नई दिल्‍ली, एएनआइ। Citizenship Amendment Bill, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले गैरमुस्लिम शरणार्थियों के लिए भारत में नागरिकता का रास्ता तैयार होने लगा है। विधेयक पेश किए जाने से लेकर इसे पारित किए जाने तक विपक्ष के घोर विरोध और गर्मा-गर्म माहौल के बीच भाजपा और सहयोगी दलों के साथ-साथ कुछ गैरराजग दलों ने भी इसे 80 के मुकाबले 311 मतों के बड़े बहुमत से पारित करा दिया। शिवसेना, बीजद और वाईएसआर कांग्रेस ने विधेयक का समर्थन किया।  

LIVE Updates :

- बुधवार को राज्‍यसभा में नागरिक संशोधन विधेयक पेश हो सकता है।  

- बिल के पास होने पर पीएम मोदी ने धन्‍यवाद खुश जताई। पीएम मोदी ने कहा- यह बिल परंपरा के अनुरूप है। समर्थन देने के लिए दलों और सांसदों का धन्‍यवाद। पीएम मोदी ने अमित शाह की तारीफ की।  

- लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक बिल पास हुआ, पक्ष में 311 और विपक्ष 80 वोट पड़े। 

- ओवैसी का संशोधन बिल खारिज। 

- नागरिकता संशोधन बिल पर मत विभाजन के पक्ष में 94 वोट और विपक्ष में 304 वोट पड़े।

- इस वक्त लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर संशोधन, मत विभाजन पर वोटिंग हो रही है।

- अमित शाह बोले, मैं फिर से इस सदन के माध्यम से पूरे देश के सामने स्पष्ट करना चाहता हूं कि घुसपैठिए और शरणार्थी में मौलिक अंतर है। एनआरसी और नागरिकता बिल को जोड़ने की जरूरत नहीं।  

- अमित शाह बोले, इन देशों में ढेर सारे मंदिर तोड़े गए। अफगानिस्तान में 1992 तक करीब 2 लाख हिंदू और सिख थे और 2018 तक वो सिर्फ 500 रह गए। पूरे देश ने देखा था कि धार्मिक स्थलों को तोड़ा गया। भगवान बुद्ध की भव्य प्रतिमा को तोप के गोले दागकर तोड़ा गया। ऐसे में कहां जाते ये अल्पसंख्यक?

- अमित शाह ने कहा, बंगबंधु शेख मुजीब उर्र रहमान की हत्या के बाद बांलादेश में जो अत्याचार का दौर चालू हुआ, उसने वहां की धार्मिक लघुमतियों की रीढ़ की हड्डी ही तोड़ दी, भोला में एक सुनियोजित हमले में 200 अल्पसंख्यक महिलाओं के साथ दुष्‍कर्म किया गया।

- अमित शाह बोले, 2014 की एक रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान में 1 हजार लड़कियों का जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया। UNHRC की रिपोर्ट के अनुसार अब दूसरे धर्मों के मात्र 20 धार्मिक स्थान ही पाकिस्तान में बचे हैं। 

अमित शाह बोले, किसी पंजाबी, बिहारी, मारवाड़ी, ओडिशा के लोग या किसी भी निवासी को घुसपैठिया नहीं करार दिया जाएगा। भारत के मूल निवासियों का यहां रहने का मूल अधिकार है, किसी को चिंता करने की जरूरत नहीं है।

- अमित शाह बोले, ये कहा गया है कि एनआरसी में गोरखा, पंजाबी, मारवाड़ी, बिहारी जो नॉर्थ ईस्ट के रहते हैं, वो बाहर हो जाएंगे, ये सही बात नहीं है।

- अमित शाह बोले, शशि थरूर जी को मैं कहना चाहता हूं कि कांग्रेस के शासन में आजादी के बाद जितनी बार भी नागरिकता दी गई, वो धर्म के आधार पर ही दी गई, क्योंकि देश का विभाजन ही धर्म के आधार पर हुआ था। 

 - अमित शाह बोले, ओवेसी साहब ने कहा की NRC का बैकग्राउंड बना रहे हैं, NRC का कोई बैकग्राउंड बनाने की जरूरत ही नहीं हैं, हम इस पर बहुत साफ़ हैं कि इस देश में NRC लागू होकर रहेगा। हमारा घोषणापत्र ही इसका बैकग्राउंड है।

- अमित शाह बोले, मैं बंगाल के सभी सांसदों से कहना चाहता हूं कि लाखों लोगों को जो नागरिकता मिलने वाली है वो सारे बंगाली शरणार्थी हैं, क्या आप नहीं चाहते कि बंगाली हिन्दू, बौद्ध, सिख और ईसाई शरणार्थियों को नागरिकता मिले?

