कंध जनजाति बहुल गांव में धर्म परिवर्तन पर बवाल, पादरी सहित चार ईसाई परिवारों को ग्रामीणों ने बंधक बनाकर पीटा
कोरापुट जिले के गादबागुड़ा गांव में धर्म परिवर्तन विवाद को लेकर तनाव बढ़ गया। ग्रामीणों ने पादरी अशोक तुरुक और चार ईसाई परिवारों को गांव में प्रार्थना ...और पढ़ें

पादरी सहित चार ईसाई परिवारों को ग्रामीणों ने बंधक बनाकर पीटा
जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। धर्म परिवर्तन विवाद को लेकर बुधवार देर रात कोरापुट जिले के नारायणपटना ब्लॉक के गादबागुड़ा गांव में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। गांव में प्रवेश कर प्रार्थना करने के प्रयास के दौरान ग्रामीणों ने पादरी अशोक तुरुक सहित चार ईसाई परिवार को बंधक बनाकर जमकर पिटाई कर दी। सूचना मिलने पर नारायणपटना पुलिस मौके पर पहुंची और पादरी समेत ईसाई परिवारों को छुड़ाकर थाने ले गई।
जानकारी के मुताबिक बीते कुछ महीनों से गादबागुड़ा गांव में धर्म परिवर्तन को लेकर विवाद चल रहा है। विवाद के बाद ईसाई धर्म अपनाने वाले चार परिवार गांव से बाहर रह रहे थे।
धर्म परिवर्तन के लिए कर रहे थे प्रेरित
नए साल की पूर्व संध्या (बुधवार रात) को ये परिवार फिर से गांव में प्रवेश कर प्रार्थना करने लगे और कुछ परिवारों को धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित कर रहे थे। इसकी जानकारी मिलने पर ग्रामीण मौके पर पहुंचे, जिसके बाद स्थिति बिगड़ गई। ग्रामीणों ने पादरी समेत चार ईसाई परिवारों को गांव के बाहर ले जाकर बांध दिया और पुलिस को सूचना दी।
ग्रामीणों के आक्रोश का शिकार हुए चारों परिवारों का कहना है कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया, फिर भी उन्हें गांव से बहिष्कृत कर दिया गया।बुधवार रात वे नए साल की प्रार्थना के लिए पादरी को बुला रहे थे, तभी गांव के लोगों ने उनके साथ मारपीट की।उन्होंने शांति समिति गठित कर विवाद का समाधान निकालने की मांग की है।
कंध जनजाति के लोगों को धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश
ग्रामीणों के अनुसार, गादबागुड़ा गांव में कंध जनजाति के लोग रहते हैं। एक पादरी गांव में आकर झूठे वादों के जरिए एक ही वंश के चार परिवारों को ईसाई धर्म में परिवर्तित करा चुका है। इसके बाद वह गांव के अन्य परिवारों को भी धर्म परिवर्तन के लिए उकसा रहा था।
गांव के मुहाने पर प्रार्थना कराकर भाईचारे और परंपरा को नुकसान पहुंचाया जा रहा था।धर्म परिवर्तन को लेकर जारी अशांति के कारण एक वर्ष के भीतर सात ग्रामीणों की मौत हो चुकी है। अकाल मृत्यु को रोकने के लिए नवंबर 2025 के पहले सप्ताह में ग्रामीणों ने गांव के प्रवेश मार्ग को सील कर गांव की झांकेरी देवी की पूजा-अर्चना की थी।

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