इशारा करते हुए पीएम मोदी बोले- ये लोग तो मजबूरी में वहां बैठे हैं; तभी हंसने लगे अखिलेश और डिंपल यादव
पीएम मोदी ने लोकसभा में अपने भाषण के दौरान आपातकाल का जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा कि सभापति जी यहां भी ऐसे कई दल बैठे हैं जिनके मुखिया भी जेल में हुआ करते थे। इनकी मजबूरी है कि वे वहां जाकर बैठे हैं। पीएम मोदी के इस बात को कहते ही समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और डिंपल यादव हंसने लगे।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। लोकसभा में सविंधान पर चर्चा के दौरान पीएम मोदी ने जवाब देते हुए कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में कांग्रेस पर कटाक्ष किया जिसके बाद समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव और डिंपल यादव लोकसभा में हंसने लगे। दरअसल पीएम मोदी संसद में आपातकाल का जिक्र कर रहे थे।
हंसने लगे अखिलेश और डिंपल यादव
जिसको लेकर पीएम मोदी ने कहा कि सभापति जी यहां भी ऐसे कई दल बैठे हैं जिनके मुखिया भी जेल में हुआ करते थे। इनकी मजबूरी है कि वे वहां जाकर बैठे हैं। पीएम मोदी के इस बात को कहते ही समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव हंसने लगे साथ ही उनके पीछे बैठीं उनकी पत्नी और सांसद डिंपल यादव भी हंसने लगीं।
आगे पीएम ने कहा कि आपातकाल के दौरान निर्दोष लोगों को भी जेलों में ठूंस दिया था। लाठियां बरसाईं जाती थी। कई लोग तो जेलों में ही मौत की शरण हो गए। उन्होंने कहा कि एक निर्दयी सरकार सविंधान को चूर-चूर करती रहती थी।
कांग्रेस के मुंह में संविधान की अवहेलना का खून- पीएम मोदी
लोकसभा में संविधान पर चर्चा का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने धारदार भाषण में एक तरफ जहां यह साबित करने की कोशिश की कि कांग्रेस संविधान की मर्यादाओं को कभी सम्मान नहीं दे सकती है, वहीं उदाहरणों के साथ यह भी स्पष्ट किया कि भाजपा शासन में जो कुछ हुआ और हो रहा है वह संविधान की मूल भावना के अनुरूप है।
संविधान बदलने के विपक्षी नैरेटिव को पूरी तरह खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि संविधान में सबसे अहम देश की एकता, अखंडता और जनहित है। उनकी सरकार के हर काम इसी दिशा में हैं। दूसरी तरफ, कांग्रेस के मुंह में संविधान की अवहेलना का खून लग चुका है।
गांधी परिवार ने संविधान को किया तार-तार: पीएम मोदी
विपक्षी पार्टी अपने माथे से आपातकाल का पाप नहीं मिटा सकती है। कांग्रेस की ओर से वक्ताओं ने मोदी सरकार पर संविधान विरोधी होने का आरोप लगाया था। प्रधानमंत्री ने गिनाया कि 1951 में नेहरू की अंतरिम सरकार से लेकर मनमोहन सिंह के कार्यकाल और उसके बाद भी गांधी परिवार के व्यक्ति ने संविधान को तार-तार किया।
नेहरू ने तभी संविधान में संशोधन कर दिया था, जब उनकी सरकार चुनी भी नहीं गई थी। नेहरू ने राज्यों को पत्र लिखकर कहा कि अगर संविधान हमारे रास्ते में आएगा तो उसे भी बदल देना चाहिए। कांग्रेस के इस पाप पर देश चुप नहीं था। राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने चेताया कि यह गलत हो रहा है।
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