Jagannath Puri Prasad: केमिकल फ्री होगा भगवान जगन्नाथ का भोग, इस तरह बनेगा महाप्रसाद
Jagannath Puri Prasad जगन्नाथ पुरी मंदिर में महाप्रसाद को केमिकल फ्री बनाने के लिए राज्य सरकार ने प्रयास शुरू कर दिए हैं। शुरुआती चरण में जैविक चावल का उपयोग किया जाएगा। इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए एक प्रबंध समिति बनाई जाएगी। कृषि भवन सम्मेलन कक्ष में महाप्रसाद की तैयारी को लेकर एक परामर्श बैठक का आयोजन किया गया।

जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। महाप्रसाद को केमिकल फ्री बनाने के लिए राज्य सरकार की ओर से प्रयास शुरू किए गए हैं। शुरुआती चरण में पुरी जगन्नाथ मंदिर कोठभोग में जैविक चावल का उपयोग किया जाएगा।
इसके अलावा रथयात्रा के दौरान पूरे भोग में ऑर्गेनिक चावल और सब्जियों का इस्तेमाल किया जाएगा। ''अमृत अन्न'' नामक एक विशेष परियोजना लागू की जाएगी और आनंदबाजार में भक्तों को जैविक भोजन से तैयार महाप्रसाद उपलब्ध कराया जाएगा।
पूरी प्रक्रिया को लागू करने के लिए एक प्रबंध समिति बनाई जाएगी और इसमें मंदिर प्रशासन के प्रतिनिधि, सुआर महासुआर आयोग के प्रतिनिधि, उत्पादक समूहों के प्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी शामिल होंगे।
परामर्श बैठक का हुआ आयोजन
कृषि भवन सम्मेलन कक्ष में बुधवार को महाप्रसाद की तैयारी में जैविक चावल के उपयोग पर एक परामर्श बैठक में यह निर्णय लिया गया। इसका स्वागत सुअर महासुआर नियोग ने किया है।
बैठक की अध्यक्षता पुरी जगन्नाथ मंदिर के मुख्य प्रशासक एवं कृषि विभाग के प्रधान सचिव अरविंद कुमार पाढ़ी ने की। देशी किस्म के जैविक धान ''अमृत अन्न'' महाप्रसाद में प्रदेश में उत्पादित ''कालाजीरा, एंटीबास, युवराज जैसे जैविक चावल का उपयोग किया जाएगा।
वहां से कालाजीरा धान को पहले ही जीआई टैग (भौगोलिक सूचकांक) में शामिल किया जा चुका है। इस साल, कोरापुट में 1,365 एकड़ भूमि कालाजीरा धान की खेती की गई है। कोटपाड में पहली बार कालाजीरा धान मंडी खोली गई है।
जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए जैविक प्रमाणन और सब्सिडी का प्रस्ताव है। इसके अलावा, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को क्लस्टर दृष्टिकोण के माध्यम से जैविक चावल का उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
जैविक चावल का करें उत्पादन
प्रारंभिक चरण में, 100 से 200 एकड़ भूमि पर जैविक चावल का उत्पादन करने का लक्ष्य है। बीजों का संरक्षण किया जाएगा और बाद में जैविक चावल के उत्पादन को प्रोत्साहित किया जाएगा।
जैविक उत्पादन के दौरान गोमूत्र, गाय का गोबर, बीजामृत और अन्य जैविक खाद का उपयोग भी राज्य में गौवंश के संरक्षण और विकास में मदद कर सकता है।
बैठक में कृषि निदेशक प्रेम चंद्र चौधरी, ओयूएटी के डीन प्रोफेसर प्रसन्नजीत मिश्रा, पुरी जिला कलेक्टर सिद्धार्थ शंकर स्वांई, पुरी जगन्नाथ मंदिर नीति प्रशासक जितेंद्र कुमार साहू, जगन्नाथ मंदिर विकास प्रशासक देवव्रत साहू, कमांडर सुधाकर पटनायक मौजूद थे।
वहीं सुआर-महासुआर नियोग के अध्यक्ष पद्मनाभ महासुआर और सचिव नारायण महासुआर, वरिष्ठ सेवक बैद्यनाथ महासुआर ने भाग लिया। कोरापुट प्रगति संस्थान के प्रभाकर अधिकारी उपस्थित थे।
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