- अमित शाह बोले, ये भी कहा गया कि इसमें तीन देशों को ही क्यों लिया गया। श्रीलंका, चीन और म्यांमार, नेपाल को क्यों नहीं लिया गया। नागरिकता पर जब भी इस देश में निर्णय हुआ तो किसी निश्चित परिस्थिति के आधार पर, निश्चित प्रकार की समस्या को हल करने के लिए निर्णय हुआ है।  

- अमित शाह ने कहा, मैं इस सदन को फिर से आश्वस्त करना चाहता हूं कि जब हम NRC लेकर आएंगे, एक भी घुसपैठिया इस देश के अंदर बच नहीं पाएगा।

- अमित शाह बोले, कुछ लोग बिल के खिलाफ माहौल बना रहे हैं। लेकिन किसी को भी डरने की जरूरत नहीं है। शरणार्थियों के पास राशन कार्ड है या नहीं, ये बिल सबको नागरिकता देगा। आपको किसी के बहकावे में आने की जरूरत नहीं है।

- अमित शाह बोले, मैं बंगाल के सभी सांसदों से कहना चाहता हूं कि लाखों लोगों को जो नागरिकता मिलने वाली है वो सारे बंगाली शरणार्थी हैं, क्या आप नहीं चाहते कि बंगाली हिन्दू, बौद्ध, सिख और ईसाई शरणार्थियों को नागरिकता मिले?

- अमित शाह बोले, नेहरू-लियाकत समझौता काल्‍पनिक समझौता साबित हुआ। यह समझौता फेल हुआ। नेहरू ने सबसे पहले धर्म के आधार पर नागरिकता दी।    

- अमित शाह बोले, हमें मुसलमानों से कोई नफरत नहीं है। देश के किसी मुसलमान को इस बिल से कोई डरने की जरूरत नहीं है। 

- अमित शाह बोले, कांग्रेस जैसी सांप्रदायिक पार्टी नहीं देखी। केरल में कांग्रेस मुस्लिम लीग के साथ है और महाराष्‍ट्र में शिवसेना के साथ है। 

- अमित शाह ने कहा, हम नार्थ ईस्‍ट के लोगों को आश्‍वास्‍त करते हैं कि हम अनुच्‍छेद 371 को नहीं छेड़ेंगे। 

- अमित शाह बोले, मैं इतना कहना चाहता हूं कि अल्पसंख्यकों में कोई डर की भावना नहीं है, अगर है तो भी मैं अपने सभी अल्पसंख्यक भाई बहनों को विश्वास दिलाता हूं कि मोदी जी के प्रधानमंत्री रहते हुए इस देश में किसी भी धर्म के नागरिक को डरने की जरूरत नहीं है।

- अमित शाह बोले, पीओके भी हमारा है, उसके नागरिक भी हमारे हैं और आज भी हम जम्मू-कश्मीर की विधानसभा में 24 सीट इनके लिए आरक्षित रखते हैं।

- अमित शाह बोले, अभिषेक बनर्जी ने अपने भाषण में कहा कि एनआरसी और सिटिजनशिप अमेंडमेंट बिल ट्रैप है। लेकिन इसमें कोई ट्रैप नहीं है। उन लोगों को ये ट्रैप जरूर लग सकता है जो वोटबैंक के लिए घुसपैठियों का संरक्षण करते हैं। लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे।

- अमित शाह बोले, अभिषेक बनर्जी ने आज अपने वक्तव्य में टैगोर, विवेकानंद और बंकिम बाबू का नाम लिया। लेकिन बंकिम बाबू के समय ऐसे बंगाल की कल्पना थी क्या कि दुर्गा पूजा के लिए कोर्ट में जाना पड़े?

