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    झारखंड, ओडिशा व पश्चिम बंगाल सरकारें आदिवासी विरोधी, जानिए पूर्व सांसद सालखन मुर्मू ने ऐसा क्यों कहा

    By Jagran NewsEdited By: Uttamnath Pathak
    Updated: Sat, 22 Oct 2022 02:50 PM (IST)

    आदिवासी सेंगेल अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मयूरभंज (ओडिशा) के पूर्व सांसद सालखन मुर्मू ने कहा है कि झारखंड ओडिशा व पश्चिम बंगाल के सत्ताधारी दल क्रम ...और पढ़ें

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    सालखन मुर्मू, पूर्व सांसद राष्ट्रीय अध्यक्ष, सेंगेल

    जमशेदपुर, जासं। आदिवासी सेंगेल अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मयूरभंज (ओडिशा) के पूर्व सांसद सालखन मुर्मू ने कहा है कि झारखंड, ओडिशा व पश्चिम बंगाल के सत्ताधारी दल क्रमशः बीजेडी, जेएमएम और टीएमसी आदिवासियों के साथ केवल वोट और नोट की राजनीति करते हैं। उनके सामाजिक और राजनीतिक उत्थान के लिए कुछ भी नहीं करते हैं।

    सालखन ने कहा कि इसके दो प्रमाण हैं, पहला फिलहाल वोट के लोभ-लालच और स्वार्थ के लिए इन तीनों राज्यों में तीनों प्रमुख सत्ताधारी दल ने कुर्मी (कुड़मी)-महतो जाति को आदिवासी बनाने का लालच दिखाया है। भारत सरकार को लिखित अनुशंसा भेजा है। यह असली आदिवासियों (संताल, मुंडा, हो, उरांव, भूमिज, ख़ड़िया, गोंड आदि) के लिए फांसी का फंदा है। जेनोसाइड या नरसंहार जैसा भयंकर कुकृत्य है। दूसरा, इन पार्टियों ने आदिवासी समाज में व्याप्त नशापान, अंधविश्वास, डायन प्रथा, आदिवासी महिला विरोधी मानसिकता, वोट को हंड़िया- दारु, चखना, रुपयों में खरीद-बिक्री रोकने और आदिवासी गांव समाज में जनतंत्र और संविधान के उल्लंघन पर सुधार के प्रयास नहीं किया है। उसी प्रकार सभी आदिवासी गांव- समाज में वंशानुगत चलायमान अधिकांश अनपढ़, पियक्कड़, संविधान- कानून से अनभिज्ञ आदिवासी ग्राम प्रधान कार्यरत हैं। इसे शिक्षित व समझदार लोगों द्वारा संचालित कराने में इनकी कोई रुचि नहीं है। अतः इन पार्टियों ने अब तक ‘ट्राइबल सेल्फ रूल सिस्टम’ में सुधार का कोई प्रयास नहीं कर आदिवासी समाज के साथ धोखा किया है।

    उपरोक्त दोनों मामलों पर उपरोक्त तीनों राज्यों में तीनों प्रमुख दलों ने अब तक कुछ भी नहीं किया है। सिवा आदिवासियों को लालीपाप थमा कर वोट लेने के।

    राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री पर भरोसा

    सालखन मुर्मू कहते हैं कि आदिवासी सेंगेल अभियान को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर भरोसा है। नरेन्द्र मोदी ने द्रौपदी मुर्मू को देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठा कर महान ऐतिहासिक संदेश दिया है कि वे भारत के आदिवासियों को सम्मान देते हुए न्याय और अधिकार देना चाहते हैं। इसलिए सेंगेल द्रौपदी मुर्मू और नरेन्द्र मोदी से आशान्वित है।

    राष्ट्रपति से मिलकर सौंपा था ज्ञापन

    सालखन मुर्मू कहते हैं कि मैं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से 26 अगस्त को राष्ट्रपति भवन में मिलर था। इससे पहले 18 अप्रैल को उनके रायरंगपुर (मयूरभंज, ओडिशा) स्थित निवास में मिला था। फिर 22 जून को राष्ट्रपति का उम्मीदवार घोषित होने के तुरंत बाद उनके रायरंगपुर निवास में मिला। आदिवासी समस्याओं और संभावित समाधान के रास्तों पर गहन विचार-विमर्श किया। उम्मीद है कि हम बहुत जल्द प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से भी मिलेंगे और समाधान के रास्तों को पुख्ता करेंगे।

    आदिवासी सेंगेल अभियान कर रहा जागरूक

    आदिवासी सेंगेल अभियान झारखंड, बंगाल, बिहार, ओडिशा, असम आदि प्रांतों में आदिवासियों के सामाजिक-राजनीतिक सशक्तीकरण का जोरदार अभियान चला रहा है। इसका प्रभाव सर्वत्र फैल रहा है। आशा है नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर हम आदिवासियों को न्याय और अधिकार दिलाने के साथ साथ देश की सेवा करने के दायित्व को सफल कर सकते हैं।

    सरना धर्म कोड को मान्यता दिलाने का आग्रह

    आदिवासी सेंगेल अभियान ने भारत सरकार से आग्रह किया है कि सरना धर्म कोड की मान्यता संबंधी फैसला इस वर्ष 20 नवंबर तक कर लिया जाए या सकारात्मक संकेत और वार्तालाप शुरू किया जाए। अन्यथा सेंगेल पांच प्रदेशों में 30 नवंबर 2022 को सुबह से शाम तक रेल-रोड चक्का जाम करने के लिए बाध्य हो सकता है। वास्तव में हम चक्का जाम के पक्षधर नहीं हैं, परंतु चूंकि सरना धर्म कोड मान्यता का मामला संविधान के मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 25) के तहत हमारे अस्तित्व, पहचान व हिस्सेदारी से जुड़ा मामला है, इसलिए हम आंदोलन को मजबूर हैं। आशा है भारत सरकार जल्द एक सकारात्मक फैसला करेगी।