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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 05, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

'ममता बनर्जी पर NSA के तहत कार्रवाई हो', अमित मालवीय ने बंगाल CM को लेकर क्यों कहा ऐसा?

By Agency Edited By: Piyush Kumar
Published: Tue, 05 Aug 2025 05:00 AM (IST)

भाजपा नेता अमित मालवीय ने दिल्ली पुलिस के परिपत्र पर ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया को भड़काऊ बताते हुए उन पर ...और पढ़ें

ममता बनर्जी पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए: अमित मालवीय।(फाइल फोटो)
ममता बनर्जी पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए: अमित मालवीय।(फाइल फोटो)

एएनआई, नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस द्वारा एक परिपत्र में बंगाली को बांग्लादेशी भाषा बताने के विवाद के बीच भाजपा नेता अमित मालवीय ने सोमवार सुबह बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।

वजह, उन पर भाषाई संघर्ष भड़काने का आरोप है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर बनर्जी की प्रतिक्रिया गलत और खतरनाक रूप से भड़काऊ है।

अमित मालवीय ने ममत बनर्जी पर क्यों साधा निशाना?

साथ ही उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस के पत्र में कहीं भी बंगला या बंगाली को 'बांग्लादेशी' भाषा के रूप में नहीं बताया गया है। ऐसा दावा करना और बंगालियों से केंद्र के खिलाफ उठ खड़े होने का आह्वान करना अत्यंत गैर-जिम्मेदार है। ममता बनर्जी को इस आह्वान के लिए एनएसए के तहत जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।

मालवीय ने एक्स पर कहा- ''दिल्ली पुलिस की ओर से घुसपैठियों द्वारा उपयोग की जाने वाली भाषा को बांग्लादेशी के रूप में संदर्भित करना बिल्कुल सही है। ये शब्द उन बोलियों, वाक्यविन्यास और भाषण पैटर्न को दर्शाते हैं जो भारत में बोले जाने वाले बंगला से स्पष्ट रूप से भिन्न हैं।''

मालवीय ने कहा कि बांग्लादेश की आधिकारिक भाषा न केवल बोली के रूप से भिन्न है, बल्कि इसमें सिलहटी जैसी बोलियां भी शामिल हैं जो भारतीय बंगालियों के लिए लगभग समझ से परे हैं।

ममत बनर्जी ने दिल्ली पुलिस पर क्या लगाया आरोप?

मालवीय ने यह भी स्पष्ट किया कि बांग्लादेशी भाषा का उपयोग अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए भाषाई संकेतकों के रूप में किया गया है। इस बीच, ममता बनर्जी ने रविवार को दिल्ली पुलिस पर बंगाली को बांग्लादेशी भाषा के रूप में वर्णित करने का आरोप लगाया और इसे घृणित, राष्ट्रविरोधी और असंवैधानिक बताया।

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