बीरमित्रपुर में झुंझनू जैसा भव्य राणी सती मंदिर
झारखंड व ओडिशा की सीमा पर राउरकेला से करीब 25 किलोमीटर की दूरी पर छोटा शहर बीरमित्रपुर जो अंग्रेजों के जमाने के चूना पत्थर खदान बिसरा स्टोन लाइम लिमिट ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, राउरकेला : झारखंड व ओडिशा की सीमा पर राउरकेला से करीब 25 किलोमीटर की दूरी पर छोटा शहर बीरमित्रपुर जो अंग्रेजों के जमाने के चूना पत्थर खदान बिसरा स्टोन लाइम लिमिटेड के नाम से पूरे देश में विख्यात था। इस शहर की ख्याति राणी सती मंदिर के लिए बढ़ रही है। यहां राजस्थान के झुंझनू के तर्ज पर उसी मंदिर की आकृति में देश का दूसरा सबसे बड़ा राणी सती दादी का भव्य मंदिर बना है। यहां ओडिशा ही नहीं बल्कि देश विदेश से पर्यटक दर्शन एवं पूजा अर्चना के लिए आ रहे हैं।
झुझनू की आकृति में बना है मंदिर :
झुझनू धाम राणी सती मंदिर का निर्माण करीब दो एकड़ क्षेत्र में 1967 में बनाया गया था। मंदिर के मुख्य ट्रस्टी गोपाल तुलस्यान की देखरेख में इसे भव्य रूप दिया गया। उनका कहना है कि उनके दादा दुलीचंद तुलस्यान राजस्थान के झुंझनू स्थित राणी सती दादी के परम भक्त थे। उन्होंने ही श्रद्धा के साथ पूजा अर्चना के लिए दादी का छोटा मंदिर तैयार कराया था। राणी सती मंदिर के ट्रस्ट बनने के बाद इसे नया रूप देने की योजना बनी। इसे झुंझनू स्थित दादी के मंदिर की आकृति में ही निर्माण कराने का निर्णय लिया गया। नवीकरण का काम दो चरणों में हुआ। पहला चरण 1994 में तथा दूसरा चरण 2002 में शुरू हुआ। झुझनू मंदिर की पूरा ढांचा संगमरमर के पत्थर से ही बना है। अंदर और बाहर विभिन्न प्रकार की चित्रकारी एवं कलाकारी देखने को मिलता है। मंदिर के अंदर वाले भाग को चांदी से सजाया गया है। मंदिर के ऊपर स्वर्ण कलश लगाए गए हैं। राजस्थान के अलावा वाराणसी एवं अकोला के कलाकार एवं शिल्पकारो ने इसका निर्माण किया है। मंदिर के अंदर ही राम दरबार, शिव मंदिर, गणेश मंदिर भी है। मंदिर परिसर में दो सुंदर फूल के बगीचे हैं।
उत्सव पर होती है विशेष पूजा :
राणी सती मंदिर में हर दिन पूजा अर्चना होती है। इसके अलावा वर्ष भर भादो अमावस्या, मंगसीर नवमी, फागुन की होली में यहां उत्सव का आयोजन होता है। इसमें देश के विभिन्न क्षेत्रों से भक्त पहुंचते हैं। भजन संध्या, गीत संगीत, नृत्य नाटिका, दादी का नगर भ्रमण आदि का आयोजन होता है। मंदिर में हर दिन प्रसाद की व्यवस्था होती है। परिवार के साथ भक्त आकर मंदिर में पूजा अर्चना करते हैं तथा प्रसाद सेवन करते हैं। दूसरे शहर से आने वाले भक्तों के लिए यहां गेस्ट हाउस है, जहां वे ठहर सकते हैं। छुट्टी के दिनों में इस मंदिर में दर्शन व पूजा अर्चना के लिए लोगों की अधिक भीड़ रहती है।

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