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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 14, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Surendra Goyal Died: गाजियाबाद के पूर्व सांसद सुरेंद्र प्रकाश गोयल का निधन, कोरोना से थे पीड़ित

By JP YadavEdited By:
Published: Fri, 14 Aug 2020 09:08 AM (IST)Updated: Fri, 14 Aug 2020 10:04 AM (IST)

UP Coronavirus News Update 75 वर्षीय सुरेंद्र प्रकाश गोयल का शुक्रवार सुबह को निधन हो गया। राजीव त्यागी के निधन के बाद कांग्रेस को यह दूसरा बड़ा नुकसान है।

Surendra Goyal Died: गाजियाबाद के पूर्व सांसद सुरेंद्र प्रकाश गोयल का निधन, कोरोना से थे पीड़ित
Surendra Goyal Died: गाजियाबाद के पूर्व सांसद सुरेंद्र प्रकाश गोयल का निधन, कोरोना से थे पीड़ित

नई दिल्ली/गाजियाबाद [मदन पांचाल]। UP Coronavirus News Update:  गाजियाबाद के पूर्व सांसद और कांग्रेस के वरिष्ट नेताओं में शुमार सुरेंद्र प्रकाश गोयल का शुक्रवार को निधन हो गया। कोरोना संक्रमण के बाद वह पिछले पंद्रह दिनों से दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में भर्ती थे। उनके निधन की पुष्टि उनके पुत्र सुशांत गोयल ने की है। निधन की खबर मिलते ही कांग्रेसी नेताओं में शोक की लहर दौड़ गई है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक बीस जुलाई को पूर्व सांसद की कोरोना जांच कराई गई तो संक्रमण की पुष्टि हुई थी। उनका शुरू में होम-आइसोलेशन में ही उपचार किया गया। हालत बिगड़ने पर दो अगस्त को नगर विधायक एवं स्वास्थ्य राज्य मंत्री अतुल गर्ग की सिफारिश पर उन्हे दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बाद 75 वर्षीय सुरेंद्र प्रकाश गोयल का शुक्रवार सुबह को निधन हो गया। राजीव त्यागी के निधन के बाद कांग्रेस को यह दूसरा बड़ा नुकसान है।

1972 में पहली बार पार्षद बनकर उतरे थे सियासी मैदान में

कांग्रेस की राजनीति करते हुए पहली बार वह 1972 में नगर पालिका गाजियाबाद के सदस्य के रुप में चुने गए थे। 1973 में नगर पालिका के चेयरमैन बने और फिर 1989 में भी चेयरमैन बने। 2002 में शहर से विधायक चुने गए। साल 2004 में पहली बार कांग्रेंस से सांसद चुने गए। केंद्र में कांग्रेस की सरकार रहते हुए शहर के लिए कई विकास कार्य करवाने का श्रेय उन्ही को जाता है।

चाचा के नाम से चर्चाओं में रहते थे

शहर के हर दल के नेता उन्हें चाचा के नाम से पुकारकर सम्मान देते थे। कई बार कांग्रेस के भीतर ही टिकट को लकर खूब उठापठक हुई लेकिन एक ही झटके में वह टिकट लेकर नामांकन करने पहुंच जाते थे। कांग्रेस के उच्च नेताओं से उनकी पकड़ का कोई अंतिम क्षणों तक अंदाजा नहीं लगा पाता था। कई बार मंच से कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने यह बोला कि चाचा कहां हैं।