एकनाथ शिंदे नाराज या नहीं, शिवसेना ने बताया; केंद्रीय मंत्री बोले- PM मोदी व अमित शाह को उनके बारे में सोचना चाहिए
महाराष्ट्र में अभी सीएम चेहरे का एलान नहीं हुआ है। मंगलवार को 14वीं विधानसभा का कार्यकाल भी समाप्त हो गया है। उम्मीद है कि जल्द ही सीएम पद पर सहमति बन जाएगी। मंगलवार को एकनाथ शिंदे ने सीएम पद से अपना त्यागपत्र भी दे दिया। इस बीच केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने कहा कि महाराष्ट्र का विवाद जल्द खत्म होना चाहिए।

राज्य ब्यूरो, मुंबई। शिवसेना प्रवक्ता एवं नवनिर्वाचित विधायक दीपक केसरकर ने स्पष्ट कर दिया है कि मुख्यमंत्री पद को लेकर एकनाथ शिंदे नाराज नहीं हैं। भाजपा नेतृत्व जो भी निर्णय लेगा, वह उसे मानेंगे। केसरकर ने यह बात मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा राज्यपाल को अपना त्यागपत्र सौंपने के बाद कही। मगर भाजपा की ओर से अभी भी विधायक दल का नेता चुनने के लिए कोई औपचारिकता शुरू नहीं की गई है।
14वीं विधानसभा का कार्यकाल समाप्त
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के परिणाम 23 नवंबर को आ चुके हैं। भाजपा 132 एवं भाजपानीत गठबंधन महायुति को 236 सीटें मिलने के बावजूद अभी तक नई सरकार के गठन पर स्थिति साफ नहीं हो सकी है। मंगलवार को 14वीं विधानसभा का कार्यकाल भी समाप्त हो गया। मंगलवार को ही मुख्यमंत्री शिंदे दोपहर में जब राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन को अपना त्यागपत्र देने पहुंचे तो दोनों उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस एवं अजित पवार भी वहां पहले से उपस्थित थे।
नाराज नहीं हैं एकनाथ शिंदे
राज्यपाल ने मुख्यमंत्री का त्यागपत्र स्वीकार करने के बाद उन्हें नई सरकार बनने तक कार्यवाहक मुख्यमंत्री का नियुक्तिपत्र सौंपा। इसी अवसर पर राजभवन में प्रेस के सवालों का जवाब देते हुए शिंदे के करीबी विधायक एवं उनके पार्टी प्रवक्ता दीपक केसरकर ने कहा कि मुख्यमंत्री पद के लिए उनके नाम की घोषणा न होने पर एकनाथ शिंदे नाराज नहीं हैं। इस संबंध में भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व जो भी निर्णय करेगा, वह उसे मानेंगे। केसरकर के इस बयान के बाद स्पष्ट हो गया है कि अब एकनाथ शिंदे की ओर से भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री बनाए जाने को लेकर कोई अड़ंगा नहीं डाला जाएगा।
बता दें कि जून 2022 में स्वयं देवेंद्र फडणवीस ने शिवसेना से बगावत करके निकले एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री बनाने की घोषणा की थी। जबकि उस समय शिंदे के साथ शिवसेना के 39 एवं 10 निर्दलीय विधायकों का समर्थन था और भाजपा के पास उसके 105 एवं 10 निर्दलीय विधायकों का समर्थन था। बाद में अपने केंद्रीय नेतृत्व की बात मानते हुए देवेंद्र फडणवीस ने शिंदे के अधीन उपमुख्यमंत्री के रूप में काम करना भी स्वीकार कर लिया था। जबकि 2014 से 2019 तक शिंदे कैबिनेट मंत्री के रूप में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ काम कर चुके थे।
शिंदे को दो कदम पीछे आना चाहिए
आज इसी घटना का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने कहा कि मुझे लगता है कि एकनाथ शिंदे को दो कदम पीछे आना चाहिए। जैसे 2022 में देवेंद्र फडणवीस चार कदम पीछे आए थे और उन्होंने शिंदे के नेतृत्व में काम किया था।
आठवले भाजपानीत महायुति में मित्रदल की भूमिका में हैं। वह और राकांपा अध्यक्ष अजित पवार पहले ही मुख्यमंत्री के रूप में देवेंद्र फडणवीस को समर्थन देने की बात कह चुके हैं। आठवले ने आज भी कहा कि महाराष्ट्र का विवाद जल्द खत्म होना चाहिए। शिंदे ने मुख्यमंत्री के रूप में अच्छा काम किया है। मगर अब अगर भाजपा हाईकमान ने देवेंद्र को मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय किया है और इससे शिंदे नाराज हैं तो उनकी नाराजगी दूर की जानी चाहिए।
शिंदे की नाराजगी दूर की जानी चाहिए: आठवले
आठवले बोले कि अगर शिंदे को उपमुख्यमंत्री बनना ठीक नहीं लगता तो उन्हें केंद्र में आना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को उनके बारे में सोचना चाहिए। महायुति को एकनाथ शिंदे और उनके 57 विधायकों की आवश्यकता है। महायुति को साथ चलना चाहिए। नहीं तो जनता का विश्वास टूट जाएगा।
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