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    बंगाल में SIR सुनवाई में सेवानिवृत्त न्यायाधीश को भी पेश करनी पड़ी नागरिकता प्रमाण, 200 किमी यात्रा कर लाइन में लगे पूर्व न्यायाधीश

    Updated: Sat, 03 Jan 2026 06:51 PM (IST)

    सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रशांत कुमार मोहंती को नागरिकता प्रमाण के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) सुनवाई में शामिल होना पड़ा। 78 वर्षीय मोहंती कोलकाता से ...और पढ़ें

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    फाइल फोटो।

    जागरण संसू, खड़गपुर। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की सुनवाई के तहत नागरिकता प्रमाण प्रस्तुत करने की प्रक्रिया ने इस बार सभी को चौंका दिया, जब एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश को भी आम नागरिकों की तरह लाइन में लगकर सुनवाई में शामिल होना पड़ा। कोलकाता से पश्चिम मेदिनीपुर जिले के खड़गपुर तहसील अंतर्गत दांतन पहुंचे सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रशांत कुमार मोहंती की मौजूदगी ने लोगों का ध्यान खींचा। 

    78 वर्षीय प्रशांत कुमार मोहंती मूल रूप से दांतन के भवानीपुर गांव के निवासी हैं, हालांकि वर्तमान में वे कोलकाता के गढ़िया क्षेत्र में रहते हैं। हाल ही में उन्हें एसआईआर सुनवाई का नोटिस प्राप्त हुआ था, जिसके बाद वे करीब 200 किलोमीटर की यात्रा कर दांतन पहुंचे। 
     
    सुनवाई के दौरान उन्हें अपनी नागरिकता से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने पड़े। प्रशांत कुमार मोहंती वर्ष 1973 से 1982 तक दांतन में अधिवक्ता के रूप में कार्यरत रहे। 
     
    इसके बाद उन्होंने कांथी, पुरुलिया, मालदा सहित विभिन्न जिला अदालतों में न्यायाधीश के रूप में सेवाएं दीं। वर्ष 2007 में वे राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव पद से सेवानिवृत्त हुए। वे एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार से भी जुड़े हैं। 
    सुनवाई के बाद उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद भी वे नियमित रूप से दांतन में मतदान करते रहे हैं। उन्होंने बताया कि बीडीओ कार्यालय में अधिकारियों का व्यवहार संतोषजनक था, लेकिन इस उम्र में इतनी लंबी यात्रा करना उनके लिए बेहद कष्टदायक रहा। 
     
    उन्होंने आशंका जताई कि उनकी तरह कई बुजुर्ग मतदाताओं को इस प्रक्रिया में परेशानी का सामना करना पड़ रहा होगा। उनकी पत्नी शोभना मोहंती ने भी कहा कि जब एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश और स्वतंत्रता सेनानी परिवार के सदस्य को भी सुनवाई के लिए आना पड़ रहा है, तो आम नागरिकों की स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। 

    इस संबंध में दांतन के बीडीओ उत्पल सरदार ने बताया कि वर्ष 2002 की मतदाता सूची में नाम नहीं होने के कारण नोटिस जारी किया गया था और सुनवाई के दौरान सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। वहीं, दांतन के विधायक बिक्रमचंद्र प्रधान ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव से पहले एसआईआर प्रक्रिया के माध्यम से आम लोगों को परेशान किया जा रहा है, जिसका जवाब जनता समय आने पर देगी।