बीएमसी चुनाव के लिए फडणवीस-शिंदे का मिलकर शक्ति प्रदर्शन
मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव से पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और आरपीआई नेता रामदास आठवले ने एक मंच ...और पढ़ें

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे। (एएनआई)
HighLights
फडणवीस, शिंदे और आठवले ने बीएमसी चुनाव हेतु शक्ति प्रदर्शन किया।
महायुति ने मुंबई में महापौर पद जीतने का भरोसा जताया।
पिंपरी-चिंचवड़ में भाजपा-राकांपा के बीच भ्रष्टाचार के आरोप।
राज्य ब्यूरो, मुंबई। मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव से पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और आरपीआई नेता रामदास आठवले ने शनिवार को एक मंच पर आकर शक्ति प्रदर्शन किया, और भरोसा जताया कि मुंबई में इस बार महायुति का महापौर बनेगा।
बीएमसी सहित 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव 15 जनवरी को होने जा रहे हैं। इनमें मुंबई महानगरपालिका के चुनाव शिवसेना (यूबीटी) के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे एवं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुके हैं। तीस साल से बीएमसी पर काबिज शिवसेना (अविभाजित) पर उद्धव ठाकरे इस बार भी काबिज होना चाहते हैं। जबकि 2017 में सिर्फ दो सीटों से पीछे रह गई भाजपा इस बार इस सबसे बड़े बजट वाली महापालिका में अपना महापौर बैठाना चाहती है।
कुल 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव में भाजपा एवं शिवसेना (शिंदे) के बीच 15 महानगरपालिकाओं में गठबंधन हुआ है। जबकि 14 जगह दोनों एक-दूसरे के विरुद्ध चुनाव लड़ रही हैं। इसके बावजूद शिवसेना (यूबीटी) एवं राज ठाकरे की मनसे के गठबंधन से लोहा लेने के लिए आज फडणवीस एवं शिंदे ने मुंबई के वर्ली स्थित स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स में संयुक्त रैली की।
इस रैली में दोनों नेताओं के साथ मंच पर आरपीआई नेता एवं केंद्रीय राज्यमंत्री रामदास आठवले भी उपस्थित थे। जबकि उन्होंने गठबंधन में सीटें न पाने के कारण 39 सीटों पर अपने उम्मीदवार गठबंधन के विरुद्ध उतार रखे हैं।
मुख्यमंत्री फडणवीस एवं उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, दोनों ने 30 वर्ष से बीएमसी पर काबिज शिवसेना (अविभाजित) पर भ्रष्टाचार के कई आरोप लगाते हुए कहा कि अब लोगों को बीएमसी में सिर्फ बोलबच्चन सुनानेवाली सत्ता नहीं चाहिए, बल्कि वचन देकर उसे पूरा करनेवाली सत्ता चाहिए। फडणवीस ने उद्धव ठाकरे द्वारा इस डर को भी खारिज किया कि भाजपा मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करना चाहती है।
उन्होंने कहा कि इतनी हिम्मत किसी में नहीं है, जो मुंबई को महाराष्ट्र से अलग कर सके। उन्होंने मुंबई में बने कोस्टल रोड सहित अन्य कई विकास परियोजनाओं की याद दिलाते हुए कहा कि आज मुंबईवासियों को कोई नींद से जगाकर भी पूछे कि ये सारे काम किसने किए हैं, तो बताएगा कि महायुति ने किए हैं।
राज्य ब्यूरो मुंबई। महाराष्ट्र में चल रहे महानगरपालिका चुनावों के दौरान सत्तारूढ़ गठबंधन के दो दल भाजपा एवं राकांपा एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर आपस में भिड़ते दिखाई दे रहे हैं। पहले उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने पुणे की पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका में भाजपा के शासन काल में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया, तो भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने उन्हें आत्मनिरीक्षण करने की सलाह दे डाली है।
महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने शनिवार को कहा कि उपमुख्यमंत्री अजीत पवार को आत्मनिरीक्षण करना चाहिए, क्योंकि उन्होंने भाजपा शासित पिंपरी-चिंचवड़ नगर निकाय में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। चव्हाण का कहना है कि ये आरोप कुछ एजेंसियों द्वारा 15 जनवरी को होने वाले नगर निकायों के चुनावों से पहले एक झूठी कहानी गढ़ने के प्रयास का हिस्सा हैं।
चव्हाण ने कहा कि अगर भाजपा आरोप लगाना शुरू कर देगी, तो इससे पवार के लिए गंभीर मुश्किलें खड़ी हो जाएंगी। राज्य सरकार में साथ रहने के बावजूद अजीत पवार की राकांपा पुणे, पिंपरी-चिंचवड़ एवं मुंबई महानगरपालिका में भाजपा के विरुद्ध चुनाव लड़ रही है।
चव्हाण पवार के उन आरोपों का जवाब दे रहे थे कि नगर निकाय पिछले नौ वर्षों से भ्रष्टाचार से ग्रस्त है और इसी अवधि में कर्ज में डूब गया है। अजीत पवार यह कहकर भाजपा पर सीधे प्रहार कर रहे थे। क्योंकि पिंपरी-चिंचवड नगर निगम में 2017 से 2022 तक भाजपा का शासन रहा है, और उसके बाद राज्य द्वारा नियुक्त प्रशासक का शासन रहा। पिंपरी-चिंचवड़ में भी 15 जनवरी को अन्य 28 नगर निगमों के साथ चुनाव होने जा रहे हैं।
रवींद्र चव्हाण ने कहा कि अजीत पवार को आरोप लगाने से पहले आत्मनिरीक्षण करना चाहिए। उन्हें यह स्पष्ट करना होगा कि वे किस पार्टी की बात कर रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली पार्टी के लिए है ?
बता दें कि अजीत पवार ने शुक्रवार को नगर निगम चुनावों में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को टिकट देने का समर्थन करते हुए कहा था कि खुद उनपर भी 70,000 करोड़ रुपए के सिंचाई घोटाले को अंजाम देने के आरोप लगे थे। लेकिन आज मैं आरोप लगाने वालों के साथ ही सत्ता में हूं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक दोषी साबित न हो जाए, कोई भी अपराधी नहीं होता।
रवींद्र चव्हाण ने कल्याण-डोम्बिवली और राज्य के अन्य हिस्सों में मतदान से पहले ही 40 अधिक भाजपा उम्मीदवारों के निर्विरोध चुनाव को विपक्षी उम्मीदवारों की अनुपस्थिति का हवाला देते हुए उचित ठहराया।
उन्होंने कहा कि कई वर्षों से कल्याण-डोम्बिवली में भाजपा और शिवसेना (अविभाजित) एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रही थीं। अब भाजपा और शिवसेना (शिंदे) के गठबंधन के बाद अब मैदान में कोई विपक्षी दल नहीं बचा है। इसलिए कई सीटों पर कोई विपक्षी उम्मीदवार न होने से निर्वाचन निर्विरोध हो गया है।
