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    काराखानों, कंस्ट्रक्शन में महिलाओं की भागीदारी कितनी? नौकरी देने वाली कंपनी ने सर्वे में कर दिया चौंकाने वाला खुलासा

    Updated: Thu, 13 Mar 2025 09:42 PM (IST)

    देश में ब्लू-कॉलर यानी शारीरिक श्रम से जुड़ी नौकरियों में महिलाओं की भागीदारी सिर्फ 20 प्रतिशत है जबकि साल 2024 में 73 प्रतिशत नियोक्ताओं ने महिला श्रमिकों को काम पर रखा था। खुदरा स्वास्थ्य और निर्माण जैसे क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी 30 प्रतिशत तक पहुंची लेकिन दूरसंचार और आईटी जैसे क्षेत्रों में यह 10 प्रतिशत से भी कम है।

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    42 प्रतिशत महिलाओं का मानना है कि उन्हें अपने पुरुष समकक्षों की तुलना में कम वेतन मिलता है।

    पीटीआई, नई दिल्ली। देश में काराखानों, खुदरा, निर्माण जैसे क्षेत्रों में शारीरिक श्रम से जुड़े काम कर रहे लोगों में महिलाओं की भागीदारी महज 20 प्रतिशत है। इन्हें वेतन विसंगतियों से लेकर स्वच्छता की कमी जैसे कार्यस्थल से जुड़ी कठिन चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है।

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    नौकरी खोजने की सुविधा देने वाले प्लेटफार्म इनडीड के सर्वे से पता चलता है कि 2024 में 73 प्रतिशत नियोक्ताओं ने 'ब्लू-कॉलर' यानी शारीरिक श्रम से जुड़ी भूमिकाओं के लिए महिलाओं को काम पर रखा। जबकि देश भर में महिलाओं की भागीदारी 20 प्रतिशत पर स्थिर रही।

    किन सेक्टर में महिलाओं की भागीदारी कितनी?

    खुदरा, स्वास्थ्य और औषधि, निर्माण और रियल एस्टेट, यात्रा तथा होटल जैसे उद्योग औसतन 30 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी के साथ अग्रणी हैं। वहीं दूरसंचार, बीएफएसआइ (बैंक, वित्तीय सेवाएं और बीमा) और सूचना प्रौद्योगिकी/सूचना प्रौद्योगिकी संबंधित क्षेत्रों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 10 प्रतिशत से कम है।

    सर्वे में शामिल आधी से अधिक महिलाओं ने काम के लचीले घंटे की कमी को एक बाधा बताया। 'ब्लू-कालर' नौकरियों में काम के घंटे में लचीलेपन की कमी से महिलाओं के लिए काम और व्यक्तिगत जिम्मेदारियों को संतुलित करना मुश्किल हो जाता है। 42 प्रतिशत महिलाओं का मानना है कि उन्हें अपने पुरुष समकक्षों की तुलना में कम वेतन मिलता है।

    क्या मानते हैं नियोक्ता?

    नियोक्ताओं का मानना है कि हुनरमंद और उपयुक्त प्रतिभा की कमी और नौकरी छोडने की ऊंची दर महिलाओं को काम पर रखने की प्रमुख बाधाएं हैं। स्वास्थ्य सेवा की बढ़ती लागत भी एक चुनौती है। जबकि महिलाएं बीमा और वेतन सहित चिकित्सा अवकाश को कार्यस्थल की महत्वपूर्ण अपेक्षाओं के रूप में देखती हैं।

    इनडीड के ब्रिक्री प्रमुख शशि कुमार कहते हैं, "नियोक्ताओं को शारीरिक श्रम से जुड़े क्षेत्रों में महिलाओं के लिए कौशल, सही परामर्श और नेतृत्व विकास में निवेश करना चाहिए। आज महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना केवल विविधता की बात नहीं है, बल्कि यह एक आर्थिक आवश्यकता भी है।"

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