मुलायम ने दिए आदेश, पर कहां से आएंगे इतने मुस्लिम सिपाही, दरोगा
सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के आदेश को अमल में लाने के लिए यूपी पुलिस को कम से कम छह हजार मुस्लिम सिपाही और 1505 दरोगा चाहिए। सपा के मुस्लिम प्रेम को देखते हुए पुलिस महकमा पहले से ही इस राह पर है। हालांकि थानों के सापेक्ष मुस्लिम सिपाही और दरोगा की पर्याप्त संख्या को लेकर संशय है। गुरुवार को एनेक्सी के
लखनऊ [जागरण ब्यूरो]। सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के आदेश को अमल में लाने के लिए यूपी पुलिस को कम से कम छह हजार मुस्लिम सिपाही और 1505 दरोगा चाहिए। सपा के मुस्लिम प्रेम को देखते हुए पुलिस महकमा पहले से ही इस राह पर है। हालांकि थानों के सापेक्ष मुस्लिम सिपाही और दरोगा की पर्याप्त संख्या को लेकर संशय है।
गुरुवार को एनेक्सी के मीडिया सेंटर में एडीजी/आइजी कानून-व्यवस्था राजकुमार विश्वकर्मा और विशेष सचिव गृह वीरेश्वर सिंह ने मुस्लिम पुलिसकर्मियों के बारे में कोई सटीक जानकारी तो नहीं दी, लेकिन विश्वकर्मा ने यह जरूर कहा कि 'मुसलमान पुलिसकर्मियों की इतनी संख्या तो है ही कि हर थाने पर उनकी तैनाती की जा सके।' गौर करें तो महकमे में कभी जाति और मजहब के आधार पर पुलिसकर्मियों की गणना नहीं हुई। यूपी में कुल 1505 थाने हैं। यहां सिपाहियों के 2.10 लाख पद के सापेक्ष सिर्फ 96414 की ही तैनाती है। इसी तरह मुख्य आरक्षी के भी 49210 पदों के सापेक्ष सिर्फ 8859 और उपनिरीक्षक के करीब बीस हजार पद के सापेक्ष लगभग नौ हजार उपनिरीक्षक तैनात हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि मुसलमान पुलिसकर्मियों की पर्याप्त संख्या कहां से आयेगी।
खुद सपा सरकार ही यह दावा करती रही है कि सपा के अलावा बाकी सरकारों में पुलिस में मुसलमानों की भर्ती बहुत ही कम संख्या में हुई है। शासन स्तर पर थानाध्यक्षों की तैनाती के लिए पहले से यह व्यवस्था है कि 21 प्रतिशत अनुसूचित जाति, 27 प्रतिशत पिछड़ी और आठ प्रतिशत अल्पसंख्यक थानेदारों की तैनाती की जाए। हालांकि यह आंकड़ा कभी दुरुस्त नहीं हुआ।
बसपा की सरकार में थानों में अनुसूचित जाति के थानेदार और सपा की सरकार में यादव कोतवालों की तादाद कुछ ज्यादा ही दिखती है। फिर आंकड़ों और आरक्षण का कोई मायने नहीं रहता है। जहां तक सिपाही और दरोगा की तैनाती में निर्धारण की बात है तो उसके लिए पुलिस अधीक्षकों को ही अधिकार है।
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