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    खरगे ने संसद के रिकार्ड से अदाणी से जुड़े सवालों को हटाए जाने को बताया अलोकतांत्रिक, कहा- यह बड़ा घोटाला

    By Sanjay MishraEdited By: Sonu Gupta
    Updated: Fri, 10 Feb 2023 09:26 PM (IST)

    अदाणी-हिंडनबर्ग विवाद से जुड़े हिस्सों को संसद के रिकार्ड से हटाए जाने के बावजूद अदाणी समूह पर लगे वित्तीय हेर-फेर के आरोपों को कांग्रेस ने संसद से लेकर सड़क तक इसे उठाते रहने का ऐलान किया है। फोटो- एएनआई।

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    खरगे ने संसद के रिकार्ड से अदाणी से जुड़े सवालों को हटाए जाने को बताया अलोकतांत्रिक।

    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। अदाणी-हिंडनबर्ग विवाद से जुड़े हिस्सों को संसद के रिकार्ड से हटाए जाने के बावजूद अदाणी समूह पर लगे वित्तीय हेर-फेर के आरोपों को कांग्रेस ने संसद से लेकर सड़क तक इसे उठाते रहने का ऐलान किया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने उनके साथ ही राहुल गांधी के अदाणी से जुड़े सवालों को हटाए जाने को अलोकतांत्रिक करार देते हुए कहा कि अगर सरकार लोकतांत्रिक तरीके से काम करने के लिए तैयार नहीं है तो जनता ही उनसे छुटकारा पा लेगी।

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    केंद्रीय जांच एजेंसियों पर उठाए सवाल

    राज्यसभा में नेता विपक्ष खरगे ने अदाणी मामला सामने आने के बाद सीबीआई, ईडी, इनकम टैक्स जैसी एजेंसियों की चुप्पी पर भी गंभीर सवाल उठाया और आरोप लगाया कि इन्हें जांच के लिए केवल विपक्ष के लोग ही दिखाई देते हैं। कांग्रेस अध्यक्ष की कमान संभालने के बाद एआइसीसी में अपनी पहली प्रेस कांफ्रेंस करते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने अदाणी समूह से जुड़े आरोपों की संयुक्त संसदीय समिति से जांच की मांग दोहराते हुए भाजपा सरकार से दस सवाल भी किए जिसमें पूछा गया कि आखिर जेपीसी जांच के लिए वह तैयार क्यों नहीं है, जबकि यह एक बड़ा घोटाला है जिसमें जनता का पैसा शामिल है।

    संसदीय लोकतंत्र में हम विपक्ष के रुप में पूछते रहेंगे सरकार से सवाल- खरगे

    सदन से अदाणी को लेकर सरकार पर लगाए गए आरोपों को हटाए जाने पर उन्होंने कहा कि 51 साल के विधायी जीवन में उन्होंने विधानसभा से लेकर संसद तक कभी ऐसा नहीं देखा कि गंभीर सवालों को रिकार्ड से हटाया गया हो। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि विपक्ष का काम सरकार से सवाल पूछना है और जनता ने हमें यह जिम्मेदारी है कि हम उनके पैसे और अधिकारों की रक्षा करने के लिए घोटालों को लेकर सवाल पूछें। संसदीय लोकतंत्र में हम विपक्ष के रुप में सरकार से सवाल पूछते रहेंगे। लेकिन सरकार संसद को लोकतांत्रिक तरीके से चलने नहीं देना चाहती और वह निरंकुशता की राह पर चलेगी तो लोग ही उनसे छुटकारा पा लेंगे।

    सरकार पर लगाए सवालों की झड़ी

    खरगे ने इस दौरान अदाणी विवाद पर कांग्रेस की ओर से जारी सवालों की श्रृंखला के तहत सरकार पर सवालों की झड़ी लगाते हुए पूछा कि क्या अदाणी घोटाले की जांच नहीं होनी चाहिए ? क्या अदाणी की कंपनियों में एलआइसी के लगे पैसे की गिरती कीमतों पर सवाल नहीं पूछा जाना चाहिए ? एसबीआई व दूसरे बैंकों द्वारा अदाणी को दिए गए 82,000 करोड रुपए के कर्ज के बारे में क्या नहीं पूछा जाना चाहिए? अदाणी के शेयरों में 32 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट के बावजूद एलआइसी और एसबीआई ने 525 करोड़ रुपए उसके एफपीओ में क्यों लगवाया गया? क्या यह नहीं पूछ सकते कि एलआईसी और एसबीआई के शेयरों की कीमत शेयर बाजार में एक लाख करोड़ से ज्यादा क्यों गिर गई? टैक्स हैवेन से आदाणी की कंपनियों में आने वाला हजारों करोड़ रुपए किसका है ? क्या श्रीलंका और बांग्लादेश में अदाणी समूह को ठेके नहीं दिलवाए गए? क्या यह सच नहीं कि फ्रांस की टोटल गैस ने अदाणी समूह में 50 बिलियन डॉलर के निवेश को जांच पूरी होने तक रोक दिया है ? क्या दुनिया के सबसे बड़े शेयर निवेशेक नार्वे सोवरेन फंड ने 200 मिलियन डॉलर के अदाणी के सारे शेयर बेच दिए हैं ? क्या एमएससीआई के साथ सभी प्रमुख रेटिंग एजेंसियों ने अदाणी समूह की कंपनियों की रैंकिंग गिरा दी है? खरगे ने यह भी पूछा कि रिजर्व बैंक, सेबी, ईडी, एसएफआईओ, इनकम टैक्स, सीबीआई क्या सबको लकवा मार गया है कि अदाणी की जांच के ना पर वे आंखें मूंदे बैठे हैं।

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