नई दिल्ली, प्रेट्र/आइएएनएस। वामदलों के गढ़ त्रिपुरा में रविवार को राज्य विधानसभा की 60 में से 59 सीटों के चुनाव के लिए वोट पड़े। इसमें 78.56 फीसद से अधिक वोटरों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। पिछली बार के विधानसभा चुनावों में इससे अधिक 91.82 प्रतिशत मतदान हुआ था। माकपा की अगुआई वाले वाम मोर्चा सरकार को इस बार भाजपा की ओर से तगड़ी चुनौती मिल रही है।

निर्वाचन आयोग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य की 59 सीटों के लिए चुनाव में शाम पांच बजे तक 75 फीसद से अधिक लोगों ने वोट डाले। चुनावों में मुख्यमंत्री माणिक सरकार सहित 292 उम्मीदवार अपना भाग्य आजमा रहे हैं। वोटों की गिनती 3 मार्च को होगी। त्रिपुरा में कुल 25,73,413 पंजीकृत मतदाता हैं। इनमें से 12,68,027 महिला मतदाता हैं। पहली बार मतदान करने वाले वोटरों की संख्या 47,803 है। निर्वाचन आयोग ने बताया कि वीवीपैट मशीनों से जुड़े 180 पोलिंग बूथों की ईवीएम में शुरुआती गड़बड़ी की शिकायतों के अलावा पूरे राज्य भर में मतदान पूरी तरह से शांत रहा।

त्रिपुरा में इस बार का विधानसभा चुनाव कई मायनों में अहम रहा। पहली बार यहां पर माकपा और भाजपा में सीधी टक्कर देखने को मिली। वाममोर्चा के 25 वर्षो के शासन को उखाड़ फेंकने के लिए भाजपा ने पूरा दमखम लगाया। उसने आदिवासी पृष्ठभूमि की पार्टी आइपीएफटी से तालमेल कर माकपा को कड़ी चुनौती पेश की। त्रिपुरा में भाजपा ने 51 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि बाकी सीटों पर वह आइपीएफटी प्रत्याशियों का समर्थन कर रही है। भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी प्रमुख अमित शाह सहित कई दिग्गज नेताओं ने राज्य भर में जोरदार चुनाव अभियान चलाकर सत्ताधारी माकपा की सत्ता में वापसी की राह को मुश्किल कर दिया है।

त्रिपुरा के मुख्‍यमंत्री माणिक सरकार ने अगरतला के पोलिंग बूथ पर वो‍ट डाला। वह धनपुर निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं।

भाजपा त्रिपुरा के अध्यक्ष बीपलब कुमार देब ने उदयपुर में बूथ नंबर 31/34 में मतदान किया। मतदान करने के बाद उन्होंने कहा कि चुनाव के परिणाम ऐतिहासिक होंगे, हम निश्चित रूप से जीतेंगे। प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह जी ने मुझे बुलाया और शुभकामनाएं दीं थी।

60 से 59 सीटों पर चुनाव

आयोग के मुताबिक, माकपा प्रत्याशी एवं निवर्तमान विधायक रमेंद्र नारायण देब बर्मा के निधन के कारण राज्य की चरिलम विधान सभा सीट पर चुनाव को स्थगित कर दिया गया था। इस सीट पर अब 12 मार्च को वोट पड़ेंगे। 

सीपीएम के लिए भाजपा बड़ी चुनौती

भाजपा चुनाव में सीपीएम के लिए मुख्य चुनौती के रूप में उभर रही है, जो पिछले 25 सालों से राज्य में सत्ता में है। अनुसूचित जनजाति के लिए 20 सीटें आरक्षित की गई हैं। भाजपा ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ चार रैलियों को संबोधित कर जनता को अपनी तरफ आर्कषित करने की पूरी कोशिश की है। त्रिपुरा की सत्ता को हासिल करने के लिए भाजपा 'मोदी मैजिक' की रणनीति के तहत काम कर रही है भाजपा पार्टी के अन्य बड़े नेता राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह , राजनाथ सिंह, अरुण जेटली, और नितिन गडकरी आदि इन रैलियों में शामिल थे।

माणिक की सत्ता में बने रहने की कोशिश

माणिक सरकार 1998 से त्रिपुरा के मुख्यमंत्री हैं। 25 साल से मुख्यमंत्री रहे माणिक को भी पता है इस बार टक्कर कड़ी है इसलिए वह भी चुनाव में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहते थे। सीपीएम ने मुख्यमंत्री माणिक सरकार के नेतृत्व में 50 रैलियां की। सीताराम येचुरी और वृंदा करात जैसे अन्य वाम दलों ने पार्टी के अभियान को समर्थन दिया।

कांग्रेस राहुल गांधी ने विरोधियों पर साधा निशाना

त्रिपुरा विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए अस्तित्व की लड़ाई के तौर पर देखा जा रहा है। देश में अपने अस्तिव को बचाने में जुटी कांग्रेस के लिए यह चुनाव किसी जंग से कम नहीं है। कांग्रेस इसे बड़ी चुनौती के रूप में देख रही है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आखिरी दिन के अपने भाषण में माणिक सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा की माणिक ने राज्य में विकास को रोके रखा है। साथ ही उन्होंने भाजपा और पीएम मोदी को भी आड़े हाथों लिया। कांग्रेस की कोशिश है कि वह त्रिपुरा में अपना लंबा वनवास इस बार तोड़ने में कामयाब हो जाए।

Posted By: Arti Yadav