- अमित शाह बोले, भारत ने किसी भी रिफ्यूजी पॉलिसी को स्वीकार नहीं किया है। पारसी भी प्रताड़ित होकर ईरान से भारत आए थे। 

- अमित शाह बोले, किसी भी व्यक्ति को अपने परिवार की बहन-बेटी को या अपने धर्म को बचाने के लिए यहां आना पड़े और हम अपनाए नहीं, ये गलती हम नहीं कर सकते। हम उन्हें जरूर स्वीकारेंगे, नागरिकता देंगे और पूरे विश्व के सामने उन्हें सम्मान भी देंगे।

- अमित शाह बोले, ये बिल अनुच्‍छेद 14, अनुच्‍छेद 21 और अनुच्‍छेद 25 किसी का उल्लंघन नहीं करता है। ये संविधान के हिसाब से पूरी तरह ठीक है।

- अमित शाह बोले, पीएम मोदी के रहते हुए किसी अल्‍पसंख्‍यक को डरने की जरूरत नहीं। रोहिंग्‍या के लोग बांग्‍लादेश के जरिए आते हैं, इन्‍हें कभी स्‍वीकार नहीं किया जाएगा। 

- अमित शाह बोले, ये कानून किसी एक धर्म के लोगों के लिए नहीं लाया गया है। ये सभी प्रताड़ित अल्पसंख्यकों के संरक्षण के लिए है। इसलिए इसमें अनुच्‍छेद 14 का उल्लंघन नहीं होता है।  

- गृह मंत्री अमित शाह बोले, 1951 में भारत में मुस्लिम 9.8 प्रतिशत थे। आज 14.23 प्रतिशत हैं, हमने किसी के साथ भेदभाव नहीं किया। आगे भी किसी के साथ धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाएगा।  

- अमित शाह बोले, बांग्लादेश में 1947 में अल्पसंख्यकों की आबादी 22% थी जो 2011 में 7.8 % हो गई। आखिर कहां गए ये लोग? जो लोग विरोध करते हैं उनसे मैं पूछना चाहता हूं कि अल्पसंख्यकों का क्या दोष है कि वो इस तरह क्षीण किए गए?

- अमित शाह बोले, 3 देश पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के संविधान में इस्लाम को राज्य धर्म बताया गया है। वहां अल्पसंख्यकों को न्याय मिलने की संभावना लगभग खत्म हो जाती है। 1947 में पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की आबादी 23% थी। 2011 में ये 3.7% पर आ गई।

- अमित शाह बोले, इस देश का विभाजन धर्म के आधार पर न होता तो मुझे बिल लाने की जरूरत ही नहीं होती। सदन को ये स्वीकार करना होगा कि धर्म के आधार पर विभाजन हुआ है। जिस हिस्से में ज्यादा मुस्लिम रहते थे वो पाकिस्तान बना और दूसरा हिस्सा भारत बना। 

 -अमित शाह ने कहा कि कई सदस्यों ने अनुच्‍छेद 14 का हवाला देते हुए इसे असंवैधानिक करार दिया। मैं कहना चाहता हूं कि किसी भी तरह से ये बिल गैर संवैधानिक नहीं है। न ही ये अनुच्‍छेद 14 का उल्लंघन करता है।

- अमित शाह ने कहा कि 1950 में दिल्‍ली में नेहरू और लियाकत अली के बीच समझौता किया गया। अल्‍पसंख्‍यकों की सुरक्षा का ध्‍यान रखने की बात कही गई। लेकिन पाकिस्‍तान में समझौते का ख्‍याल नहीं रखा गया। 

- नागरिक संशोधन बिल पर गृह मंत्री अमित शाह बिल पर चर्चा कर रहे हैं। गृह मंत्री अमित शाह बोले, अगर देश का विभाजन धर्म के आधार पर न हुआ होता तो आज हमें नागरिकता संशोधन विधेयक लेकर नहीं आना पड़ता।

- शिरोमणि अकाली दल ने नागरिकता संशोधन विधेयक में पड़ोसी देशों में उत्पीड़न का सामना करने वाले मुस्लिमों के संप्रदायों को शामिल करने का आग्रह किया। 

- लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि हम नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध कर रहे हैं, क्योंकि यह भेदभावपूर्ण है। सताए गए शरणार्थियों के तर्क को शरणार्थी को समायोजित करने के लिए वर्तमान कानून में संशोधन के माध्यम से अलग प्रावधान बनाकर निपटा जा सकता है। इसके लिए अलग भेदभावपूर्ण कानून की आवश्यकता नहीं है।

