MP अमृतपाल की पार्टी वारिस पंजाब दे में कलह, प्रिंसिपल ड्राफ्टिंग कमेटी का आरोप, सरकारी तंत्र कर रहा हस्तक्षेप
अकाली दल वारिस पंजाब दे की ड्राफ्टिंग कमेटी ने पार्टी में सरकारी दखल का आरोप लगाते हुए 23 जिलों का संगठन भंग करने के फैसले को खारिज किया है।

सांसद अमृतपाल सिंह।
HighLights
प्रिंसिपल ड्राफ्टिंग कमेटी ने सरकारी हस्तक्षेप और बाहरी प्रभाव का आरोप लगाया।
23 जिला संगठनों को भंग करने और सदस्यता समाप्त करने पर सवाल उठाए गए।
पार्टी ने पंथ और पंजाब की संगतों से रक्षा की अपील की।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद अमृतपाल सिंह की पार्टी अकाली दल वारिस पंजाब दे की अंतर कलह खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी की प्रिंसिपल ड्राफ्टिंग कमेटी ने पार्टी में सरकारी तंत्र के कथित हस्तक्षेप और फैसलों पर बाहरी प्रभाव का आरोप लगाते हुए सिख संगतों से संगठन की रक्षा के लिए आगे आने की अपील की है।
कमेटी ने पंजाब के 23 जिलों का संगठन भंग करने और अपने पांच सदस्यों की प्राथमिक सदस्यता समाप्त करने के फैसले पर सवाल उठाए। कमेटी ने जिला प्रधानों का संगठन भंग करने के निर्णय को गैर-संवैधानिक बताते हुए खारिज कर दिया।
31 अक्टूबर को भाई बेअंत सिंह, भाई सतवंत सिंह और भाई केहर सिंह की शहादत को नमन करते हुए जारी बयान में कमेटी ने कहा कि अकाली दल वारिस पंजाब दे किसी परिवार, व्यक्ति या सरकारी तंत्र की संपत्ति नहीं, बल्कि पंथ और पंजाब की संगतों की अमानत है। इसकी रक्षा की जिम्मेदारी भी संगतों की है।
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इयाली की बैठकों पर आपत्ति
कमेटी के प्रवक्ता गुरदीप सिंह भंडाल ने कहा कि पार्टी में सरकारी तंत्र की कथित दखलअंदाजी, फैसलों पर बाहरी प्रभाव, पदों के बंटवारे और टिकटों को लेकर कई महीनों से सवाल उठ रहे थे। बहुमत जिला प्रधानों ने इन मुद्दों से कार्यकारी प्रधान बापू तरसेम सिंह को अवगत कराया था। चंडीगढ़ स्थित कार्यालय को फैसलों का केंद्र बनाने और लुधियाना में मनप्रीत सिंह इयाली के आवास पर होने वाली गतिविधियों पर भी आपत्ति जताई गई थी।
भंडाल के अनुसार, 20 अक्टूबर को बहुमत जिला प्रधानों ने तथ्यों और सबूतों के साथ छह पन्नों का पत्र कार्यकारी प्रधान को सौंपा। इसमें कथित बाहरी प्रभाव से पार्टी को मुक्त कराने और निष्पक्ष जांच की मांग की गई। ठोस कार्रवाई न होने पर श्री फतेहगढ़ साहिब में बैठक हुई और गुरुद्वारा श्री ज्योति स्वरूप साहिब में अरदास के बाद प्रिंसिपल ड्राफ्टिंग कमेटी बनाई गई।
5 सदस्यों की प्राथमिक सदस्यता समाप्त
कमेटी ने बापू तरसेम सिंह समेत पांच नेताओं और बहुमत जिला प्रधानों के साथ करीब पांच घंटे बैठक की। कमेटी के मुताबिक, बापू तरसेम सिंह ने जांच और सख्त कार्रवाई के लिए तीन दिन मांगे, लेकिन 24 घंटे के भीतर 23 जिलों का संगठन भंग कर दिया गया और कमेटी के पांच सदस्यों की प्राथमिक सदस्यता समाप्त कर दी गई।
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पार्टी के मूल सिद्धांतों की बहाली का संघर्ष
कमेटी ने सवाल किया कि पार्टी की विचारधारा और पंथक सिद्धांतों की बात करना क्या गुनाह है और क्या कार्रवाई से संगठन के भीतर उठ रही आवाज दबाई जा सकती है? उसने कहा कि संगठन भंग करने का अधिकार पहले ही संबंधित निर्णय के तहत तय हो चुका था, इसलिए बाद में किसी व्यक्ति या पदाधिकारी को यह अधिकार नहीं था। तेजिंदर सिंह ढिल्लों का इस्तीफा भी नामंजूर कर उन्हें पहले सौंपी गई जिम्मेदारी निभाते रहने को कहा गया।
कमेटी ने स्पष्ट किया कि उसका संघर्ष किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि पारदर्शिता, पंथक सिद्धांतों की रक्षा और संगठन को बाहरी प्रभाव से मुक्त कराने के लिए है। उसने देश-विदेश की संगतों और पंथ समर्थकों से पार्टी को मूल सिद्धांतों के अनुसार चलाने में भूमिका निभाने की अपील की।
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