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नेहरू, इंदिरा और सोनिया... लोकसभा में अमित शाह ने दिए वोट चोरी के 3 उदाहरण; कांग्रेस ने दी चुनौती

Published: Wed, 10 Dec 2025 05:47 PM (GMT+05:30)Updated: Wed, 10 Dec 2025 08:51 PM (GMT+05:30)

लोकसभा में अमित शाह के भाषण के दौरान हंगामा हुआ, जिसमें उन्होंने नेहरू के प्रधानमंत्री बनने को 'पहली वोट चोरी' ...और पढ़ें

HighLights

  1. अमित शाह ने नेहरू के पीएम बनने को बताया 'वोट चोरी'

  2. शाह के बयान पर लोकसभा में विपक्षी सदस्यों का हंगामा

  3. सदन में शोरगुल और विरोध प्रदर्शन हुआ

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र में SIR पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि देश में विपक्ष पिछले कई महीनों से वोट चोरी का मुद्दा उठा रहा है। मैं आज बताना चाहता हूं कि देश में कब-कब वोट चोरी हुई?

अमित शाह ने कहा, वोट चोरी के तीन आधार होते हैं, नंबर एक- योग्यता नहीं है और आप वोटर बनकर बैठे हैं, ये वोट चोरी मानी जाती है। दूसरा, आप गलत प्रकार से चुनाव जीतते हैं। तीसरा- वोट के विपरीत पद प्राप्त करना। ये तीनों ही वोट चोरी के दायरे में आती हैं।

शाह ने बताया कब हुई देश में पहली वोट चोरी?

शाह ने कहा, देश में पहली वोट चोरी की घटना हुई जब देश को पहला प्रधानमंत्री तय करना था, उस वक्त के देश के जितने प्रांत थे, उनके कांग्रेस अध्यक्ष थे, उनके एक-एक वोट से तय होना था, उनमें से 28 वोट सरदार पटेल को मिले और दो वोट जवाहरलाल नेहरू जी को, और प्रधानमंत्री जवाहर लाल जी बने। इसके बाद कांग्रेस सांसद सदन में हंगामा करने लगे।

अनैतिक तरीके के चुनाव जीतना भी वोट चोरी- शाह

अमित शाह ने कहा, दूसरे प्रकार की वोट चोरी, मतलब, अनैतिक तरीके के चुनाव जीतना। ऐसी वोट चोरी भी भूतकाल में एक बार हुई है। श्रीमती इंदिरा गांधी रायबरेली से चुनी गईं, इलाहाबाद हाईकोर्ट में श्री राजनारायण पहुंचे, कि ये चुनाव नियमों के अनुसार नहीं हुए। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह तय कर दिया कि श्रीमती गांधी ने चुनाव उचित तरीके से नहीं जीता है, हम इसके रद करते हैं। ये भी बहुत बड़ी वोट चोरी थी।

उसके बाद उस वोट चोरी को ढकने के लिए संसद में कानून लाए कि प्रधानमंत्री के खिलाफ कोई केस ही नहीं हो सकता है। श्रीमती गांधी ने खुद को ही इम्यूनिटी देने का काम किया।

योग्यता नहीं है और मतदाता बन गए, वो भी वोच चोरी- शाह

शाह ने कहा कि तीसरी वोट चोरी वो है, जिसमें योग्यता नहीं है और मतदाता बन गए। अभी-अभी दिल्ली की एक सिविल अदालत में विवाद पहुंचा है, उसमें विवाद ये है कि सोनिया गांधी जी इस देश की नागरिक बनने से पहले मतदाता बन गई थीं। मैं फैक्ट बता रहा हूं कि कोर्ट में वाद दायर किया गया है। इसका जवाब अब उन्हें कोर्ट में देना है।

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