गाजीपुर [अवनीश राय]। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर के मुहम्मदाबाद में पाई जाने वाली करइल मिट्टी में अलसी (तीसी) की खेती करने वाले किसानों के दिन बहुरने वाले हैैं। यहां पैदा होने वाली अलसी से यहीं पर ओमेगा कैप्सूल बनाया जाएगा। इसका जिम्मा लिया है गाजीपुर के विकासशील किसान डॉ. रामकुमार राय के किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) शिवांश ने। 627 सदस्यीय संगठन के तहत गांव में ही शिवाश्रय एग्रो लिमिटेड नाम की कंपनी स्थापित की जा रही है, जिसमें ओमेगा कैप्सूल बनाया जाएगा। इसके लिए आइआइटी बीएचयू अपनी लैब उपलब्ध कराएगा। आइआइटी के साथ समझौते पर हस्ताक्षर भी किया जा चुका है। परियोजना पर 25 लाख रुपये की लागत आएगी। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना 'रफ्तार' के तहत यह खर्च केंद्र सरकार उठा रही है।

ऑनलाइन होगी ट्रेडिंग : डॉ. रामकुमार ने बताया कि उनकी कंपनी का कैप्सूल बाजार में मौजूद अन्य ओमेगा कैप्सूल के मुकाबले आधे दाम पर मिलेगा। शुरुआत में प्रति कैप्सूल करीब चार रुपये लागत आएगी। 100 कैप्सूलों की पैकेजिंग पर 100 रुपये अतिरिक्त लगेंगे। बड़े पैमाने पर उत्पादन होगा तो लागत घटकर दो से ढाई रुपये होगी। ऑनलाइन ट्रेडिंग के जरिए सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचने की योजना है।

अलसी के सेवन लाभ : इलाहाबाद विश्वविद्यालय से वैदिक माइथोलॉजी में पीएचडी करने वाले वाले डॉ. रामकुमार ने बताया कि करइल की अलसी में रासायनिक उर्वरक इस्तेमाल नहीं होता। इसमें ओमेगा फैटी एसिड अधिक पाया जाता है। ओमेगा फैटी एसिड के कई लाभ हैैं। यह बैड कोलेस्ट्राल को घटाता और गुड कोलेस्ट्राल को बढ़ाता है। धमनियों में अवरोध नहीं होने देता तो हार्ट अटैक का खतरा भी कम हो जाता है। हड्डी के जोड़ों के लिए प्राकृतिक ल्यूब्रिकेंट का काम करता है। इसके नियमित सेवन से घुटने के दर्द की समस्या नहीं होती। यह कैंसर के खतरे को भी कम करता है। साथ ही स्त्रियों में गर्भाशय के विकार को दूर करने में सहायक होता है।

किसानों को मिलेगा लाभ : इस क्षेत्र में कभी अलसी का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता था, लेकिन कम लाभ के चलते किसानों ने इसकी खेती कम कर दी। ओमेगा कैप्सूल बनाने की योजना सफल होती है तो कच्चे माल के रूप में किसानों से दोगुने मूल्य पर अलसी खरीदेंगे। इससे किसानों का भी आर्थिक उन्नयन होगा।

खनिज से भरपूर और उर्वरक : करइल काली मिट्टी होती है और पोटैशियम, मैग्नीशियम, आयरन और नाइट्रोजन से भरपूर होती है। इसमें नमी धारण करने की क्षमता अधिक होती है और सूखने पर दरारें पड़ जाती हैं। इस कारण इसकी प्राकृतिक गोड़ाई हो जाती है। करइल क्षेत्र के अधिकांश खेतों में बारिश का पानी जमा रहने से यह अधिक उपजाऊ हो जाती है। इसमें मसूर, चना, मटर, अलसी, सरसो आदि की खेती बिना किसी रासायनिक उर्वरक और कीटनाशकों के प्रयोग के होती है।

उचित मूल्य न मिलने से कम हुआ अलसी का रकबा : स्थानीय किसान तेजनारायण राय ने कहा कि पहले पूरे क्षेत्र में मसूर और खेसारी में अलसी की खेती की जाती थी, लेकिन उचित मूल्य न मिलने से इसका रकबा कम हो गया। अब अलसी के महत्व को समझने और उचित मूल्य मिलने पर इसकी खेती बड़े पैमाने पर होगी।

दिल व दिमाग को स्वस्थ रखने में ओमेगा अहम : आइआइटी-बीएचयू, वाराणसी के निदेशक प्रोफेसर प्रमोद कुमार जैन ने बताया कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना 'रफ्तार' की मदद से आइआइटी बीएचयू ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आय और उद्यम के माध्यम से लोगों का जीवन स्तर बेहतर करने का प्रयास कर रहा है। आज की जीवनशैली में बढ़ते अवसाद के बीच दिल और दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए ओमेगा बेहद जरूरी तत्व है। इसे जैविक रूप से उगाने के लिए बेहतर सुविधा और अनुकूल माहौल उपलब्ध कराया गया है।

Edited By: Umesh Tiwari