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लुधियाना से सफर कर रहे युवक की ट्रेन से गिरकर मौत, बिना टिकट भी हाईकोर्ट ने 10 साल बाद दिलाया मुआवजा

Published: Sun, 01 Nov 2026 11:35 AM (IST)

हाईकोर्ट ने ट्रेन से गिरकर हुई मौत के मामले में रेलवे का फैसला पलटते हुए कहा कि टिकट न मिलने पर भी परिवार को मुआवजा मिलेगा।

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की AI जनरेटेड प्रतिकात्मक तस्वीर।

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की AI जनरेटेड प्रतिकात्मक तस्वीर।

HighLights

  1. बिना टिकट यात्री की मौत पर भी मिलेगा मुआवजा।

  2. हाईकोर्ट ने रेलवे दावा अधिकरण का फैसला पलटा।

  3. मृतक के परिवार को 8 लाख रुपये देने का आदेश।

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। ट्रेन में सफर के दौरान यात्री की मौत हो जाए और उसके पास से टिकट न मिले, तो भी परिवार को मुआवजे से वंचित नहीं किया जा सकता। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि केवल टिकट बरामद न होने के आधार पर मुआवजे का दावा खारिज नहीं किया जा सकता। अदालत ने लुधियाना से दिल्ली जा रहे करन जोशी की ट्रेन से गिरकर हुई मौत के मामले में उसकी पत्नी और बेटे को राहत दी।

जस्टिस हरकेश मनुजा ने रेलवे दावा अधिकरण, चंडीगढ़ के फैसले को रद कर दिया। 13 और 14 जुलाई, 2016 की मध्यरात्रि करन जोशी उर्फ करन कुमार को लुधियाना से दिल्ली जाना था। उसके भाई वरुण जोशी ने लुधियाना रेलवे स्टेशन पर टिकट खरीदा और रात करीब 11:30 बजे उसे जम्मू मेल में बैठाया।

धंडारी कलां और ब्लाक हट के बीच करन चलती ट्रेन से गिर गया। गंभीर चोटों के कारण उसकी मौत हो गई। अगले दिन उसका शव रेलवे ट्रैक के पास मिला।

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भाई की गवाही और साक्ष्य बने आधार

मृतक की पत्नी और परिवार ने रेलवे से मुआवजा मांगा था। रेलवे दावा अधिकरण ने आठ अगस्त, 2019 को टिकट बरामद न होने, यात्रा के पर्याप्त प्रमाण नहीं होने और अन्य आधारों पर दावा खारिज कर दिया था।

हाईकोर्ट ने पाया कि मृतक के भाई ने टिकट खरीदने और उसे ट्रेन में बैठाने की गवाही दी थी। उसकी गवाही को अविश्वसनीय साबित नहीं किया गया। पुलिस जांच के अभिलेख, शव बरामदगी की रिपोर्ट और पोस्टमार्टम के दस्तावेज भी दुर्घटना से जुड़े साक्ष्यों की पुष्टि करते थे।

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चार सप्ताह में भुगतान करने का आदेश

अदालत ने कहा कि टिकट नहीं मिलने मात्र से अन्य साक्ष्यों को खारिज नहीं किया जा सकता। मृतक के रोजगार का प्रमाण न होना भी मुआवजे का दावा खारिज करने का आधार नहीं है। रेलवे अधिनियम के तहत निर्धारित परिस्थितियों में मुआवजे के लिए रेलवे की लापरवाही साबित करना जरूरी नहीं है।

हाईकोर्ट ने रेलवे को परिवार को आठ लाख रुपये देने का आदेश दिया। राशि पर दावा याचिका दाखिल करने की तारीख से वास्तविक भुगतान तक नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। प्रमाणित प्रति मिलने के चार सप्ताह में भुगतान करना होगा। ऐसा न होने पर चार सप्ताह की अवधि समाप्त होने के बाद वास्तविक भुगतान तक 12 प्रतिशत वार्षिक की दर से अतिरिक्त ब्याज देना पड़ेगा।

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