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    SCO Summit में भी दिखी भारत की कूटनीतिक तटस्थता, पीएम मोदी के सबसे अंत में समरकंद पहुंचने के क्‍या हैं मायने

    PM Modi in SCO Summit चीन और रूस एससीओ शिखर सम्‍मेलन को अमेरिका और पश्चिमी देशों के खिलाफ गठबंधन के तौर पर प्रचारित कर रहे हैं। ऐसे में भारत के रुख पर पूरी दुनिया की नजरें टिक गई हैं। जानें क्‍या हैं इस कूटनीति के मायने....

    By Krishna Bihari SinghEdited By: Updated: Thu, 15 Sep 2022 09:31 PM (IST)
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    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उज्बेकिस्तान के ऐतिहासिक शहर समरकंद पहुंच गए हैं।

    जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की शीर्षस्तरीय सालाना बैठक में हिस्सा लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का विशेष विमान गुरुवार को रात तकरीबन नौ बजे उज्बेकिस्तान के ऐतिहासिक शहर समरकंद के हवाई अड्डे पर उतरा। उज्‍बेकिस्‍तान के प्रधानमंत्री ने पीएम मोदी का स्‍वागत किया। पीएम मोदी आठ पूर्णकालिक सदस्य और चार प्रेक्षक देशों वाले इस संगठन की बैठक में हिस्सा लेने के लिए पहुंचने वाले पीएम मोदी सबसे अंतिम शीर्ष नेता थे।

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    केवल 24 घंटे रुकेंगे पीएम मोदी

    देरी से पहुंचने की वजह से न तो वह आधिकारिक रात्रि भोज में हिस्सा ले पाए और न ही दिन में दूसरे देशों के नेताओं के साथ विशेष तौर पर आयोजित नाव की सवारी कर पाए। मोदी वहां सिर्फ 24 घंटे रुकेंगे और मुख्य समारोह समाप्त होने के कुछ ही घंटे बाद शुक्रवार की रात वह स्वदेश के लिए रवाना हो जाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी का यह कार्यक्रम भारत सरकार की कूटनीतिक तटस्थता की नीति को उजागर करता है।

    इसलिए बच रहा भारत 

    एससीओ की इस बैठक को जिस तरह से रूस और चीन की तरफ से अमेरिका व पश्चिमी देशों के खिलाफ एक मंच के तौर पर प्रचारित किया गया है उससे भारत उसके साथ नहीं दिखना चाहता है। गुरुवार को रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफ‍िंग के बीच हुई मुलाकात के बाद भी यही संकेत दिया गया है। भारत एससीओ का हिस्सा अपनी शर्तों पर बना रहना चाहता है।

    यूक्रेन पर भारत तटस्थ

    यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद भारत ने लगातार यह दिखाया है कि वह ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर रूस के साथ कारोबार करता रहेगा। साथ ही उसने यूक्रेन को भी मदद जारी रखी है। अमेरिका व यूरोपीय देशों के साथ भी लगातार संवाद बना कर रखा है। विदेश सचिव विनय क्वात्रा ने कहा कि पीएम मोदी बहुत ही कम अवधि के लिए उज्बेकिस्तान जा रहे हैं। शुक्रवार को एससीओ की दो बैठकों में हिस्सा लेंगे।

    द्विपक्षीय बैठकों पर असमंजस

    पीएम मोदी की द्विपक्षीय बैठकों को लेकर भी भारत सरकार की तरफ से सिर्फ यह बताया गया है कि उनकी उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जीयोयेव के साथ बैठक होगी। विदेश सचिव ने कहा है कि अगर प्रधानमंत्री की किसी दूसरे नेता के साथ द्विपक्षीय बैठक होती है तो उसे सही समय पर बताया जाएगा।

    इब्राहिम रईसी के साथ मोदी की बैठक तय

    हालांकि, रूस के राष्ट्रपति कार्यालय ने बताया है कि पुतिन और मोदी के बीच मुलाकात तय है। इसी तरह से ईरान के राष्ट्रपति कार्यालय ने भी बताया है कि राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी के साथ मोदी की बैठक तय हो चुकी है।

    चिनफ‍िंग के साथ बैठक के आसार नहीं

    चीन के राष्ट्रपति चिनफ‍िंग के साथ मोदी की मुलाकात को लेकर दोनों देशों की तरफ से कोई पुष्टि नहीं हुई है। पीएम मोदी के बेहद व्यस्त कार्यक्रम को देखते हुए इन दोनों नेताओं के बीच आधिकारिक तौर पर द्विपक्षीय मुलाकात की संभावना कम ही है। हालांकि शुक्रवार को दिन भर चलने वाले कार्यक्रम में मोदी और चिनफ‍िंग तीन बार आमने-सामने होंगे। पाकिस्तान के पीएम शाहबाज शरीफ भी इस बैठक में हिस्सा लेंगे और उनकी भी पीएम मोदी के साथ सिर्फ दुआ-सलाम होने की संभावना है।  

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