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    ममता से पहले भी कई मामलों में राज्‍य सरकार ने सीबीआई की जांच में अटकाए हैं रोड़े

    CBI को लेकर रार कोई नई नहीं है। हमेशा से ही विपक्ष सीबीआई को केंद्र की कठपुतली बताता रहा है। मामला चाहे लालू के चारा घोटाले का हो या फिर ताज कॉरिडोर सभी में यह देखने को मिला है।

    By Kamal VermaEdited By: Updated: Tue, 05 Feb 2019 11:11 AM (IST)
    ममता से पहले भी कई मामलों में राज्‍य सरकार ने सीबीआई की जांच में अटकाए हैं रोड़े

    नई दिल्‍ली [जागरण स्‍पेशल]। पश्चिम बंगाल में सीबीआई पर चल रहे घमासान ने अब पूरी तरह से राजनीतिक मोड़ ले लिया है। सुप्रीम कोर्ट भी इसको लेकर सक्रिय और गंभीर तो हुआ है लेकिन सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान कुछ खास बात निकलकर नहीं आई। फिलहाल मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ कर दिया सीबीआई पुलिस कमिश्‍नर को गिरफ्तार नहीं कर सकती है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्‍य सरकार, डीजीपी और पुलिस कमिश्‍नर को अवमानना का नोटिस भी जारी किया गया है।  इस बीच केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने साफ कर दिया है कि केंद्र इस मामले में खामोश बने नहीं रह सकता है। दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी ने भी साफ कर दिया है कि वह इस मामले में न तो पीछे हटने वाली हैं और न ही वह कोई समझौता करेंगी।

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    इस बीच सबसे बड़ी तलवार कोलकाता के पुलिस कमिश्‍नर पर लटकी है। केंद्र और राज्‍य की इस लड़ाई का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। इसकी एक नहीं कई वजह हैं। पहली वजह तो यही है कि पुलिस कमिश्‍नर राजीव कुमार को एसआईटी के तहत सारधा घोटाले की जांच सौंपी गई थी। इस दौरान उन्‍होंने कुछ साक्ष्‍य भी जुटाए थे जो कथिततौर पर आज भी उनके पास हैं। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ही सारधा चिटफंड घोटाले की जांच सीबीआई कर रही है। इस मामले की जांच 2013 से ही चल रही है। इसको लेकर राज्‍य सरकार से सहमति ली जा चुकी है।

    जहां तक सीबीआई की बात है तो उस पर हमेशा से ही विपक्षी पार्टियां शोर मचाती रही हैं। हमेशा से ही सीबीआई को केंद्र की कठपुतली बताया जाता रहा है। इसलिए पश्चिम बंगाल में सीबीआई पर रार कोई नया या पहला मामला नहीं है।

    • ताज कॉरिडोर मामले में भी सीबीआई पर रार देखने को मिली थी। ताज कॉरिडोर और आय से अधिक संपत्ति मामले में सीबीआई ने 6 अप्रैल, 2004 को मायावती व नसीमुद्दीन सिद्दीकी और तत्कालीन मुख्य सचिव पीएस पुनिया व डीएस बग्गा के घरों पर छापे मारे। मायावती ने तत्कालीन सीबीआई डीआईजी पी. नीरज नयन पर आरोप लगाए। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई डीआईजी की ही मानी और मायावती द्वारा उन्हें हटाने की मांग खारिज कर दी। डीआईजी ममता बनर्जी के प्रमुख सचिव गृह भी रहे। मायावती ने भाजपा पर सियासी बदले का आरोप लगाया। यह मामला खारिज होने के बाद उनकी लोकप्रियता बढ़ी। उत्तर प्रदेश में 2007 में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई।
    • चारा घोटाले के वक्‍त भी सीबीआई की जांच और कार्रवाई को लेकर बिहार सरकार का सख्‍त रवैया सामने आया था। वर्ष 1997 में 950 करोड़ के चारा घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट पर अमल पर सीबीआई और बिहार सरकार में ठन गई थी। इसके लिए सीबीआई ने मुख्य सचिव और डीजीपी से मदद मांगी, लेकिन उन्होंने सहयोग नहीं किया। बाद में सीबीआई को इसके लिए सेना को पत्र लिखकर एक कंपनी मुहैया करवाने की मांग तक करनी पड़ी थी। बाद में इस मामले में लालू प्रसाद यादव को सजा भी हुई।
    • कोयला आवंटन मामले में पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा पर पद के दुरुपयोग का आरोप लगा था। सीबीआई ने 6 नवंबर 2009 को छापेमारी की थी। इस मामले में निचली अदालत ने कोड़ा को दोषी करार दिया है। चुनाव लड़ने के अयोग्य घोषित होने के बाद पत्नी गीता कोड़ा पश्चिम सिंहभूम से 2009 और 2014 में भारत समानता पार्टी की विधायक बनीं।
    • सीबीआई ने आय से अधिक संपत्ति मामले में 12 दिसंबर 2018 को पूर्व मंत्री बंधु तिर्की को गिरफ्तार किया था। विपक्ष ने सीबीआई के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए रांची में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया था।
    • वर्ष 2016 में उत्‍तराखंड के तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री हरीश रावत के खिलाफ एक स्टिंग ऑपरेशन किया गया था। इस कथित स्टिंग की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी जिस पर कांग्रेस ने आपत्ति जताई थी। इसकी जांच सीबीआई से कराने को लेकर भी काफी शोर हुआ था। हरीश रावत को इस मामले में अपना पक्ष रखने के लिए 24 मई 2016 को सीबीआई मुख्यालय तलब किया गया था, जहां उनसे लंबी पूछताछ हुई। लेकिन इसके बाद से मामला ठंडे बस्‍ते में चला गया। लेकिन इस मामले के सामने आने के बाद राज्‍य में कांग्रेस की जबरदस्‍त हार हुई।

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