कोलकाता [जागरण स्पेशल]। पश्चिम बंगाल में पिछले कई दिनों से सरकार, पुलिस और सीबीआई को लेकर घमासान मचा है। इस जंग को राज्य में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा की सियासी प्रतिद्वंद्विता का चरम भी कहा जा सकता है। दरअसल केंद्र और राज्य सरकार के बीच चल रही खींचतान में दो सियासी दल अपना रसूख बढ़ाने की फिराक में हैं। पश्चिम बंगाल में पैदा हुआ यह गतिरोध, अचानक नहीं है। जैसे-जैसे 2019 का लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहा है, घात-प्रतिघात बढ़ गए हैं।

पश्चिम बंगाल की 42 सीटों का है खेल
पश्चिम बंगाल में 42 संसदीय सीटें हैं। 2014 लोकसभा चुनाव में तृणमूल उनमें से 34 सीटें हासिल कर लोकसभा में तीसरी सबसे पार्टी बनी थी। ऐसे में 2019 लोकसभा चुनाव में अगर तृणमूल इससे अच्छा कुछ करती है तो किंगमेकर होने के साथ ममता की पीएम उम्मीदवारी भी मजबूत होगी, लेकिन 2011 विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा यहां मुख्य विपक्षी दल बन कर उभरी। 2014 लोकसभा चुनाव में स्थिति और मजबूत हुई। पहली बार भाजपा को पश्चिम बंगाल से दो सीटें मिलीं। अब भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने 2019 चुनाव के लिए बंगाल से 23 सीटों का लक्ष्य तय किया है। ऐसे में यहां संघर्ष तो होना ही था, सो हो रहा है।

एक महीने में पांच बार हुई भिड़ंत
पुलिस आयुक्त राजीव कुमार के मुद्दे पर पूछताछ करने गए सीबीआइ अधिकारियों की गिरफ्तारी से लेकर उनके कार्यालयों का पुलिस से घेराव। देश ने कोलकाता में वह सब देखा जो इसके पहले कभी नहीं हुआ। दीदी सीधे केंद्र को चुनौती देते हुए धरने पर बैठी हैं, लेकिन यह पहला मामला नहीं है। रविवार रात को पुलिस आयुक्त के आवास के बाहर चले हाईवोल्टेज ड्रामे से पहले दिन में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हेलीकॉप्टर को पश्चिम बंगाल में उतरने ही नहीं दिया गया। उन्हें बालुरघाट में सभा करनी थी।

29 जनवरी को पूर्व मेदिनीपुर के कांथी में अमित शाह की रैली के बाद तृणमूल-भाजपा समर्थकों में जमकर संघर्ष हुआ, पत्थरबाजी और तोड़फोड़ हुई। रैपिड एक्शन फोर्स को उतरना पड़ा। 22 जनवरी को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह मालदा में सभा करने वाले थे, लेकिन उनके भी हेलीकॉप्टर को उतने की अनुमति नहीं मिली। इन सबके पहले 19 जनवरी को ब्रिगेड की रैली को कौन भूल सकता है। एक साथ मंच पर देश के 23 विपक्षी पार्टियों को दीदी ने जुटाया। केंद्र सरकार और भाजपा को कोसा गया। भाजपा भगाओ, देश बचाओ के नारे को सत्य करने का संकल्प लिया गया।

क्यों दबाव बढ़ा रही है भाजपा?
2014 लोकसभा चुनाव में भले ही भाजपा को बंगाल से दो सीट मिली हों, लेकिन वोट कुल 17 फीसद मिले थे। विधानसभा चुनाव 2016 में पार्टी का वोट फीसद 10 फीसद रहा था, लेकिन राज्य की 75 फीसद से अधिक सीटों पर भाजपा दूसरे नंबर पर थी। उसके बाद से हुए हर स्तर के चुनाव में भाजपा ने वामो व कांग्रेस को पीछे छोड़ दिया है। इधर, भाजपा हैवीवेट नेताओं के दौरे भी पश्चिम बंगाल में तेज हो गए हैं। शनिवार को पीएम ने राज्य में दो सफल सभाएं कीं तो रविवार को राजनाथ सिंह और योगी आदित्यनाथ का दौरा हुआ।

