क्या खत्म होगी पंजाब कांग्रेस की गुटबाजी? जानिए क्यों बने परगट सिंह प्रधान और क्या एक होंगे चन्नी-राजा वड़िंग
कांग्रेस हाईकमान ने परगट सिंह को पंजाब अध्यक्ष बनाकर गुटबाजी खत्म करने और 2027 चुनाव की तैयारी तेज करने की कोशिश की है। अब संगठन को एकजुट करना चुनौती है।

चर
HighLights
परगट सिंह पंजाब कांग्रेस के नए अध्यक्ष बने।
चन्नी और राजा वड़िंग गुटों को एकजुट करने का लक्ष्य।
2027 विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती।
अनुज शर्मा, अमृतसर। पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चल रही गुटबाजी के बीच कांग्रेस हाईकमान ने 2 अक्टूबर को परगट सिंह को अध्यक्ष बनाकर एक नया दाव खेला। काफी दिन दिल्ली में सीनियर नेताओं को मिलने के बाद वीरवार परगट सिंह पंजाब लौटे। उनके साथ पंजाब प्रभारी सचिन पायलट भी रहे। हाईकमान ने दो गुटों को गुकजुट करने के लिए कप्तान बनाया। वे इसमें सफल हुआ या नहीं, इस पर अभी भी सवाल है।
अनुमान था कि परगट सिंह और सचिन पायलट के पंजाब दौरे पर अमरिंदर सिंह राजा वडिंग और चरणजीत सिंह चन्नी एक साथ आज अमृतसर में दिखेंगे। लेकिन कोई भी सांसद अमृतसर में नहीं आया। विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि कांग्रेस लीडरशिप दिल्ली में वोट चोरी के खिलाफ बहुत बड़ा संघर्ष कर रहे हैं।
सभी सांसदों को दिल्ली में रुकने के लिए कहा गया है। राहुल गांधी, राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे प्रियंका गांधी के नेतृत्व में तीन दिन से संघर्ष को लीड कर रहे हैं। फिलहाल पार्टी का यही मानना है कि उन्होंने जिस नेता को कप्तानी सौपी है, वे जिम्मेदार हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग गुटों को नया कप्तान स्वीकार्य है। लेकिन परगट सिंह के चुने जाने के बाद अभी तक एक भी ऐसा मौका सामने नहीं आया, जिसे लेकर कांग्रेस दावा कर सके कि दोनों गुट अब एक साथ हैं और कांग्रेस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती 2027 के विधानसभा चुनाव है।
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अमरिंदर सिंह ने खुद सौंपा था इस्तीफा
परगट सिंह से पहले अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के पास पंजाब कांग्रेस की कमान थी। उनके कार्यकाल के दौरान पार्टी में गुटबाजी और आपसी खींचतान को लेकर लगातार सवाल उठते रहे। पूर्व पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल का खुल कर विरोध हुआ। चन्नी गुट साफ तौर पर वड़िंग के नेतृत्व में 2027 विधानसभा चुनाव लड़ने को तैयार नहीं था। इस गुटबाजी के चलते ही 2022 की तरह आने वाला चुनाव भी कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती बन रहा था।
वड़िंग व चन्नी से मिले परगट सिंह
कांग्रेस हाईकमान के ऐलान के बाद चरणजीत सिंह चन्नी खुद दिल्ली में परगट सिंह से मिलने पहुंचे। इसके बाद बीते दिन परगट सिंह और अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की तस्वीर भी सामने आई, जिसमें दोनों मिल बैठ कर बातचीत कर रहे हैं। परगट सिंह का कहना है कि उनका लक्ष्य 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को मजबूत करना है। वह 11 अक्टूबर को औपचारिक तौर पर पार्टी का पदभार ग्रहण करेंगे। इसके बाद 2027 के लक्ष्य की और बढ़ेंगे।
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जानें क्यों कटा सिंगला का नाम
अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग का विरोध सिर्फ एक नेता तक सीमित नहीं था। गुरदासपुर से सांसद और पूर्व डिप्टी सीएम सुखजिंदर रंधावा भी थे, जो खुल कर राजा वड़िंग का विरोध कर रहे थे। उन्होंने तो साफ कहा था कि वे पंजाब कांग्रेस की कमान संभालने के लिए सक्षम नहीं हैं।
परगट सिंह के प्रधान घोषित होने से पहले सबसे चर्चित नाम विजय इंदर सिंगला का था। हिंदू चेहरे के तौर उन उन्हें सबसे प्रभावी माना जा रहा था। लेकिन गांधी परिवार के करीबी एक सीनियर नेता ने आखिरी समय में उनकी उम्मीदवारी का विरोध किया। आखिरकार कांग्रेस ने परगट सिंह को इस पद के लिए चुना।
चन्नी और परगट सिंह के बीच पुराना नाता
चन्नी और परगटर सिंह के बीच नाता नया नहीं है। चन्नी सरकार में वे उनके मंत्री थे। उनके पास शिक्षा और स्पोर्ट्स डिपार्टमेंट था। उन्हें चन्नी के बेहद करीब माना जाता था। लेकिन जब चन्नी और वड़िंग के बीच विवाद हुआ तो उन्होंने एक न्यूट्रल नेता के तौर पर छवी पेश की। इसी का फायदा आज उन्हें मिल रहा है। यही कारण है कि दोनों गुटों में से किसी ने उनके नाम का विरोध नहीं किया।
सिर्फ इतना ही नहीं, उनका तीन बार जालंधर से जीतना और जट सिख की छवी उन्हें प्रभावी बनाती है। इसके अलावा स्पोर्ट्स में कप्तानी और राजनीति में बेदाग नेता रहने के कारण आज उन्हें इस पद के लिए चुना गया।