- लोकसभा में एनसीपी की नेता सुप्रिया सुले ने नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 पर कहा कि हमारे लोकतंत्र की पूरी नैतिकता समानता है और अनुच्छेद 14 और 15 के बारे में बात करें तो मैं गृह मंत्री की बातों से आश्वस्त नहीं हूं। इसे सुप्रीम कोर्ट में खारिज कर दिया जाएगा। मैं उनसे इस पर पुनर्विचार करने और विधेयक को वापस लेने का अनुरोध करता हूं।

- तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) नाम नागेश्वर राव ने लोकसभा में कहा कि हम अपनी धर्मनिरपेक्ष पार्टी नीति के अनुरूप नागरिकता संशोधन 2019 का विरोध करते हैं। हम भारतीय संविधान के प्रावधानों और भावना का कड़ाई से पालन करते हैं।

- लोकसभा में जदयू के सांसद राजीव रंजन सिंह ने कहा कि हम इस बिल का समर्थन करते हैं। इस बिल को भारतीय नागरिकों के बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक दोनों के प्रकाश में नहीं देखा जाना चाहिए। अगर पाकिस्तान के सताए गए अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता दी जाती है तो मुझे लगता है कि यह सही बात है।

- शिवसेना के विनायक राउत ने कहा कि बिल में उल्लेखित इन छह समुदायों के कितने शरणार्थी भारत में रह रहे हैं? गृह मंत्रालय ने इसका जवाब नहीं दिया कि नागरिकता मिलने पर हमारी आबादी कितनी बढ़ जाएगी? इसके अलावा, श्रीलंका से तमिलों को लेकर क्या प्रावधान होगा?

- लोकसभा में टीएमसी सासंद अभिषेक बनर्जी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद अगर इस बिल को देखते तो उन्हें झटका लगता। क्योंकि यह उनके विचार के खिलाफ है। भाजपा का आइडिया ऑफ इंडिया विभाजनकारी है। अगर हम महात्मा गांधी के शब्दों को नजरअंदाज करेंगे और सरदार पटेल की सलाह पर ध्यान नहीं देंगे तो यह विनाशकारी होगा।

- लोकसभा में द्रमुक के नेता दयानिधि मारन ने कहा कि संभवतः पश्चिम का भय, पश्चिम द्वारा अलग-थलग होने का भय आप में फैल गया और आपको इस विधेयक में ईसाइयों को शामिल करना पड़ा। इसके अलावा अगर गुलाम कश्मीर (Pok) के मुसलमान आना चाहें तो क्या होगा? उसके लिए आपके पास क्या कानून है?

 - लोकसभा में कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा, 'गृहमंत्री ने कहा कि धर्म के आधार पर विभाजन के लिए कांग्रेस जिम्मेदार है। मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि दो राष्ट्र सिद्धांत की नींव 1935 में अहमदाबाद में सावरकर ने हिंदू महासभा के सत्र में रखी थी, न कि कांग्रेस ने।'

- लोकसभा में कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा कि यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, अनुच्छेद 15, अनुच्छेद 21, अनुच्छेद 25 और 26 के खिलाफ है। यह विधेयक असंवैधानिक है और समानता के मूल अधिकार के खिलाफ है। 

 - अमित शाह ने कहा कि हम इनर लाइन परमिट सिस्टम में मणिपुर को शामिल कर रहे हैं, यह बड़ा मुद्दा अब हल हो गया है। लंबे समय से चली आ रही इस मांग को पूरा करने के लिए मैं मणिपुर के लोगों की ओर से पीएम मोदी को धन्यवाद देता हूं।

- अमित शाह ने कहा कि दस्तावेजों के बिना भी राशन कार्ड सहित शरणार्थियों को नागरिकता दी जाएगी।

- अमित शाह ने कहा कि नागरिकता विधेयक में कोई भेदभाव नहीं है, यह अधिकार देता है छीनता नहीं है।

- अमित शाह ने कहा कि 1947 में जो शरणार्थी आए थे सभी भारतीय संविधान द्वारा स्वीकार किए गए थे, शायद ही देश का कोई ऐसा क्षेत्र होगा जहां पश्चिम और पूर्वी पाकिस्तान के शरणार्थी नहीं बसते थे। मनमोहन सिंह जी से लेकर लालकृष्ण आडवाणी जी तक, सभी इसी श्रेणी के हैं।

- नागरिकता विधेयक पर लोकसभा में अमित शाह ने कहा कि घुसपैठियों और शरणार्थियों के बीच अंतर समझना होगा। 

- अमित शाह ने कहा कि हम पूर्वोत्तर के स्वदेशी रिवाजों और संस्कृतियों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।

- गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि इस बिल के पीछे कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है। किसी के साथ अन्याय का सवाल नहीं।

- लोकसभा में नागरिकता बिल पेश हुआ। बिल को पेश होने के लिए लोकसभा में जो वोटिंग हुई, उसमें 293 हां के पक्ष में और 82 विरोध में वोट पड़े हैं।  लोकसभा में इस दौरान कुल 375 सांसदों ने वोट किया।

- नागरिक संशोधन विधेयक को कानून का उल्‍लंघन बताने वाले विपक्षी नेताओं को जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा- रिजनेबल क्लासिफिकेशन के आधार पर इस देश में आर्टिकल 14 रहते हुए कई कानून बने हैं। देखिए, समानता के आधिकार के कानून दुनियाभर के कई देशों में है, लेकिन क्या आप वहां जाकर नागरिकता ले सकते हैं? वो ग्रीन कार्ड देते हैं, निवेश करने वालों, रिसर्च और डेवलपमेंट करने वालों को देते हैं। रिजनेबल क्लासिफिकेशन के आधार पर ही वहां भी नागरिकता दी जाती है। फिर ऐसा भी नहीं कि पहली बार सरकार नागरिकता के लिए कुछ कर रही है। इंदिरा गांधी ने बांग्लादेश से आए लोगों को नागिरकता देने का निर्णय किया था। पाकिस्तान से आए लोगों को नागरिकता फिर क्यों नहीं दी गई? आर्टिकल 14 की ही बात है, तो सिर्फ बांग्लादेश से आने वालों को क्यों नागरिकता दी गई?

- नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध में एआइएमआइएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने कहा- सेक्युलरिज्म देश के आधारभूत ढांचे का हिस्सा है। यह बिल मौलिक अधिकारों का हनन करता है। वहीं, असम से कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने भी कहा कि यह बिल उत्तर असम अकॉर्ड का उल्लंघन करता है। हालांकि, इसके जवाब में अमित शाह ने दावा किया कि यह बिल संविधान के किसी भी अनुच्छेद को प्रभावित नहीं करता है।

- संसद में नागरिकता संशोधन विधेयक पेश होने के बाद काफी हंगामा देखने को मिल रहा है। लोकसभा में टीएम सांसद सौगत राय ने कहा कि गृह मंत्री नए हैं, उन्हें शायद नियमों की जानकारी नहीं है। इसके बाद लोकसभा में हंगामा हो गया। इससे पहले सौगत राय ने लोकसभा में कहा कि आज संविधान संकट में है। इसके बाद बीजेपी के सदस्यों ने उनके बयान का विरोध किया। बीजेपी के हंगामे के दौरान टीएमसी सांसद बोले- मारेंगे क्या, मारेंगे क्या मुझे?

- बिल पेश करते हुए अमित शाह ने कहा- नागरिकता संशोधन विधेयक किसी भी तरह से देश के अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है, इसका मैं विश्‍वास दिलाता हूं। लोकसभा में अमित शाह ने जैसे ही आज नागरिकता संशोधन विधेयक पेश किया, वैसे ही विपक्षी सांसद हंगामा करने लगे। इस पर गृह मंत्री ने खड़े होकर साफ कहा कि वह अभी बिल पेश कर रहे हैं और विपक्षी सांसदों के एक-एक सवालों का जवाब देंगे, तब आप वॉकआउट मत करिएगा। शाह ने यह भी कहा कि यह बिल 0.001 प्रतिशत भी अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है।

- अमित शाह ने लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक पेश कर दिया है।

- समाजवादी पार्टी संसद में नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध करेगी। अखिलेश यादव ने यह जानकारी दी है।

- नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध में संसद परिसर में AIDUF सांसद बदरुद्दीन अजमल प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं दिल्ली में इस बिल के विरोध में जंतर-मंतर पर AIUDF का प्रदर्शन भी जारी है।

- नागरिकता संशोधन विधेयक पर केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने कहा- हिदुओं के लिए और कोई देश नहीं है। मुसलमानों के लिए कई देश हैं। घुसपैठियों की भारत में कोई जगह नहीं। यह सरकार कई बार साफ कर चुकी है।

- कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने लोकसभा में कहा कि देश में बेरोजगारी दर 45 साल के उच्चतम स्तर पर है। देश की मौजूदा आर्थिक सुस्ती को देखते हुए क्या सरकार ऐसा डेटाबेस बना सकती है, जिससे पता चले कि जिसने एजुकेशन लोन लिया है उसे रोजगार मिला या नहीं?

