नई दिल्ली, एएनआइ| कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि राहुल गांधी ने कहा कि वह कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष नहीं होंगे। अब बीजेपी की गांधी परिवार को नीचा दिखाने की कोशिश बंद होनी चाहिए। राहुल गांधी स्वाभाविक नेता हैं, उन्हें किसी पद की जरूरत नहीं है। कांग्रेस में लोकतंत्र है और अध्यक्ष पद के लिए चुनाव होंगे, लेकिन क्या भाजपा ने चुनाव किया था? उनके अध्यक्ष का फैसला नागपुर में होता है।

जीत के लिए गांधी परिवार का समर्थन जरूरी

वर्तमान आकलन के अनुसार गांधी परिवार के विश्वस्त राजस्‍थान के मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत की जीत में कोई बड़ा रोड़ा नहीं है, लेकिन जीत का मार्जिन यह बताएगा कि असंतुष्ट खेमे के 23 नेताओं की सोच कुछ लोगों तक सीमित थी या फिर पार्टी में उसका कोई बड़ा आधार था।

कांग्रेस ने गांधी परिवार से बाहर के अध्यक्ष के चुनाव के लिए मैदान तो तैयार कर दिया है, लेकिन यह संदेश हर किसी तक है कि सुप्रीमो या असली चेहरा परिवार ही है। यही कारण है कि राहुल गांधी ने स्पष्ट किया है कि अध्यक्ष बने तो गहलोत को भी मुख्यमंत्री पद छोड़ना ही होगा। अध्यक्ष पद के लिए जो 9,000 डेलीगेट चुने गए हैं वह नामांकन के जरिये हैं। लिहाजा अधिकतर का मतदान भी उनके लिए होगा, जिसे गांधी परिवार का समर्थन होगा।

मनीष तिवारी हो सकते हैं तीसरे प्रत्याशी

पार्टी के अंदर यह अटकलें हैं कि 1996 चुनाव की तर्ज पर तीन उम्मीदवारों के बीच भी मुकाबला हो सकता है। गहलोत और थरूर के बीच तीसरा कौन होगा यह देखना रोचक होगा। माना जा रहा है कि वह संभावित तीसरा प्रत्याशी असंतुष्ट खेमे से हो सकता है। सूत्रों की मानें तो यह मनीष तिवारी हो सकते हैं।

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Edited By: Arun Kumar Singh