरां में राजन नामक युवक पर ज ...और पढ़ें

जिला अदालत ने सुनाया फैसला।
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। हत्या के प्रयास के एक मामले में जिला अदालत ने पांच युवकों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। बरी होने वालों में सेक्टर-17 पंचकूला निवासी मोनू उर्फ मुन्ना, करण उर्फ गोलू, मौलीजागरां निवासी तोता राम, धरमिंदर और रोहित उर्फ कांचा है। इन सभी के खिलाफ मौलीजागरां थाना पुलिस ने तीन साल पहले आईपीसी की धारा 147, 148, 149, 323, 341, 307, 506 और आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया था।
आरोप था कि इन सभी ने मिलकर मौलीजागरां में राजन नाम के युवक पर जानलेवा हमला किया और उसे बुरी तरह पीटा। हालांकि अदालत में राजन ने इन सभी आरोपितों को पहचानने से इनकार कर दिया। जबकि तीन साल पहले उसी की शिकायत पर पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार किया था और इन पर एफआइआर दर्ज की थी।
आरोपितों का केस लड़ने वाले एडवोकेट विजय कुमार ने अदालत में बहस के दौरान कहा कि पुलिस ने इन्हें झूठे केस में फंसाया था। इनका इस वारदात से कोई संबंध नहीं था, फिर भी इन्हें काफी समय तक जेल में रहना पड़ा। वहीं, इस केस में राजन की मां प्रेमा भी अहम गवाह थी, लेकिन वह भी अदालत में गवाही के दौरान मुकर गई।
पुलिस को 22 मार्च 2022 को इस वारदात की सूचना मिली थी। पुलिस को प्रेमा ने बताया कि शाम करीब साढ़े सात बजे उसका बेटा राजन वालीबाल खेलकर घर वापस आ रहा था। घर के पास ही कुछ युवकों ने उसे घेर लिया और उस पर लोहे की राड व डंडों से हमला कर दिया। आरोपितों ने उस पर जानलेवा हमला कर दिया जिस कारण वह बुरी तरह घायल हो गया।
उसे इलाज के लिए सेक्टर-6 पंचकूला के जनरल अस्पताल ले जाया गया था। हालांकि शुरुआत में वह पुलिस को बयान देने के लिए फिट नहीं था, लेकिन ठीक होने के बाद उसने हमले में शामिल आरोपितों की जानकारी पुलिस को दी, लेकिन अदालत में उसने किसी भी आरोपित को नहीं पहचाना।

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