चीन के रक्षामंत्री ने कहा- संप्रभुता की खातिर समुद्री लड़ाई के लिए रहें तैयार
चीन के रक्षामंत्री ने कहा कि देश की संप्रभुता की खातिर सेना को समुद्र में युद्ध की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए।
बीजिंग। चीन के रक्षामंत्री ने कहा कि समुद्र में चुनौतियों से निपटने और अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए युद्ध की तैयारी का आह्वान किया है। रक्षामंत्री चांग वानकुआन की यह टिप्पणी अंतर्राष्ट्रीय ट्रिब्यूनल के उन फैसलों के कई हफ्ते बाद आयी है जिसमें साउथ चाइना सी पर चीन के एकाधिकार के दावे को खारिज कर दिया गया था।
समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, चांग ने राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर बनी स्थिति की गंभीरता खासकर समुद्री खतरे को पहचानने की बात कही।
तटीय प्रांत झिजियांग के दौरे पर गए चांग के हवाले से जो छापा गया उसमें ये कहा गया कि मिलिट्री, पुलिस और लोगों को राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा और अखंडता के लिए एकजुट हो जाना चाहिए। हालांकि, एजेंसी ने ये बात नहीं बताई कि किस दिन रक्षामंत्री ने यह बात कही और ना ही उसका कोई विस्तृत ब्यौरा दिया।
चीन की कोर्ट ने दी चेतावनी, समुद्री सीमा का उल्लंघन करने पर होगी सजा
उधर, चीन की सुप्रीम कोर्ट ने समुद्री इलाकों में प्रवेश को लेकर विदेशियों को चेतावनी जारी की है। इसमें कहा गया है कि ऐसा करने वालों के खिलाफ आपराधिक मामला चलेगा। दोषी पाए जाने पर एक साल तक की सजा हो सकती है। सुप्रीम पीपल्स कोर्ट (एसपीसी) ने समुद्री क्षेत्र पर चीन के अधिकारों को स्पष्ट करने के लिए कुछ नियम बनाए हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस कदम को दक्षिण चीन सागर पर अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल के आदेश को प्रभावहीन करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
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खास बात यह है कि नियमों में कहीं भी दक्षिण चीन सागर या हेग स्थित इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल के फैसले का जिक्र नहीं है। एसपीसी के इन नियमों से चीन को समुद्री आदेश, सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए कानूनी आधार मिलेगा। ये नियम मंगलवार से लागू भी हो गए हैं। नियमों में कहा गया है कि चीन के अधिकार वाले समुद्री क्षेत्रों में अगर चीनी नागरिक या विदेशी अवैध रूप से मछली पकड़ने या वन्यजीवों का शिकार करते पकड़े जाते हैं तो उन्हें आपराधिक तौर पर उत्तरदायी ठहराया जाएगा।
एसपीसी के अनुसार राष्ट्रीय संप्रभुता के लिए न्यायिक शक्तियां महत्वपूर्ण अंग हैं। गौरतलब है कि पिछले माह ट्रिब्यूनल ने दक्षिण चीन सागर पर चीन के दावे को खारिज कर दिया था। हालांकि चीन ने ट्रिब्यूनल का फैसला मानने से इंंकार कर दिया था।
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