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    पश्चिम ओडिशा में नाबालिग अपराधी बढ़े, छोटे-छोटे गैंग बनाकर हत्या और बलात्कार की घटना को दे रहे अंजाम

    Updated: Fri, 02 Jan 2026 02:00 AM (IST)

    पश्चिम ओडिशा में नाबालिगों के बीच अपराध तेजी से बढ़ रहा है, जिसमें चोरी, बलात्कार और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर मामले शामिल हैं। पेशेवर अपराधी और नशा ...और पढ़ें

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    जागरण संवाददाता, राउरकेला। पश्चिम ओडिशा में नाबालिगों के बीच बढ़ता अपराध पुलिस प्रशासन के लिए सिरदर्द बन गया है। चोरी, नशे की तस्करी, बलात्कार और हत्या के प्रयास जैसे जघन्य मामलों में अब नाबालिगों की संलिप्तता तेजी से बढ़ी है। अपराध जगत के पेशेवर अपराधी और नशा माफिया इन किशोरों को लालच देकर अपने नेटवर्क में शामिल कर रहे हैं।

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    कानूनी सहूलियतों और उम्र के आधार पर मिलने वाली राहत के कारण वे जल्दी छूट भी जाते हैं, जिससे दोबारा अपराध की राह पर लौट आते हैं। राउरकेला के छेंड कॉलोनी स्थित टिस्को क्वारी साइडिंग के पास पश्चिम ओडिशा का एकमात्र बाल सुधार गृह संचालित है। इसमें सुंदरगढ़, झारसुगुड़ा, संबलपुर, बरगढ़, देवगढ़, मायूरभंज और केंडुझर जिलों के नाबालिग अपराधियों को रखा जाता है।

    सुधार और आत्मनिर्भरता की दिशा में यहां उन्हें व्यावसायिक प्रशिक्षण, नैतिक शिक्षा और व्यक्तित्व विकास की कक्षाएं दी जाती हैं। इस सुधार गृह की क्षमता 125 है। इनमें 100 बालकों के लिए अवलोकन गृह और 25 के लिए विशेष गृह की व्यवस्था है। वर्तमान में यहां 70 से अधिक नाबालिग अपराधी रह रहे हैं। जिनमें अधिकांश चोरी और बलात्कार जैसे गंभीर मामलों में पकड़े गए हैं। केवल इस वर्ष ही 10 से अधिक नाबालिग बालात्कार के मामलों में यहां लाए गए हैं।

    अधिकांश मामले आदिवासी और आर्थिक रूप से पिछड़े इलाकों से जुड़े हैं। जहां शिक्षा और रोजगार के अवसरों का अभाव है। गरीबी और लालच किशोरों को अपराध की ओर धकेल रही है। कई मामलों में वे छोटे-छोटे गैंग बनाकर पहले चोरी, फिर हत्या के प्रयास और बलात्कार जैसे अपराधों में भी शामिल हो रहे हैं।

    हत्या के लिए सुपारी लेने जैसे मामले भी सामने आ चुके हैं। फिर भी सुधार गृह प्रशासन इन नाबालिगों को मुख्यधारा में लाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। यहा कृषि, संगीत, चित्रकला और तकनीकी प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें रोजगारोन्मुख बनाया जा रहा है। कई किशोर प्रशिक्षण के बाद समाज में लौटकर नौकरी या व्यवसाय कर रहे हैं। साथ ही शिक्षा के इच्छुक बच्चों को उच्च शिक्षा तक पहुंचाने की व्यवस्था भी की गई है।