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    अधिक उम्र में शादी करने वाली महिलाओं को स्तन कैंसर का अधिक खतरा, ICMR की स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा

    Updated: Sat, 20 Dec 2025 09:02 PM (IST)

    आईसीएमआर के अध्ययन के अनुसार, अधिक उम्र में शादी करने वाली महिलाओं में स्तन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। 30 वर्ष की आयु के बाद पहली गर्भावस्था और मोटापे ...और पढ़ें

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    स्तन कैंसर को लेकर खुलासा।

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अधिक उम्र में शादी करने वाली महिलाओं को स्तन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। 30 वर्ष की आयु के बाद पहली गर्भावस्था, मोटापे से भी स्तन कैंसर का जोखिम बढ़ता है। यह जानकारी भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के विज्ञानियों द्वारा किए गए एक अध्ययन में सामने आई है।

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    इस अध्ययन में भारतीय महिलाओं में स्तन कैंसर के जोखिम के कारणों को विस्तार से बताया गया है। भारत में महिलाएं जिन तीन तरह के कैंसरों से सर्वाधिक पीड़ित हैं उनमें स्तन कैंसर शामिल है। देश में स्तन कैंसर के मामलों की संख्या हर साल लगभग 5.6 प्रतिशत बढ़ने की आशंका है।

    31 अध्ययनों की की गई समीक्षा

    आईसीएमआर के नेशनल सेंटर फॉर डिजीज इन्फार्मेटिक्स एंड रिसर्च (एनसीडीआईआर), बेंगलुरु की टीम ने 31 अध्ययनों की समीक्षा की। इनमें 27,925 प्रतिभागियों को शामिल किया गया। इनमें से 45 प्रतिशत को स्तन कैंसर का पता चला था। कैंसर एपिडेमियोलाजी जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट से पता चला कि प्रजनन समय, हार्मोन, मोटापा और पारिवारिक इतिहास मुख्य रूप से भारतीय महिलाओं में स्तन कैंसर के जोखिम को प्रभावित करते हैं।

    शोधकर्ताओं ने कहा, जिन महिलाओं में 50 वर्ष से अधिक आयु के बाद मेनोपाज (रजोनिवृत्ति) होती है उनमें स्तन कैंसर का खतरा अधिक रहता है। अधिक उम्र में शादी करने वाली महिलाओं, 30 वर्ष की आयु के बाद मां बनने वाली महिलाओं को भी स्तन कैंसर का जोखिम रहता है। कई बार गर्भपात कराने वाली और मोटापे का सामना करने वाली महिलाओं को भी स्तन कैंसर होने की अधिक आशंका रहती है। अच्छी नींद न आने, रोशनी वाले कमरे में सोने और अधिक तनाव या टेंशन से भी कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

    विश्लेषण में क्या पाया गया?

    विश्लेषण में पाया गया कि 50 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं का जोखिम तीन गुना अधिक था। 35-50 वर्ष की आयु की महिलाओं में जोखिम में 1.63 गुना वृद्धि हुई। इससे 30 से 40 की उम्र में महिलाओं के लिए प्रारंभिक स्क्रीनिंग का महत्व उजागर होता है ताकि समय पर पहचान और हस्तक्षेप किया जा सके। उच्च आय वाले देशों में जहां 50 वर्ष की आयु के बाद स्तन कैंसर का खतरा बढ़ता है, भारत में युवा महिलाओं में, आमतौर पर 40 से 50 वर्ष की आयु के बीच, स्तन कैंसर की घटनाएं अपेक्षाकृत अधिक हैं।

    इस समीक्षा में भारत में व्यापक, आबादी-आधारित अध्ययन की जरूरत पर भी जोर दिया गया ताकि स्तन कैंसर की रोकथाम और शुरुआती पहचान और इलाज हो सके।

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