चिलिका लेक में सुबह 11 बजे तक सभी नावों पर पूर्ण प्रतिबंध, पुरी जिलाधिकारी का सख्त आदेश
पुरी जिलाधिकारी ने घने कोहरे के कारण चिलिका झील में सुबह 11 बजे तक सभी नावों के परिचालन पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह फैसला हाल ही में हुए एक हादसे के ब ...और पढ़ें

चिलिका लेक में सुबह 11 बजे तक सभी नावों पर प्रतिबंध
जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। एशिया के सर्व वृहत खारे पानी की चिलिका झील का नए साल में भ्रमण के लिए जाने वाले पर्यटकों के लिए अहम सूचना है। घने कोहरे को देखते हुए पुरी जिलाधिकारी ने चिलिका झील में नाव परिचालन पर कड़ी रोक लगा दी है।
आदेश के अनुसार पूर्वाह्न 11 बजे तक चिलिका में किसी भी प्रकार की नाव नहीं चलेगी। इसमें पर्यटक बोट, छोटी मोटर बोट, मालवाहक नावें सभी शामिल हैं। जिलाधिकारी ने यह सख्त फैसला बीती रात हुए हादसे के बाद लिया है। घने कोहरे के कारण चिलिका क्षेत्र में दृश्यता बेहद कम हो गई है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बनी हुई है। प्रशासन का कहना है कि यात्रियों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि है।
कोहरे में हादसों से प्रशासन सख्त
घने कोहरे के चलते चिलिका में बार-बार दुर्घटनाएं सामने आ रही हैं। बीते दिन कोहरे की वजह से एक नाव चिलिका झील के बीच फंस गई थी। इस दौरान एक व्यक्ति के पानी में गिरने से उसकी मौत हो गई। इसी घटना को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने नाव परिचालन पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया है।
आदेश के अनुपालन को सुनिश्चित कराने के लिए पुलिस और स्थानीय प्रशासन को सख्त निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही ग्रामीण इलाकों में माइक के जरिए लोगों को सतर्क किया जा रहा है।
प्रशासन ने साफ कहा है कि निर्देशों की अवहेलना करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।इस संबंध में पुरी एसपी, चिलिका विकास प्राधिकरण, पुरी पर्यटन विभाग के अतिरिक्त निदेशक और कोणार्क पर्यटन विकास अधिकारी को भी पत्र भेजा गया है, ताकि आदेश का सख्ती से पालन कराया जा सके।
ओडिशा में घने कोहरे का कहर
गौरतलब है कि राज्य में ठंड से भले ही थोड़ी राहत मिली हो, लेकिन घने कोहरे ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। नयागढ़, अनुगुल, संबलपुर, तालचेर, ढेंकानाल और बौद्ध जिलों में शुक्रवार को दोपहर 12 बजे तक धूप नहीं निकली। इन इलाकों में दृश्यता 50 मीटर से भी कम दर्ज की गई।
इसके अलावा भुवनेश्वर, पारादीप, खुर्दा, केन्दुझर, हीराकुद, पारलाखेमुंडी, सोनपुर और फुलबाणी में भी घना कोहरा छाया रहा।

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