सीबीआइ के विवाद के बाद सोमवार को केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कोलकाता से मोर्चा संभाला। इधर, नागरिकता संशोधन विधेयक के जरिये भी भाजपा मतुआ संप्रदाय जैसे विस्थापित हिंदुओं को अपने पक्ष में करने में जुटी है। इस दौरान आरएसएस व बजरंग दल जैसे दलों की उपस्थिति भी पश्चिम बंगाल में प्रमुखता से दिखने लगी है। भाजपा यह जानती है कि सर्वाधिक मुस्लिम आबादी वाले प्रदेश में, तृणमूल अल्पसंख्यकों की पहली पसंद है।

अब रथयात्रा और रामनवमी पर रैली सहित अन्य हिंदू त्योहारों पर कार्यक्रम कर भाजपा हिंदुत्व कार्ड भी ख्रेलने से पीछे नहीं हट रही है। ममता पर मुस्लिम तुष्टीकरण का आरोप लगाया जा रहा है। इसलिए दीदी भी लगातार भाजपा पर सांप्रदायिकता फैलाने का आरोप लगा उनके कार्यक्रमों पर प्रशासनिक बंदिश लगा रही हैं। नतीजे में सिर्फ संघर्ष सामने आ रहा है।

कुछ भी हो, दीदी विपक्ष की नेता नंबर वन
लोकसभा चुनाव में अब 100 दिन से भी कम समय बचा है। ऐसे में तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी फ्रंटफुट पर खेल रही हैं। केंद्र को लगातार चुनौती दे रही हैं। तमाम विवाद भी हो रहे हैं। लेकिन इन तमाम विवाद के बीच एक महीने में दीदी दूसरी बार संपूर्ण विपक्ष को उनके नेतृत्व में एकजुट करने में सफल दिख रही हैं।

बीते 20 दिनों में ये दूसरा मौका है जब विपक्ष ने ममता बनर्जी के नेतृत्व में एकजुटता का प्रदर्शन किया। 19 जनवरी ममता बनर्जी ने ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में महागठबंधन की रैली की। इसमें करीब 22 दलों के नेता शामिल हुए। अब एक बार फिर रविवार को जब सीबीआइ का विवाद गहराया तो हर कोई ममता बनर्जी के साथ आया है। विपक्ष के करीब 20 से अधिक नेताओं ने ममता बनर्जी के खुले समर्थन का ऐलान किया है।

राहुल गांधी के नेतृत्व के मुद्दे पर असमंजस में पड़ा विपक्ष दीदी के नाम पर लगभग सहमत दिख रहा। ऐसे में गैर बीजेपी व गैर कांग्रेसी विकल्प की लगातार बात करने वाली ममता क्षेत्रीय दलों के नए विकल्प की परिकल्पना को रूप देती दिख रही हैं। ऐसे आंदालनों से वह अपने नेतृत्व के दावे को भी लागातर मजबूत कर रही हैं।

यह भी पढ़ें-
ड्रोन की तरह उड़कर ऊंचाई पर बनेगा एयरक्राफ्ट, दुर्गम जगहों पर दवा पहुंचाने में मिलेगी मदद
सिफारिश की चिट्ठीः सरदार पटेल की जगह जवाहर लाल नेहरू ऐसे बने थे पार्टी अध्यक्ष
अंडरवर्ल्ड डॉन रवि पुजारी के बारे में पूछने पर प्रिटी जिंटा ने लिया था इन क्रिकेटरों का नाम
50 फीसद से ज्यादा युवाओं में बढ़ रहा 12 तरह के खतरनाक कैंसर का खतरा, ये है वजह

Posted By: Amit Singh

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप