'नेहरू ने गजनी को योद्धा बताया है', डिस्कवरी ऑफ इंडिया किताब को लेकर भाजपा ने कांग्रेस को घेरा
भाजपा ने महमूद गजनी द्वारा सोमनाथ मंदिर विध्वंस की 1000वीं बरसी पर कांग्रेस पर हमला बोला। सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि नेहरू ने 'डिस्कवरी ऑफ इंडिय ...और पढ़ें

महमूद गजनी को पंडित नेहरू ने कलाप्रेमी बताया था
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। भाजपा ने सोमवार को महमूद गजनी द्वारा सोमनाथ मंदिर के पहले विध्वंस की 1,000वीं बरसी पर कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला। कहा- पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू व वामपंथी इतिहासकारों ने गजनी को सिर्फ लुटेरा बताकर इतिहास को तोड़ा-मरोड़ा। उन्होंने गजनी को धार्मिक कट्टरपंथी के रूप में पेश नहीं किया, जबकि यह हकीकत थी।
भाजपा सांसद व पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने नेहरू की पुस्तक 'डिस्कवरी ऑफ इंडिया' सहित अन्य पुस्तकों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि सोमनाथ और मथुरा के मंदिरों-भवनों का विध्वंस करने वाले महमूद गजनी को पंडित नेहरू ने कलाप्रेमी बताया था।
एम फैक्टर को बताया मोदी फैक्टर
उन्होंने कहा कि जो लोग देश में बैठकर मैकाले और मार्क्स के मानस पुत्र बनकर सोचते हैं, उनके दिमाग में 19वीं सदी का मैकाले फैक्टर और 20वीं सदी का मार्क्सिस्ट फैक्टर गहराई से बैठा हुआ है, वे इसका उत्तर भी समझ सकते हैं। इसका उत्तर भी एक 'एम' फैक्टर ही है और वह है मोदी फैक्टर। यह एम फैक्टर ही मैकाले की मानसिकता से मुक्ति दिलाएगा।
भाजपा प्रवक्ता ने गजनी द्वारा सोमनाथ मंदिर के विध्वंस की याद दिलाते हुए कहा कि इतिहास के ऐसे आघातों को स्मरण रखना आवश्यक है। इसका कारण यह है कि इस देश की अस्मिता के साथ एक अत्यंत घिनौना मजाक किया गया। हमारी पीढ़ी और उससे पहले की पीढि़यों ने इतिहास की पुस्तकों में पढ़ा है कि महमूद गजनी ने सोमनाथ पर जो कुछ किया, वह केवल धन लूटने के लिए था और उसका कोई धार्मिक उद्देश्य नहीं था।
नेहरू पर बोला हमला
सुधांशु त्रिवेदी ने दावा किया कि इसका स्त्रोत पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुस्तक 'डिस्कवरी आफ इंडिया' है। उसमें लिखा है कि महमूद गजनी एक योद्धा था, न कि आस्था से प्रेरित व्यक्ति और अन्य कई विजेताओं की तरह उसने धर्म के नाम का उपयोग अपने आक्रमणों के लिए किया। वह कोई धार्मिक उन्मादी नहीं था, बल्कि केवल धन कमाने के उद्देश्य से भारत आया था।
उसी पुस्तक में यह भी लिखा गया है कि वह कला का कितना बड़ा प्रेमी था, जबकि गजनी के साथ ही आए उसके अपने इतिहासकार कुतबी ने अपनी किताब 'तारीख-ए-यामिनी' में स्पष्ट रूप से लिखा है कि जिस समय महमूद गजनी ने मंदिर पर अधिकार कर लिया, तब वहां के समस्त पुरोहित और राजा उसके पास गए और प्रार्थना की कि शिवलिग को खंडित न किया जाए। इसके बदले में वे उसे लाखों स्वर्ण मुद्राएं देने को तैयार हैं।
राजेंद्र प्रसाद का किया जिक्र
उसके सलाहकार राजी थे, लेकिन गजनी ने इस प्रस्ताव को यह कहकर ठुकरा दिया कि अपनी पहचान मूर्तियां तोड़ने वाले के रूप में बनाना चाहता है। सुधांशु ने कहा कि जब सोमनाथ की पुन: स्थापना हो रही थी, तब 11 मई 1951 को भारत के प्रथम राष्ट्रपति डा. राजेंद्र प्रसाद ने कहा था कि सोमनाथ की पूर्ण प्रतिष्ठा उस दिन मानी जाएगी, जब भारत की समृद्धि का शिखर भी उसी प्रकार उठता हुआ दिखाई देगा, जिस समृद्धि से आकर्षित होकर अतीत में उस पर क्रूर और बर्बर आतंकी आक्रमण किए गए थे।
1951 में सरदार पटेल के प्रयासों से और जवाहरलाल नेहरू के पुरजोर विरोध के बावजूद वह स्वप्न साकार हुआ था और आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में वही बात साकार होती हुई दिखाई दे रही है, जो डा. राजेंद्र प्रसाद ने कही थी। आज देश पूर्णता की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, चौथा सबसे बड़ा स्टाक एक्सचेंज, तीसरा सबसे बड़ा आटोमोबाइल निर्माता, दूसरा सबसे बड़ी मोबाइल हैंडसेट निर्माता और डिजिटल लेनदेन में दुनिया का नंबर एक देश बन गया है।

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