- भारतीय जनता पार्टी के सांसद विजय गोयल ने राज्यसभा में दिल्ली की अनाज मंडी में लगी भीषण आग का मुद्दा है। रविवार को लगी इस भीषण आग में 43 लोगों की जान चली गई है और कई लोग घायल हो गए हैं।

- नागरिकता संशोधन विधेयक पर एआइयूडीएफ के नेता बदरुद्दीन अजमल ने कहा- यह बिल संविधान और हिंदू मुस्लिम एकता के खिलाफ है। हम इसे सिरे से खारिज करते हैं। इस के मुद्दे पर विपक्ष भी हमारे साथ है। हम इस बिल को किसी भी कीमत पर पास नहीं होने देंगे।

- केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह आज नागरिक संशोधन विधेयक संसद के पटल पर रखने जा रहे हैं। अमित शाह लोकसभा पहुंच गए हैं। दोपहर 12 बजे वह लोकसभा में नागरिकता कानून बिल पेश करेंगे। संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी ने बताया कि केंद्र सरकार आज ही नागरिकता बिल को लोकसभा में पास कराएगी। इसका मतलब है कि इस बिल पर लोकसभा में सोमवार को ही चर्चा हो सकती है।

- केंद्र नागरिकता संशोधन बिल को देशहित में बता रहा है। गृह मंत्रालय सूत्रों की मानें तो नागरिकता कानून के तहत मणिपुर की चिंताओं को भी देखा गया है। इसमें हर राज्‍य का ध्‍यान रखा गया है। इनर लाइन परमिट में मणिपुर को भी शामिल किया जा सकता है, अभी तक अरुणाचल, नगालैंड और मिजोरम को ही शामिल किया गया था। इससे पहले 1950 से लेकर अभी तक सभी को फॉरेन ऑफिस में रजिस्टर करने की जरूरत थी।

- देश में नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर कई मांग उठ रही हैं। शिया वक्फ बोर्ड के प्रमुख वसीम रिज़वी ने गृह मंत्री अमित शाह को चिट्ठी लिखी है. इसमें लिखा गया है कि नागरिकता संशोधन बिल में शियाओं को भी शामिल किया जाए।

- नागरिकता संशोधन विधेयक का संसद से सड़क तक विरोध हो रहा है। आज सिर्फ असम में इस बिल के विरोध में सोमवार को 16 संगठनों ने 12 घंटे का बंद बुलाया है। इनके अलावा आदिवासी छात्रों ने भी इस बंद का समर्थन किया है, असम के अलावा अन्य राज्यों में भी बिल के खिलाफ प्रदर्शन चल रहा है। नागरिकता कानून से पहले एनआरसी का भी भरपूर विरोध किया गया था।

- संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बताया कि प्रश्नकाल के बाद लोकसभा में सिटिजनशिप अमेंडमेंट बिल 2019 पेश होगा। बताया जा रहा है कि गृहमंत्री अमित शाह इस बिल को सदन के सामने रखेंगे।

- नागरिकता संशोधन विधेयक पर शिवसेना ने केंद्र सरकार पर हमला किया है। शिवसेना का कहना है कि केंद्र इस बिल के जरिए हिंदू-मुस्लिमों के बीच अदृश्‍य बंटवारा कर रही है।

- इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के सांसद पीके कुन्हलिकुट्टी ने लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB), 2019 की शुरुआत का विरोध करते हुए स्थगन प्रस्ताव नोटिस दिया है। नागरिकता संशोधन बिल में केंद्र सरकार ने पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के मुस्लिम समुदाय को शामिल नहीं किया गया है। इसी का विपक्षी विरोध कर रहे हैं।

गौरतलब है कि नागरिकता संशोधन बिल में सरकार ने पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक भेदभाव और उत्पीड़न के शिकार होकर आने वाले गैर-इस्लामिक धर्मावलंबियों हिंदू, बौद्ध, जैन, सिख, पारसी और इसाई समुदाय के लोगों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है। इसमें मुस्लिम समुदाय को शामिल नहीं किया गया है। कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी पार्टियों का कहना है कि भारतीय संविधान धर्म के आधार पर इस तरह के भेदभाव की इजाजत नहीं देता।

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