'चार दशक बाद भी नहीं मिला दिल्ली दंगा पीड़ितों को इंसाफ', SGPC प्रधान ने घटना को बताया लोकतंत्र के माथे का कलंक
एसजीपीसी प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने 1984 के सिख कत्लेआम को लोकतंत्र का सबसे बड़ा कलंक बताते हुए कहा कि चार दशक बाद भी पीड़ितों को इंसाफ नहीं मिला।

एसजीपीसी प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी।
HighLights
1984 सिख कत्लेआम पीड़ितों को अब तक नहीं मिला न्याय।
SGPC प्रधान ने घटना को लोकतंत्र पर कलंक बताया।
कांग्रेस पर आरोपियों की पैरवी करने का आरोप लगाया।
जागरण संवाददाता, अमृतसर। नवंबर 1984 में दिल्ली सहित देश के विभिन्न हिस्सों में हुए सिख कत्लेआम के जख्म आज भी हरे हैं। चार दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद पीड़ित सिख परिवारों को इंसाफ नहीं मिल सका है। यह बात शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने 1984 के सिख कत्लेआम में मारे गए सिखों व उनके परिवारों को श्रद्धांजलि देते हुए कही।
एडवोकेट धामी ने कहा कि नवंबर 1984 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार की शह पर एक नवंबर से करीब एक सप्ताह तक सिखों पर अमानवीय अत्याचार किए गए। सिखों को बेरहमी से मौत के घाट उतारा गया। मानवता के खिलाफ यह घिनौना कृत्य था, जिसने पूरी दुनिया के संवेदनशील लोगों को झकझोर कर रख दिया था। सिख कत्लेआम दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के माथे पर कलंक है।
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कांग्रेस ने की आरोपी नेताओं की पैरवी
उन्होंने कहा कि कत्लेआम के लिए जिम्मेदार लोगों को कानून के अनुसार सजा मिलनी चाहिए थी, लेकिन अफसोस है कि इंसाफ दिलाने के बजाय कांग्रेस ने आरोपों का सामना कर रहे नेताओं की हमेशा पैरवी की और उन्हें बड़े राजनीतिक पदों से नवाजा। इससे पीड़ित परिवारों के जख्मों पर मरहम लगाने के बजाय उन्हें बार-बार कुरेदा गया। देश की आजादी में सिख कौम ने बहुमूल्य कुर्बानियां दी हैं, लेकिन इसके बावजूद सिखों के साथ बार-बार अन्याय हुआ।
नवंबर का महीना आते ही कत्लेआम के पीड़ित परिवारों और पूरी सिख कौम के पुराने जख्म फिर ताजा हो जाते हैं। सरकारों की जिम्मेदारी है कि पीड़ितों को इंसाफ दिलाने और कत्लेआम के लिए जिम्मेदार लोगों को सजा दिलाने के लिए ठोस कदम उठाएं।
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श्री हरिमंदिर साहिब में होगी अरदास
उन्होंने कहा कि इंसाफ की यह लड़ाई केवल पीड़ित परिवारों की नहीं, बल्कि मानवाधिकारों, लोकतांत्रिक मूल्यों और न्याय व्यवस्था में विश्वास की भी लड़ाई है। जब तक दोषियों को उनके किए की सजा नहीं मिलती, तब तक पीड़ित परिवारों के दिलों को शांति नहीं मिलेगी।
सिख कौम इस दर्दनाक घटना को कभी नहीं भुला सकती। हर साल इसकी याद में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इसी सिलसिले में दो नवंबर को श्री दरबार साहिब परिसर में श्री अखंड पाठ साहिब के भोग डाले जाएंगे और कत्लेआम के दौरान मारे गए लोगों की आत्मिक शांति के लिए अरदास की जाएगी।
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